महाथिर का सपना टूटा,पाकिस्तान ने मलेशिया समिट से पल्ला क्यों झाड़ा??


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आप सभी को याद होगा, अगस्त महीने में कश्मीर के ऊपर से धरा 370 की काली चादर हटने के बाद मलेशिया और टर्की ऐसे दो देश थे, जिन्होंने सितम्बर महीने में UN जनरल असेंबली में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुल कर समर्थन किया था.



तभी मलेशिया के प्रधान मंत्री ने टर्की के प्रेजिडेंट और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करि, और निश्चय किया, की तीनो देश मिलकर एक नया आर्गेनाइजेशन बनाएंगे.



आप सभी को पता है, मलेशिया और टर्की पर चौधरी बनने का भूत सवार है, और अमेरिका के धरती पर जिस नए आर्गेनाइजेशन के आईडिया ने जन्म लिया था, वह बड़ा होकर सऊदी अरब के नेतृत्वा वाले आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन को ही चुनौती देने वाला था.





इसलिए सऊदी अरब से मिले हवाई जहाज में बैठकर New यॉर्क पहुंचे पाकिस्तान के प्रधान मंत्री की यह हरकत सऊदी अरब को इतनी ना गवार गुजरी, की जब सऊदी अरब के हवाई जहाज में बैठकर गर्व के साथ पाकिस्तान लौट रहे इमरान खान की यात्रा को आसमान में ही कैंसिल कर दिया गया, और फिर इमरान खान साहिब को कमर्शियल एयरलाइन में धक्के खाकर पाकिस्तान लौटना पड़ा.



लेकिन इसके बाबजूद पाकिस्तान की अक्ल ठिकाने पर नहीं आयी. और उन्होंने 29 नवंबर को 18 से 21 दिसंबर के बीच मलेशिया की राजधानी कुआला लुम्पुर में होने वाली समिट में भाग लेने के लिए इनविटेशन को फोर्मल्ली स्वीकार कर लिया.



कुआला लुम्पुर समिट में Malaysia, Indonesia, Pakistan, Turkey और क़तर के राष्ट्र अध्यक्षो को भाग लेना था. और इसमें 50 इस्लामिक देशो को invite किया गया था. इसलिए किसी भी अंदाज़ से देखा जाये, यह मलेशिया और टर्की का बहुत बड़ा सपना था.



इसके बाद पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने 14 दिसंबर को सऊदी अरब की यात्रा करि. ताकि सऊदी अरब से परमिशन मिल जाये, और वह कुआला लुम्पुर समिट में भाग ले सके.



लेकिन सऊदी अरब और UAE का साफ़ तौर पर मानना था, की यह नया आर्गेनाइजेशन मुस्लिम भाईचारे यानि उम्माह के टुकड़े टुकड़े कर देगा.



और फिर सऊदी अरब के प्रेशर के आगे झुकते हुए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने कुआला लुम्पुर समिट में पाकिस्तान के किसी भी स्तर पर पार्टिसिपेशन से इंकार कर दिया.



जैसा की मलेशिया के प्रधानमंत्री के सपने की उड़ान से पहले ही पाकिस्तान ने उसे जमीं में दफ़न  कर दिया, तो महाथिर मोहम्मद का कहना है, की ऐसा नहीं है, की सऊदी अरब के दवाब में आकर पाकिस्तान इस समिट से पीछे हट गया है.



वल्कि हो सकता है, किन्ही अन्य कारणों से उन्होंने कुआला लुम्पुर समिट से पीछे हटने का निर्णय लिया हो.



और कुआला लुम्पुर समिट में भाग लेना है या नहीं, यह पाकिस्तान की चॉइस है, और इस्लाम में कोई किसी को फाॅर्स नहीं कर सकता है.



अब आप देखिये, की यह देश कितना इनोसेंट बनने की कोसिस कर रहे हैं.



एक ओर पाकिस्तान को कुआला लुम्पुर समिट में भाग नहीं लेना है, क्योकि वह मुस्लिम उम्माह को तोडना नहीं चाहता है, तो दूसरी ओर मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्लाम में इतना विस्वास रखते हैं, की वह पाकिस्तान पर कुआला लुम्पुर समिट  को अटेंड करने के लिए दवाब नहीं बनाना चाहते हैं.



लेकिन आप को भी पता है, ये सब बातें जनता को उल्लू बनाने की कोसिस के अलावा कुछ नहीं है.



यह सब पैसे और पावर का खेल है. एक और सऊदी अरब ने पाकिस्तान में 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की कसमे खा रखी हैं, तो दूसरी और जब पाकिस्तान 22 वे बेलआउट के लिए IMF से मोलभाव कर रहा था, तब सऊदी अरब ने 6 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता मुहैया करवाई थी.



जब वर्ष 2014 में पाकिस्तान का रुपैया धड़ाम से नीचे गिरा था, तब सऊदी अरब ने ही पाकिस्तान को 1.4 बिलियन डॉलर की मदद करि थी.



अगर आप पीछे जाएँ, तो परमाणु परिक्षण के बाद पाकिस्तान यदि अंतरास्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर पाया, तो इसमें सऊदी अरब ने भी बड़ी सहायता करि थी.



अभी जबकि पाकिस्तान IMF के ICU में भर्ती है, उसे मलेसिया और टर्की के सपनो से ज्यादा सऊदी अरब और UAE के डॉलर्स की जरूरत है.



जैसा की पाकिस्तान ने मलेशिया और टर्की के गुब्बारे की हवा निकाल दी है, यह देखना रोचक होगा, की ये दोनों देश चीन के साथ पाकिस्तान को अगले साल फरबरी में FATF की ब्लैकलिस्ट में जाने से बचाते हैं या नहीं.



यहाँ पर हमें यह नहीं सोचना चाहिए, की भोले भाले पाकिस्तान ने सऊदी अरब के प्रेशर में आकर कुआला लुम्पुर समिट में भाग लेने से मना कर दिया होगा.



हो सकता है, पाकिस्तान ने बदले में सऊदी अरब और UAE से यह माँगा हो, की ये दोनों देश भारत के करीब जाना बंद करें, और OIC भारत का और जमकर विरोध करे.



लेकिन आज दिवालिये पाकिस्तान की आर्थिक हालत ऐसी है, की लगता नहीं है, की वह सऊदी अरब और UAE से बदले में कुछ ज्यादा ले पायेगा.



फिर भी हमें यहाँ पर थोड़ा सा सजग  रहने की जरूरत है, यह देखने वाली बात होगी, की भारत के सऊदी अरब और UAE के साथ सम्बन्ध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं. ताकि हम समय पर कदम उठाकर भविस्य में होने वाले नुकसान को मिनीमाइज कर सकें.



अभी हाल फिलहाल तो पैसे और पावर के सामने घुटने टेकते हुए 94 साल के महाथिर मोहम्मद के बचकाना सपने को पाकिस्तान ने चकना चूर कर दिया है. अब देखते हैं, कुआला लुम्पुर समिट  क्या हासिल कर पाती है?

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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