भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल से मीटिंग कैंसिल करि?
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Reference -
https://indianexpress.com/article/india/s-jaishankar-us-congressional-resolution-on-kashmir-6176489/
जैसा की आपको पता है, भारत से विदेश और रक्षा मंत्री अमेरिका में two प्लस two मीटिंग में भाग लेने के लिए अमेरिका गए हुए थे.
इस मीटिंग के बाद भारत के विदेश मंत्री को कश्मीर की स्थिति पर बात करने के लिए अमेरिका के एक प्रतिनिधि मंडल से मिलना था, जिसमे अमेरिकी संसद के निचले सदन कांग्रेस के सदस्य शामिल थे.
इस प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व House Foreign Affairs Committee के चैयरमेन कर रहे थे. और इस प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मूल की अमेरिकी संसद Pramila जयपाल भी शामिल थी.
इसलिए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लीडर से कहा, की यदि Pramila जयपाल इस प्रतिनिधि मंडल में रहती है, तो भारतीय विदेश मंत्री इस मीटिंग में भाग नहीं ले पाएंगे.
जिसके जवाब में अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल के नेता ने Pramila जयपाल को प्रतिनिधि मंडल से बहार करने से मना कर दिया.
तो आक्रामक भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात कैंसिल कर दी.
बस फिर क्या था, अमेरिकन मीडिया में कोहराम मच गया.
Pramila जयपाल ने भी ट्वीट कर दिया, मीटिंग का कैंसिल होना सिद्ध करता है, की भारत सर्कार अपने से अलग विचारों को सुनना ही नहीं चाहती है. और इस घटनाक्रम से उन्हें बड़ी चिंता हो रही है.
इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्री का कहना था, वह उन लोगों से मिलना पसंद करते हैं, जो ओपन mind से मिलने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जो लोग पहले ही अपना मन बना चुके हैं, उनसे मिलने में भारतीय विदेश मंत्री को कोई रूचि नहीं है.
इसलिए सवाल उठता है, Pramila जयपाल ने ऐसा क्या कर दिया, की भारतीय विदेश मंत्री उनकी शकल तक देखना नहीं चाहते हैं.
सबसे पहले तो साफ़ करने वाली बात हैं, Pramila जयपाल आती तो हैं, अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं, लेकिन उन्हें वामपंथी विचारों के लिए जाना जाता है.
अक्टूबर महीने में कश्मीर के ऊपर जब अमेरिकी संसद में सुनवाई हुई थी, तब उन्होंने मोदी सर्कार और आरएसएस की आलोचना करि थी.
54 वर्षीय अमेरिकी सांसद Pramila जयपाल ने अभी हाल ही में U.S. House of रेप्रेसेंटेटिवेस में एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसमे भारत से आह्वाहन किया गया था, की कश्मीर से इंटरनेट पर पावंदी को ख़तम कर देना चाहिए और कश्मीर में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स का सम्मान करना चाहिए.
Pramila जयपाल के द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव का अमेरिकी संसद में क्या हश्र होगा, यह तो देखने वाली बात होगी.
लेकिन भारतीय विदेश मंत्री ने साफ़ कर दिया, की वह इस प्रस्ताव से परिचित है, लेकिन उसमे कश्मीर के बारे में सही समझ को लिखा नहीं गया है, और भारत सर्कार कश्मीर में जो कर रही है, उसको रेसोलुशन में सही ढंग से पेश भी नहीं किया गया है. इसलिए भी उन्हें Pramila जयपाल से मिलने में कोई इंटरेस्ट नहीं है.
जबकि यहाँ पर दोनों पक्षों का स्टैंड क्लियर हैं, इसलिए हमें यह देखना होगा, की कौन यहाँ पर ज्यादा सही है?
सबसे पहले तो यदि Pramila जयपाल को अपने विचार प्रकट करने का, और अमेरिकी संसद में कोई भी प्रस्ताव पेश करने का हक़ है, तो भारत के विदेश मंत्री जयशंकर को भी हक़ है, की वह इसका निर्णय करें, की उन्हें किससे मिलना है, और किससे नहीं.
जहाँ तक अमेरिकी संसद में मोदी सर्कार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किये जाने का मुद्दा है, तो भी सवाल यही है, की अमेरिकी संसद को क्या हक़ है, की वह भारत के इंटरनल मामले में और कश्मीर के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के काम काज में दखल दे?
कश्मीर में भारत सर्कार की रणनीति सफल होती है, या नहीं, क्या इसके आकलन के लिए Pramila जयपाल ने उसे थोड़ा सा समय नहीं देना चाहिए.
लेकिन एक पॉइंट यह भी है, Pramila जयपाल की उपस्थिति के कारण मीटिंग को कैंसिल करके भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल के अन्य सदस्यों को भारत सर्कार का पक्ष समझाने का मौका गँवा दिया.
इसलिए सभी पक्षों को देखते हुए, हमें ऐसा लगता है, की भारतीय विदेश मंत्री ने मीटिंग को कैंसिल करके, Pramila जयपाल की पोजीशन को मजबूत ना करते हुए. इस मीटिंग को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए था.
वैसे भी भारत सर्कार के टॉप मोस्ट डिंप्लोमैट होने के नाते उन्हें अपनी सर्कार का logical पक्ष दुश्मनो के बीच भी मजबूती के साथ रखना चाहिए.
आपके अनुसार क्या विदेश मंत्री जी को यह मीटिंग कैंसिल करनी चाहिए थी?
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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