योगी सरकार उपद्रवियों की सम्पत्तियाँ जब्त करेगी! कानून क्या कहता है?


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Protest But Peacefully



Reference -





आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

जैसा की हम सभी देख रहे हैं,पिछले कुछ दिनों से सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं.



जो लोग इन विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं, वह भी सार्वजनिक तौर पर  इस बात का समर्थन  करने से झिझकेंगे, की विरोध प्रदर्शनों को हिंसक होना चाहिए, जिससे पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को नुकसान उठाना पड़े.



लेकिन फिर भी आज की सच्चाई यह है, की हमारे देश में ऐसे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमे property को बिना सोचे समझे बड़े पैमाने पार जलाया जा रहा है.



यहाँ पर साफ़ करने वाली बात यह भी है, की ऐसा नहीं है, की यह सब सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के विरोध प्रदर्शनों से ही चालू हुआ है. हम सभी ने कई बार देखा है, मुद्दा कोई भी हो, विरोध की आवाज़ को बुलंद करने के लिए पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को जलाना चालू कर दिया जाता है.



सबसे पहले तो बात यह है, की यदि उपद्रवी इस सार्वजानिक नुकसान की भरपाई ना करें, तो इसके लिए पैसा हम सभी के टैक्स से ही निकाला जायेगा.



आपने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को यह कहते सुना होगा, की जो ऐसे हिंसक काम के पीछे हैं, उसकी भरपाई भी उन्हें ही करनी होगी. और इसके लिए ऐसे उपद्रवी तत्वों की सम्पत्ति जब्त करके नीलाम कर दी जाएगी.



इसलिए सवाल उठता है, की न्याय की दृस्टि से इस नुक्सान की भरपाई कौन करेगा?



Prevention of Damage to Public Property एक्ट के मुताबिक पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वाले को पांच सालों तक की सजा मिल सकती है, और उसे फाइन भी भरना पड़ सकता है.





लेकिन चूँकि इस कानून से जमीं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ पाया, इसलिए अगस्त 2016 में और अक्टूबर 2018 में यह सवाल सुप्रीम कोर्ट में उठा भी है.



सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2009 के जजमेंट में यह साफ़ कर दिया गया था, की यदि आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई उन्ही लोगों से की जाएगी, जो उस आंदोलन का आह्वाहन करते है.



इस बारे में वर्ष 2018 में guideline जारी करके सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ़ किया, की उपद्रवियों के द्वारा पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को हुए नुकसान के निर्धारण के लिए क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति की जाये.



और नुकसान की भरपाई ना सिर्फ उन लोगों से की जाये, जिन्होंने एक्चुअली नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उनके पीछे खड़े बड़े नेताओं और संगठनो से भी हरज़ाना वसूल किया जाये.



लेकिन आज की सच्चाई हमारे सामने है, की सुप्रीम कोर्ट की साफ़ साफ़ guideline के बाबजूद भी जब भी कोई विरोध प्रदर्शन होता है, तो मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए आग का सहारा लिया जाता है.



यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह भी है, की कुछ राज्यों जैसे की पंजाब और हरयाणा ने ऐसे कानून भी बनाये हैं, जिसके अनुसार राज्य सर्कार नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई भी कर सकती है.



फिर भी जरूरी है, की पुरे देश में समानता के लिए Prevention of Damage to Public Property एक्ट को अमेंड किआ जाये, ताकि उपद्रवी तत्वों की जल्दी से पहचान करके उनसे भरपाई की जा सके. इस बारे में कुछ कानूनी बदलाव प्रस्तावित भी है. लेकिन उनका कानून में शामिल होना अभी बाकी है.



अगर सुप्रीम कोर्ट आदेशों और guideline पर अमल करके अभी हाल में चल रहे हिसात्मक प्रदर्शनों पर काबू किया जा सके, तो अच्छा होगा. 

कानून तो हैं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और guideline भी है, अब देखते हैं, इन्हे जमीं पर लागु कौन करता है. 

जहाँ तक लिबरल एक्सपर्ट्स का सवाल है, हमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, यदि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और गाइडलाइन्स में भी अब कमियां निकालने लगे.क्योकि उनका पालन उत्तर प्रदेश कर रहा है.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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