इंडिया और ओमान के बीच होगा ऐतिहासिक मेरीटाइम कोऑपरेशन एग्रीमेंट!!
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Reference
https://timesofindia.indiatimes.com/india/access-to-omani-port-to-help-india-check-china-at-gwadar/articleshow/62908230.cms
https://en.wikipedia.org/wiki/India%E2%80%93Oman_relations
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/india-oman-to-sign-maritime-transport-pact-enabling-delhi-to-expand-footprints/articleshow/72914361.cms
https://www.hindustantimes.com/india-news/india-oman-to-sign-agreement-on-maritime-transport/story-F1t6smyCgZRgrcrYMKWcwJ.html
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-to-open-new-ports-to-connect-irans-chabahar/articleshow/72910555.cms
https://www.business-standard.com/article/pti-stories/india-afghanistan-and-iran-meet-for-second-time-to-monitor-implementation-of-chabahar-agreement-119122001536_1.html
http://www.newsonair.com/News?title=India%2C-Afghanistan-%26-Iran-meet-for-second-time-to-monitor-implementation-of-Chabahar-agreement&id=376423
https://www.quora.com/Was-India-once-offered-the-Gwadar-Port-by-the-Sultan-of-Oman
http://www.sunday-guardian.com/news/manmohan-did-not-correct-map-error-to-protect-nehru-name
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https://www.quora.com/Was-India-once-offered-the-Gwadar-Port-by-the-Sultan-of-Oman
http://www.sunday-guardian.com/news/manmohan-did-not-correct-map-error-to-protect-nehru-name
आपको सायद पता हो, खाड़ी के देशो में भारत के हमेशा से सबसे अच्छे और मजबूत सम्बन्ध ओमान के साथ रहे हैं.
रक्षा छेत्र में भी इन दोनों देशो के बीच आपसी सम्बन्ध पुराना है. दोनों देशो के बीच पहली मेरीटाइम एक्सरसाइज का आयोजन वर्ष 1993 में किया गया था.
एंटी पायरेसी ऑपरेशन्स के दौरान जरूरत पड़ने पर इंडियन नेवी ओमान के बंदरगाहों पर रुक सकती है. वर्ष 2018 में ही इंडियन नेवी और इंडियन एयर फाॅर्स को भी ओमान के दुक़्म पोर्ट पर उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अधिकार मिल गया था.
आपको पता है, चीन को पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट तक पहुंच दे दी है, इसलिए ग्वादर पोर्ट के सामने सिक्योरिटी चेकमेट के तौर पर भारत को दुक़्म पोर्ट तक पहुंच मिल गयी थी, जिससे भारत उस छेत्र में चीन की गतिबिधियों पर ना सिर्फ नजर रख सके, बल्कि समय पड़ने पर उन्हें रोक भी सके.
अभी तक भारत ओमान के बंदरगाहों पर उपलब्ध सुविधाओं का ही इस्तेमाल कर सकता था. लेकिन अब भारत ओमान के साथ मेरीटाइम कोऑपरेशन एग्रीमेंट भी करने जा रहा है.
भारतीय विदेश मंत्री 24 दिसंबर को ओमान की यात्रा पर जाने वाले हैं, जिस दौरान इस एग्रीमेंट को फाइनल कर लिया जायेगा.
इस एग्रीमेंट के बाद ओमान की मदद से पर्शियन गल्फ, गल्फ ऑफ़ ओमान, अरेबियन सी और ईस्ट अफ्रीका के छेत्र में भारतीय शक्ति में कई गुना इजाफा हो जायेगा. इस एग्रीमेंट से रक्षा और व्यापर दोनों ही छेत्रो में लाभ मिलेगा.
खाड़ी के देश हमारे दूर के पड़ौसी हैं, और भारत वहां पर अपना मेलजोल बढ़ाने की लगातार कोसिस कर रहा है.
इसी दिशा में और आगे जाते हुए, अब भारत ओमान के साथ मेरीटाइम ट्रांसपोर्ट कोऑपरेशन एग्रीमेंट भी करने जा रहा है.
आपको पता है, संगठन में शक्ति होती है, और भारत ने हाल के ही कुछ वर्षो में अपने सभी मित्र देशों के साथ कितने ही लोजिस्टिक्स मेरीटाइम एग्रीमेंट किये है. इन समझौतों के आधार में आईडिया सिर्फ यही होता है, की एक और एक ग्यारह होते हैं.
लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे देश में ना तो इन अग्रीमेंट पर ध्यान दिया जाता है, और ना ही इनके पीछे जो डिप्लोमेटिक मेहनत लगी होती है, उसकी प्रशंसा की जाती है.
हमारे यहाँ हर वक़्त सर्कार को कोसना ही जैसे फैशन बन गया है, जबकि एक्चुअली में वह भविस्य में आने वाली कई समस्याओं की सम्भावना को आज ही ख़तम करने में लगी हुई हैं.
आगे बढ़ते हुए, हाल ही के कुछ समय में आपने ईरान को कहते सुना होगा, की भारत ने अमेरिका के आगे सरेंडर कर दिया है, इसलिए चाबहार पोर्ट पर काम तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है.
चाबहार पोर्ट को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से आज तक छूट मिली हुई है, इसके लिए तो ईरान ने आज तक भारत को थैंक यू नहीं बोला. लेकिन चूँकि भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद जो कर दिया, हर बार मौका लगते ही, ईरान भारत को उल्टा सीधा सुनाने लगता है.
लेकिन अच्छी बात यह है, की जब कमरे की चार दीवारों के बीच भारत ईरान और अफ़ग़ानिस्तान बैठते हैं, तो आज भी इस बात का स्वागत करते हैं, की दिसंबर 2018 में भारत ने जैसे ही चाबहार पोर्ट का ऑपरेशन अपने हाथ में लिया, वहां पर लगातार प्रगति हो रही है.
भारत ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर वर्ष 2016 में जो एग्रीमेंट हुआ था, उसी के इम्प्लीमेंटेशन की प्रगति को मॉनिटर करने के लिए तीनो देशो के अधिकारी पिछले सप्ताह नई दिल्ली में मिले थे, जिसमे स्वीकार किया गया, की अभी तक चाबहार पोर्ट ने 5 लाख टन का कार्गो हैंडल किया है.
साथ ही चाहबर पोर्ट का इस्तेमाल और बढ़ाने के लिए भारत के मोरमुगोआ और New Mangalore पोर्ट को भी चाबहार पोर्ट से जोड़ने का निर्णय लिया गया. अब इन दो पोर्ट्स को मिलाकर भारत के पांच बंदरगाह चाबहार पोर्ट से जुड़ गए है.
इसलिए भविस्य में अच्छा होगा, की भारत को उंगली दिखाने के बजाये ईरान भारत के साथ कंधे से कन्धा मिलाये, ताकि चाबहार पोर्ट का विकास तेजी से किया जा सके.
भारत और ईरान के बीच आपसी संबधो में आई सिलवटों को सीधा करने के लिए भारत के विदेश मंत्री जी 22 और 23 दिसंबर को ईरान भी जायेंगे, और फिर वहां से वे ओमान के लिए रवाना होंगे.
आइये देखते हैं, ईरान और ओमान की यात्रा के दौरान भारत के इन दोनों देशो के साथ आपसी सम्बन्ध कैसे और कितने आगे बढ़ते हैं.
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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