मोदी सरकार ने नेपाल से कालापानी पर बातचीत से किया इंकार ??
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Reference
https://theprint.in/diplomacy/india-refuses-to-meet-nepal-pms-special-envoy-to-discuss-kalapani-row/331569/
https://theprint.in/theprint-essential/why-kalapani-is-a-bone-of-contention-between-india-and-nepal/317926/
https://thewire.in/south-asia/nepal-proposes-talks-on-kalapani-awaits-indias-response
https://thewire.in/external-affairs/nepal-india
https://english.khabarhub.com/2019/11/54296/
https://timesofindia.indiatimes.com/india/india-china-border-talks-likely-on-december-21/articleshow/72421277.cms
आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
https://theprint.in/diplomacy/india-refuses-to-meet-nepal-pms-special-envoy-to-discuss-kalapani-row/331569/
https://theprint.in/theprint-essential/why-kalapani-is-a-bone-of-contention-between-india-and-nepal/317926/
https://thewire.in/south-asia/nepal-proposes-talks-on-kalapani-awaits-indias-response
https://thewire.in/external-affairs/nepal-india
https://english.khabarhub.com/2019/11/54296/
https://timesofindia.indiatimes.com/india/india-china-border-talks-likely-on-december-21/articleshow/72421277.cms
आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.
जिसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी साफ़ कर दिया था, की भारतीय सीमा का नया मानचित्र बिलकुल सही ढंग से दर्शाता है. फिर भी किसी भी तरह के सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारत मित्र देशो के साथ बातचीत के लिए तैयार है.
आपको ध्यान होगा, वर्ष 2014 में कालापानी और सुस्ता एरियाज को लेकर सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशो ने विदेश मंत्री के स्तर पर बातचीत के लिए एक व्यवस्था का विकास किया था.
The वायर अख़बार में नेपाली पत्रकार के आर्टिकल के अनुसार, अब नेपाल इस विदेश मंत्री के स्तर पर बातचीत को चालू करवाना चाहता है.
बड़ी स्वाभाविक बात है, नेपाल के सम्मानीय पत्रकार नेपाल की बात ही भारत के अख़बार में रखेंगे.
इसी बीच The प्रिंट में एक नया आर्टिकल पब्लिश हो गया, जिसमे यह कहा गया, की दोनों देशो के बीच विदेश मंत्री के स्तर पर सीमा विवाद को सुलझाने के लिए नेपाल के प्रधान मंत्री ओली जी के विशष प्रतिनिधि के रूप में नेपाल के पूर्व प्रधान मंर्ती माधव कुमार नेपाल 4 और 5 दिसंबर को प्रधान मंत्री मोदी जी से मिलने के लिए भारत आने वाले थे.
लेकिन मोदी सर्कार ने नेपाल के प्रधान मंत्री के विशेष प्रतिनिधि से मिलने से भी इंकार कर दिया. और फिर नेपाल ने अपने विशेष प्रतिनिधि की भारत यात्रा रद्द कर दी.
सबसे पहले तो सवाल खड़ा होता है, की the प्रिंट को यह खबर कहाँ से मिली, क्या इस खबर को भारतीय विदेश मंत्रालय ने उसे दिया है, अथवा नेपाल के सूत्रों ने यह खबर उसे दी है?
क्या आपको यह नहीं लगता है, की बिना सोर्स की जानकारी के दोनों देशों के बीच आग भड़काने के लिए यह खबर छाप दी गयी?
क्या इन खबरों का मकसद यह नहीं दिखाई पड़ता है, की यह दिखाया जाये, की नेपाल तो सीमा विवाद सुलझाना चाहता है. लेकिन भारत गैर जिम्मेदार व्यवहार दर्शा रहा है?
इसलिए यदि भारत सरकार ने नेपाल के प्रतिनिधि के साथ मोदी साहेब की मुलाक़ात के लिए परमिशन नहीं दी है, तो इसके लिए इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री से कन्फर्मेशन का इंतजार करना ही बेहतर होगा.
चलिए अगर मान भी लेते हैं, की the वायर और the प्रिंट की खबर सही है. तो सवाल उठता है, की विदेश मंत्रियो के स्तर पर मुलाक़ात को चालू करवाने के लिए नेपाल के विशेष प्रतिनिधि का मोदी जी से मिलना क्या जरूरी था?
ऐसा करके, नेपाल सीमा विवाद को सुलझाना चाहता था, अथवा अपनी जनता को सिर्फ दिखाना चाहता था, की सीमा विवाद को सुलझाने के लिए नेपाल सरकार कोसिस कर रही है.
यहाँ पर हम साफ़ करना चाहते है, की हम नेपाल के साथ सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाए जाने के पक्ष में हैं. जब भारत बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद सुलझा सकता है, तो नेपाल के साथ ऐसा जरूर किया जा सकता है.
लेकिन सवाल यह है, की भारत के खिलाफ आग उगलने के लिए नेपाल को उकसा कौन रहा है. क्या चीन और पाकिस्तान की तरफ से नेपाल भारत से लड़ तो नहीं रहा है?
कालापानी भारत से लेकर कल चीन को गिफ्ट के रूप में देने के लिए, क्या नेपाल आज भारत से लड़ रहा है?
नेपाल को कालापानी वापस चाहिए, लेकिन नेपाल के ही अख़बार के मुताबिक चीन ने नेपाल का कम से कम 36 हेक्टेयर लैंड दवा लिया है. क्या नेपाल को वह वापस नहीं चाहिए?
आप सभी का साफ तौर पर मानना रहा है, की भारत को नेपाल पाकिस्तान श्री लंका पर फोकस ना करके, भारत की हर समस्या की जड़ चीन पर वार करना चाहिए.
इसी बीच भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए इंडियन NSA दोवाल साहब से बातचीत करने के लिए चीन के विदेश मंत्री इस महीने के अंत में भारत आ सकते हैं.
हमें कोई उम्मीद तो नहीं है, की भारत चीन बॉउंड्री टॉक से कुछ खास निकलेगा. वैसे भी जब भारत और नेपाल के बीच चीन के द्वारा लगाई आग से आज फिर सीमा विवाद धधक रहा है. तो चीन की तरफ से तो हमें प्यार भरी बातें ही सुनाई देंगी.
भविस्य में कभी दोनों देशो की जनता की भावनाओ और फैक्ट्स को ध्यान में रखते हुए, भारत और नेपाल अपने बीच का सीमा विवाद सुलझाएंगे, इसी उम्मीद के साथ हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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