भारतीय विदेश मंत्री ने किस अमेरिकी साजिस को किया नाकाम??


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जैसा की हम सभी को पता है, जब भारतीय विदेश मंत्री अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तब उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल से मिलने से मना कर दिया था, क्योकि उस मीटिंग में भारतीय मूल की महिला प्रमिला जयपाल शामिल थी.



वैसे तो Pramila जयपाल अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य हैं, लेकिन उन्हें वामपंथी विचारों के लिए जाना जाता है.


अक्टूबर महीने में कश्मीर के ऊपर जब अमेरिकी संसद में सुनवाई हुई थी, तब उन्होंने मोदी सर्कार और आरएसएस की आलोचना करि थी.



फिर क्या था, यहाँ मीटिंग कैंसिल हुई, उधर अमेरिका में बबाल मच गया.



मीटिंग के कैंसिल होने पर प्रमिला जयपाल के पेट में दर्द होना तो लाजमी था ही, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की रेस में दौड़ रहे अन्य कैंडिडेट के पेट में भी चूहे दौड़ना चालू हो गए.



जब भी कभी  अमेरिका के रेडिकल लेफ्ट को अमेरिका और भारत की राष्ट्रवादी सर्कार की आलोचना करने का मौका मिले तो  वह उसे कैसे गवा सकते हैं.



लेकिन अब जैसा की डिटेल्स सामने आ रही हैं, वह हम सभी की आँखें खोलनी वाली है.



सायद आपको पता हो, अमेरिकी संसद के निचले सदन यानि की हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है, और अमेरिकी संसद के उच्च सदन यानि की सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है.



जब भारत के विदेश मंत्री अमेरिका जाने वाले थे, तो भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाउस और सीनेट की फॉरेन अफेयर्स कमेटी यानि की विदेश मामलो की कमेटी से मिलने के लिए समय माँगा.



तय कार्यकर्म के मुताबिक रिपब्लिकन बहुमत वाले सीनेट से आने वाली फॉरेन अफेयर्स कमेटी के प्रतिनिधि मंडल के साथ मुलाक़ात हो गयी.



लेकिन इसी बीच भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारीयों को पता लगा, की डेमोक्रेट बहुमत वाले हाउस से आने वाले प्रतिनिधि मंडल में फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सदस्यों के अलावा तीन ऐसे सदस्यों के नाम जोड़ दिए गए, जो हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सदस्य थे ही नहीं.



तो भारतीय अधिकारियो का पूछना लाजमी था, की भाई ये मीटिंग में भीड़ क्यों बड़ा रहे हो?



यहाँ पर ध्यान रखना जरूरी है, इन तीन सदस्यों में ही प्रमिला जयपाल भी शामिल थी. लेकिन ये तीनो के तीन मेंबर कश्मीर, मानव अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रताको लेकर भारत को लगातार टारगेट कर रहे थे.



इसलिए इनके नाम देखकर भारतीय अधिकारीयों के कान खड़े हो गए.



लेकिन और चौकाने वाली बात यह है, की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चैयरमेन जिनको भारतीय विदेश मंत्री से मिलना था, उन्हें तक पता नहीं था, की ये तीन नाम कैसे प्रतिनिधि मंडल में शामिल हो गए.



अब आप देखिये, ये लेफ्ट के लोग कितने ईमानदार होते हैं, बाते बड़ी बड़ी, और काम इतने छोटे छोटे.



स्वाभाविक है, पिछले दरवाजे से जब नाम ऐड किये गए, तो जवाब में अमेरिकी अधिकारी सन्तुस्टि देने वाला कारण नहीं बता पाए.



इसी बीच भारतीय विदेश मंत्री राष्ट्रपति ट्रम्प से मिल रहे थे. वैसे तो राष्ट्रपति ट्रम्प पर महाभियोग चल रहा है, लेकिन उनकी खुसी आजकल सातवे आसमान पर है, क्योकि अब अगले चुनाव में खेलने के लिए उन्हें विक्टिम कार्ड डेमोक्रेट्स ने जो दे दिया है.



एनीवे बात यह है, की ट्रम्प साहब का मूड था अच्छा, तो भारतीय मंत्रियों के साथ मीटिंग लम्बी खींच गयी.



इस प्रकार  वैसे भी भारतीय विदेश मंत्री के पास हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी से मिलने के लिए ज्यादा समय नहीं था, और ऊपर से डेमोक्रैट पार्टी की तरफ से ऐसे लोगों को मीटिंग में घुसाया जा रहा था, जिनका हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी से कुछ लेना देना था ही नहीं.



इसलिए दाल में कुछ काला देखकर मीटिंग ही कैंसिल कर दी. आईडिया यही था, की ना रहेगा बांस, न बजेगी बासुरी.



लेकिन प्रमिला जयपाल को तो तमासा खड़ा करना था, मीटिंग के दौरान यदि तमासा ना मचाया जा सके, तो चलो कोई बात नहीं, मीटिंग के कैंसिल होने पर ही कोहराम मचा लो.



भारतीय मूल के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति Bharat बरई ने तो यहाँ तक आरोप लगाया, की प्रमिला जयपाल की साजिस थी, की किसी तरह भारीतय विदेश मंत्री के साथ तीखी नोक झोंक हो जाये, और फिर बहार आकर तिल का ताड़ बनाकर अमेरिका भारत और पाकिस्तान में एक साथ नाम कमाया जाये.



लेकिन बड़ा सवाल यहाँ पर यह है, की मानव अधिकारों के इन रक्षको का वास्तविक उद्देश्य क्या हर मौके पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकना होता है.



जबकि भारतीय विदेश मंत्री जी ने भी बाद में साफ़ कर दिया था, की वह उन लोगों से मिलना पसंद करते हैं, जो ओपन mind से मिलने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन जो लोग पहले ही अपना मन बना चुके हैं, उनसे मिलने में भारतीय विदेश मंत्री को कोई रूचि नहीं है.



पिछली बार जब हमने इस टॉपिक पर वीडियो बनाया था, तो हमें मूर्खतापूर्ण डंग से ऐसा लगता था, की भारतीय विदेश मंत्री ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी से मिलकर भारत का पक्ष समझाने की कोसिस करनी चाहिए थी, तो सायद बेहतर होता.



लेकिन अब जैसा की जानकारी सामने आयी है, हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं. भारतीय विदेश मंत्री ने इस मुलाक़ात को कैंसिल करके बहुत सही काम किया, ना सिर्फ ऐसा करके उन्होंने अपना समय बचाया, बल्कि उन्होंने भारत विरोधी तत्वों की एक बड़ी साजिस को नाकाम भी कर दिया.



मुँह में राम और बगल में छुरी रखने वाली प्रमिला जयपाल और उनके दो अन्य डेमोक्रेट साथियों से जितना दूर रहा जाये, उतना ही अच्छा है.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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