भारत इसराइल के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में शामिल होगा ??





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Reference 



सायद आपको याद हो, पिछले महीने के अंत में भारत में इसराइल के राजदूत ने कहा था, की भारत और इसराइल ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत में खासी प्रगति करि है.



और उन्होंने विस्वास जताया था, की जल्द ही दोनों देशो के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो जायेगा. जिसके जवाब में आप में से ज्यादातर लोगों का कहना था, की भारत ने इसराइल के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तभी करना  चाहिए, जब वह दोनों देशो के लिए फेयर भी हो.



इस बैकग्राउंड में इसराइल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री के साथ पिछले सप्ताह मुलाक़ात करि, और उन्होंने दोनों मित्र देशो के बीच आपसी व्यापर को बढ़ाने पर जोर दिया, साथ में वाटर, एग्रीकल्चर और टेक्नोलॉजी के छेत्र में आपसी सहयोग की संभानाओं पर चर्चा करि.



लेकिन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर इसराइल के विदेश मंत्री ने ट्रैक्स फॉर रीजनल पीस का नया आईडिया भारतीय विदेश मंत्री के सामने पेश किया.



ट्रैक्स फॉर रीजनल पीस इसराइल का एक बेहद महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट हैं,  जो इसराइल के हाइफा शहर को ओमान की राजधानी मस्कट से जोड़ेगा.



इस प्रकार रेल और रोड का यह रीजनल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट Meditteranean सी को गल्फ से जोड़ेगा.  जिसमे इसराइल लैंड ब्रिज का काम करेगा, और जॉर्डन रीजनल ट्रांसपोर्टेशन hub का काम करेगा.



प्रस्ताबित रूट के अनुसार यह ट्रैक इसराइल, जॉर्डन, सऊदी अरबिया, ओमान से हो कर गुजरेगा. यह प्रोजेक्ट अभी बिलकुल नया है, और इसका आईडिया इसराइल ने ओमान के सामने भी नवंबर महीने में ही पेश किया है.



पिछले साल अक्टूबर में जब इसराइल के वर्तमान विदेश मंत्री ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर थे, तब उन्होंने इस आईडिया का बेसिक रूप ओमान में ट्रांसपोर्ट कांफ्रेंस में पेश किया था.



देखा जाये तो यह आईडिया 100 सालो पुरानी रेलवे लाइन से प्रेरित हैं, जो कभी मिडल ईस्ट को जोड़ा करती थी.





जैसा की आपको मैप पर देखने से अंदाज़ा लग जायेगा, की यह रास्ता स्वेज नहर से गुजरने वाले अभी के रास्ते से छोटा होगा, लेकिन जिन देशो से होकर यह ट्रैक गुजरेगा, वह इस प्रोजेक्ट में शामिल होंगे या नहीं यह तो आगे आना वाला  वक्त ही बताएगा. 



अगर हम इसराइल की ऑफिसियल पोजीशन की बात करें, तो वह अपेक्षा रखते हैं, की यह नेटवर्क इस पुरे इलाके में शांति की स्थापना करेगा, और स्थयित्वा को बढ़ाते हुए, इस इलाके के देशो के बीच  आर्थिक सम्बन्धो को मजबूत करेगा. 



इस पुरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के पीछे इसराइल की कैलकुलेशन यह है, की उसका खाड़ी के देशों के साथ कोई बड़ा विवाद नहीं है, बल्कि  इसराइल और खाड़ी के देश अपनी सिक्योरिटी को ईरान से common खतरे को साझा करते हैं.



लेकिन आज की सच्चाई यह है, की गल्फ countries के इसराइल के साथ diplomatic relationship भी नहीं है, यह देखना रोचक होगा, की वह इसराइल के द्वारा पेश किये गए इस इंफ्रास्ट्रक्चर initiatve के प्रति कैसा रवैया अपनाते हैं.



इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करने से बड़ा सवाल होगा, क्या खाड़ी के देश इसराइल की लीडरशिप वाले प्रोजेक्ट में शामिल होने को तैयार होंगे.



क्या ईरान से दुस्मनी सऊदी अरब, ओमान, UAE को इसराइल के साथ ट्रैक ऑफ़ रीजनल पीस का निर्माण करने के लिए प्रेरित करेगी?



जहाँ तक भारत का सवाल है, हमारे सामने भी यही सवाल है, क्या हम इसराइल के द्वारा प्रस्तावित रीजनल ट्रैक्स ऑफ़ पीस में शामिल होंगे?



अभी इसराइल के साथ हमारा ट्रेड स्वेज नहर से होकर होता है, क्या हम इस ट्रैक के लैंड रूट से इसराइल के साथ कनेक्टिविटी स्थापित करेंगे?



अगर इजराइल, जॉर्डन, सऊदी अरब, UAE और ओमान इस प्रोजेक्ट में शामिल हो जाते हैं, तो हमें नहीं लगता है, की भारत को इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का व्यापारिक लाभ उठाने से परहेज करना चाहिए.



यहाँ तक की इसराइल के आईडिया के अनुसार फिलिस्तीन के लोग भी इस प्रोजेक्ट का लाभ उठा पाएंगे, यह सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन यह जमीं पर काम करेगा, इसकी सम्भावना अभी तो  बहुत कम जान पड़ती है.



आइये देखते हैं, इसराइल के विदेश मंत्री अपने इस नए आईडिया को कितना आगे ले जा पाते हैं.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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