इंडिया अमेरिका 2+2 मीटिंग में क्या हुआ बेहद खास??


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Reference -


Majority
House - Democrats

Senate - Republicans

कल भारत और अमेरिका के बीच दूसरी २+२ मीटिंग का आयोजन वाशिंगस्टन DC में किया गया.



यहाँ पर याद रखना जरूरी है, पिछली बार पहली २+२ मीटिंग का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था, जिसमे दोनों देशो ने Communications Compatibility and Security एग्रीमेंट पर साइन किये थे. उसके बाद अमेरिका ने अपने मेजर डिफेंस पार्टनर इंडिया को STA-१ स्टेटस दे दिया था, ताकि जिस तरह अपनी सेंसिटिव डिफेंस टेक्नोलॉजी अमेरिका नेटो देशो के साथ शेयर करता है, उतनी ही आसानी से वह ऐसा भारत के साथ कर सके.



द्विपक्षीय सम्बन्धो को मजबूत करने की राह में साथ आगे बढ़ते हुए, दोनों देशों ने अब Industrial Security एनेक्स एग्रीमेंट पर भी साइन कर लिए हैं. 



जिसके साथ ही अमेरिका की हथियारों का निर्माण करने वाली बड़ी बड़ी कंपनियां भारत की प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के साथ मिलकर डेवलपमेंट और प्रोडक्शन कर पाएंगी.



आप सभी को इस आंकड़े का अंदाज़ा होगा, की वर्ष 2008 तक भारत और अमेरिका के बीच जीरो डिफेंस ट्रेड होता था, जो इस साल बढ़कर 18 बिलियन डॉलर यानी की 126 हज़ार करोड़ तक पहुंच गया है.



अभी जब हम बात कर रहे हैं, भारत और अमेरिका के बीच 7.5  बिलियन डॉलर से भी अधिक की डील पर बातचीत चल रही है. कहने की जरूरत नहीं है, भारत को हथियार बेचकर अमेरिका बहुत पैसा कमा रहा है.



जब भी कभी भारत अमेरिका से कोई हथियार खरीदता है, तो आप सभी लोगों का यह कहना बहुत सही होता है, की इन रक्षा उपकरणों का डेवलपमेंट और प्रोडक्शन भारत में ही क्यों नहीं किया जाता है? 




अब जैसा की भारत अमेरिका के साथ Industrial Security Annex (ISA) एग्रीमेंट में शामिल हो गया है, अमेरिका को विश्वास रहेगा, की भारत में उसकी टेक्नोलॉजी सुरक्षित रहेगी.



जैसा की अभी अमेरिकन कंपनी लॉकहीड मार्टिन और बोईंग 15 बिलियन डॉलर के 114 Medium Multi-Role Combat एयरक्राफ्ट्स के प्रोजेक्ट के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, अगर इन दोनों में कोई एक कंपनी यह कॉन्ट्रैक्ट जीत जाती है, तो भारत में इन लड़ाकू विमानों का उत्पादन चालू करने के पहले अमेरिका और भारत के बीच ISA का होना जरूरी था.



जैसा की आपको अंदाज़ा होगा, की यदि अमेरिका को यह 114 लड़ाकू विमानों के भारत में उत्पादन का प्रोजेक्ट ना भी मिला, तो भी भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस इक्विपमेंट डेवलपमेंट और  प्रोडक्शन को बढ़ाने के दौरान भविस्य में सामने आने वाली रुकावटों को ISA  एग्रीमेंट ने आज ख़तम कर दिया है.



अगर किसी ने लेफ्ट लिबरल का काला चस्मा नहीं पहना है, तो उसे भारत और अमेरिका के बीच हुए ISA  एग्रीमेंट से परेशानी नहीं होना चाहिए.



आगे बढ़ते हुए, भारत और अमेरिका ने स्पेस, साइंस और उद्यमिता के छेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों देशो के इन्नोवेटर्स के लिए शार्ट टर्म इंटर्नशिप को शुरू करने का निर्णय लिया.



