खिसयाए टर्की के राष्ट्रपति ने बताया,पाक ने टर्की को धोखा क्यों दिया??
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जिसमे भाग लेने के लिए इनविटेशन तो Organisation of Islamic कोऑपरेशन के सभी 57 सदस्यों को भेजा गया था, जिसके जवाब में मात्र 20 देशो ने ही इस समिट में भाग लिया.
सितम्बर महीने में UN जनरल असेम्ब्ली में कश्मीर के ऊपर पाकिस्तान का खुला साथ टर्की और मलेशिया ने दिया था, और फिर इन तीनो देशो के नेता जब एक कमरे में बैठे, तो Kuala Lumpur समिट के आयोजन के आईडिया ने आकार लेना चालू कर दिया.
लेकिन जिस बात का जिक्र ना तो टर्की मलेशिया और पाकिस्तान ने किया, वही बात सऊदी अरब को नागवार गुजरी.
यहाँ तक के जिस सऊदी अरब के हवाई जहाज में बैठकर पाकिस्तान के प्रधान मंत्री अमेरिका पहुंचे थे, उसी सऊदी रॉयल प्लेन में इमरान खान नियाज़ी को लौटने नहीं दिया गया, परिणाम यह हुआ, उन्हें कमर्शियल एयरलाइन में बैठकर पाकिस्तान लौटना पड़ा.
लेकिन पाकिस्तान को तब भी समझ नहीं आया, की टर्की मलेशिया और पाकिस्तान के द्वारा बनाये जा रहे पैरेलल पावर सेण्टर की बात सऊदी अरब कभी पचा नहीं पायेगा. क्योकि यह आर्गेनाइजेशन सऊदी अरब के नेतृत्व वाले OIC के अस्तित्व और महत्वा को ही सीधी चुनौती देता है.
अब आप देखिये, इस्लाम के प्रति दुनिया भर में फैले हुए डर यानी की इस्लामफोबिआ को ख़तम करने के लिए ये तीन देश नया संगठन बनाने निकले थे, लेकिन एक्चुअली इस नए आर्गेनाइजेशन के आईडिया ने इस्लामिक देशों में एक दूसरे के प्रति डर और संदेह बेतहासा बड़ा दिया.
आगे बढ़ते हुए, पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से Kuala Lumpur समिट में भाग लेने का इनविटेशन स्वीकार कर लिया, और मलेशिया में जोर शोर से तैयारियां चालू हो गयी.
लेकिन तभी सऊदी अरब ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यात्रा पर बुलाया, और उसके बाद पाकिस्तान को अचानक से समझ आ गया , की Kuala Lumpur समिट के कारण मुस्लिम brotherhood यानि उम्माह में दरार पड़ जाएगी . और उसने Kuala Lumpur समिट से पीछे हटने का निर्णय लिया.
तब हमारे सामने सवाल था, की आखिर कैसे सऊदी अरब ने पाकिस्तान को घुटनो पर ला दिया, जिससे उसने उन टर्की और मलेशिया जैसे देशो से मना कर दिया, जो की पाकिस्तान को डूबने से बचाने के लिए हमेशा तिनके का सहारा बनने के लिए तैयार रहते हैं?
इसका जवाब दिया, Kuala Lumpur समिट में भाग लेने गए टर्की के राष्ट्रपति ने.
टर्की के राष्ट्रपति की बात समझने के लिए हमें याद करना होगा, की पिछले साल जब पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में डॉलर का सूखा पड़ा हुआ था, और पाकिस्तान के पास कच्चा तेल खरीदने तक के पैसे नहीं थे, और IMF से 22 वे बेलआउट के लिए मोलभाव चल रहा था.
तब सऊदी अरब और UAE ने एक ही झटके में पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक में ३ - ३ बिलियन डॉलर जमा कराये थे. इस प्रकार पाकिस्तान सेंट्रल बैंक सऊदी अरब और UAE से मिले 6 बिलियन के दम पर दिवालियेपन से बच पाया था.
इसलिए टर्की के राष्ट्रपति के अनुसार, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को धमकी दी, की यदि इमरान खान नियाज़ी Kuala Lumpur समिट में भाग लेने के लिए गए, तो सऊदी अरब अपने 3 बिलियन डॉलर पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक से विथड्रॉ कर लेगा.
आपको पता है, यदि सऊदी अरब ऐसा करेगा, तो UAE भी अपने 3 बिलियन डॉलर निकालने में देरी तो लगाएगा नहीं.
सऊदी अरब और UAE के छह बिलियन डॉलर का पाकिस्तान के लिए कितना महत्वा है, यह आपको इसी से समझ आ जायेगा, की पाकिस्तान को उसके 22 वे बेलआउट के लिए IMF ने 6 बिलियन डॉलर दिए हुए है.
इसलिए यदि सऊदी अरब और UAE ने पाकिस्तान से अपना गरमा गरम रोकड़ा विथड्रा कर लिया, तो IMF के ICU में भर्ती पाकिस्तान दम तोड़ सकता था.
लेकिन सऊदी अरब पाकिस्तान का हाथ मरोड़ना यही रोक देता तो ठीक होता, टर्की के राष्ट्रपति के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस ने पाकिस्तान को याद दिलाया, की 40 लाख पाकिस्तानी सऊदी अरब में काम करते हैं.
इसलिए यदि इमरान खान Kuala Lumpur समिट में भाग लेने मलेशिया गए, तो इन 40 लाख पाकिस्तानियों को सऊदी अरब से निकाल दिया जायेगा, और उनके बदले में बांग्लादेश के नागरिको को काम पर रख लिया जायेगा.
आपको समझ आ गया होगा, 6 बिलियन डॉलर सऊदी अरब और UAE जब निकालते तब निकालते , लेकिन यदि सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस यह कदम उठा लेते, तो हमेसा आसमान में उड़ने वाले पाकिस्तान को दिन में तारे दिख जाते.
अब टर्की के राष्ट्रपति Kuala Lumpur समिट में सच कह रहे थे, यह या तो पाकिस्तान को पता है, या उन्हें.
लेकिन पाकिस्तान में टर्की के राष्ट्रपति के इन विचारों को लेकर अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है, देखते हैं, क्या पाकिस्तान में इतनी हिम्मत है, की वह टर्की के राष्ट्रपति के जले पर नमक मिर्ची छिड़कते हुए अब यह कहेगा, की वह Kuala Lumpur समिट में पाकिस्तान और सऊदी अरब को लेकर झूठ बोल रहे थे.
आगे बढ़ते हुए,टर्की के राष्ट्रपति ने यह भी साफ कर दिया, की भले ही पाकिस्तान Kuala Lumpur समिट से पीछे हट गया हो, भविस्य में भी टर्की मलेशिया क़तर और ईरान एक दूसरे की मदद करते रहेंगे.
बात साफ़ है, OIC के सामने एक और आर्गेनाइजेशन को खड़ा करने की कोसिस अभी और चलती रहेगी.
पाकिस्तान ने जिस प्रकार टर्की और मलेशिया के सपनो की हवा निकाली है, यह देखना अब रोचक होगा , की हमेसा की तरह क्या ये दोनों देश पाकिस्तान को FATF की ब्लैकलिस्ट में जाने से अगले साल फरबरी में बचाते हैं.
इस पुरे घटना क्रम से एक बात सिद्ध हो जाती है, दुनिया में सब खेल पावर और पैसे का होता है. लेकिन इस खेल में पाकिस्तान और टर्की मलेशिया की चट्टानी दोस्ती के टुकड़े टुकड़े जरूर हो गए हैं.
और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद
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