साथ ही भारत में वाटर मैनेजमेंट कैसे किया जा रहा है, इसके सही आकलन के लिए US जियोलाजिकल सर्वे और भारत की वाटर रिसोर्स मिनिस्ट्री के बीच एक एग्रीमेंट किया गया. 



आप सभी को पता है, वाटर मैनेजमेंट के मामले में हम कितने कमजोर हैं, गिरते हुए भूजल स्तर की समस्या से आप सभी परिचित है. इसलिए इस छेत्र में अमेरिका की किसी भी प्रकार की मदद का हमें स्वागत करना चाहिए.



साथ ही people to people एक्सचेंज को बढ़ाने के लिए, दोनों देशो के लेजिस्लेटर्स के लिए भी एक एक्सचेंज प्रोग्राम को भी चालू किया जायेगा. अच्छा है, दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सांसदों के स्तर पर आपसी सहयोग और समझ का विकास करे.



इसके अलावा भारत ने अमेरिका को याद दिलाया, की यदि भारत और अमेरिका के बीच सर्विसेज के छेत्र में आपसी सहयोग और व्यापार बढ़ पाया है, तो उसका कारन यह था,  की भारत से हाइली स्किल्ड प्रोफेशनल्स को बिना किसी भेदभाव के अमेरिका में काम करने दिया गया. 



उम्मीद है, अमेरिका को भारत की डिप्लोमेटिक भासा समझ आएगी, और वह H1B और नया वीसा लेने में भारतियों के द्वारा फेस की जा रही समस्यों को ख़तम करने का प्रयास करेगा



जब अमेरिकी आंकड़ों के ही मुताबिक वहां पर बेरोजगारी ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गयी है, तो हो सकता है, की H1B वीसा देने में अमेरिका लचीला रुख अपनाये.



लेकिन जैसा की अगले साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव है, इस मुद्दे पर भारत के लिए वीसा के मामले में कोई पॉजिटिव डेवलपमेंट होगा, इसकी सम्भावना बहुत ही कम जान पड़ती है. 



जहाँ तक सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का सवाल है, अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ कर दिया की, वह भारत के लोकतंत्र का सम्मान करते हैं. और इस एक्ट के ऊपर भारत में संसद के अंदर और बाहर जमकर डिबेट हुई हैं, और हो भी रही है.



अमेरिका को यह बात समझ आ गयी है, की भारत ने अपने तीन पड़ौसी देशो में दशकों की प्रताड़ना से परेशान Minority समुदाय के लोगों के  लिए यह कानून बनाया है.



यह छोटी सी बात सात समुंदर पार बैठे अमेरिकियों के गले उतर गयी है,  तो भारत के लिबरल एक्सपर्ट्स को सांप सूंघ गया है. 



भगवान ना करे, अमेरिका सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ यदि कोई स्टेटमेंट जारी कर देता, तो आज भारत के लिबरल एक्सपर्ट क़ुतुब मीनार पर चढ़ कर चिल्ला रहे होते. 


तभी तो वह आज ट्रम्प के महावियोग प्रस्ताव के अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस में पास होने की खुसिया मना रहे हैं. आपको भी पता है, पूरी रिपब्लिकन पार्टी ट्रम्प के पीछे खड़ी है. और यह महावियोग प्रस्ताव अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट तक चढ़ ही नहीं पायेगा. 

आपको समझ आ गया होगा, महाभियोग प्रस्ताव के इस पुरे राजनैतिक तमासे का समबन्ध राष्ट्रपति ट्रम्प के पहले कार्यकाल की कुर्शी छीनने से है ही नहीं, इसका मुख्या उद्देश्य यह है, की ट्रम्प को अगले साल दूसरा कार्यकाल ना मिले.

इसलिए अमेरिकी राजनैतिक खेल तो अभी और गरम होगा, यह आपको भी पता है.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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