अमेरिकी हाउस ने पास किया उइघुर बिल, क्यों तिलमिला उठा चीन?
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Reference
हम सभी को जानकारी है, चीन अपने शिनजियांग प्रान्त में किस प्रकार मानव अधिकारों का दमन करता आया है. लेकिन अब अमेरिका की दोनों पार्टियों ने चीन को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया है.
तभी तो होन्ग कोंग डेमोक्रेसी एक्ट जैसे ही कानून बना, उइघुर बिल पर बात आगे बड़ा दी गयी.
अब यह बिल अमेरिकी कांग्रेस के सीनियर सदन सीनेट में चला गया है, जहाँ पर अगले दो सप्ताहों में इसे पास किये जाने की उम्मीद जताई जा रही है.
अगर सीनेट ने इसे अपेक्षा के अनुसार सर्व सम्मति से पारित कर दिया, तो प्रेसिडेंट ट्रम्प को इस पर साइन करने ही पड़ेंगे.
चलिए जल्दी से चर्चा करते हैं, की हाउस ऑफ़ रिप्रेजेन्टेटिव के द्वारा पारित बिल में ऐसा क्या है, की चीन गुस्से से तिल मिला गया.
इस बिल के अनुसार अमेरिका को उन सभी टेक्नोलॉजी और कंपोनेंट्स का निर्यात चीन को रोकना होगा, जिसका प्रयोग लोगों पर निगरानी करने के लिए किया जाता है.
अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिकी टेक्नोलॉजी के ऊपर बना चीन का घरेलु सिक्योरिटी सिस्टम बैठ जायेगा, आपको जानकर हैरानी होगी, की चीन अपने ही लोगों पर निगरानी रखने के लिए सालाना 176 बिलियन डॉलर खर्च करता है.
इसलिए इस बिल से ना केवल चीन के नेताओं के बिज़नेस पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका चीन की सबसे शक्तिशाली संस्था पोलित ब्यूरो के सदस्यों पर भी प्रतिबन्ध लगा सकेगा.
यह बिल चीन के आतंरिक मामले में दखल तो दे ही रहा है. साथ में इस बिल की मार वहां पड़ रही है, जहाँ दर्द सबसे ज्यादा होता है.
लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है, की इस बिल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति इस बिल के द्वारा चीन के ऊपर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों में ढिलाई भी दे सकते हैं.
चलो एक बात तो सिद्ध हो गयी, की अमेरिका की संसद के लिए मानव अधिकारों से जयादा importance राष्ट्रीय हितों की है. उम्मीद है, हमारे देश के विपक्षी नेता इस उदहारण से कुछ सीखेंगे.
अभी जबकि यह बिल अमेरिकी संसद में ही बिचारधीन है, इसलिए इसमें अभी चेंज हो सकता है, हम इस बिल पर नजर बनाये रखेंगे.
इसी बीच हमारे एक व्यूअर उमेश वाघमारे जी ने एक इम्पोर्टेन्ट न्यूज़ हमारे साथ साझा करि, जिसे भी इस वीडियो में हम कवर कर रहे हैं.
आप सभी को याद होगा, की चीन के दावे के ही अनुसार वह कम से कम 4 हज़ार बिलियन डॉलर का इस्तेमाल करके दुनिया भर के देशो में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के अंतर्गत कर रहा है.
चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर अकेले में चीन ने 62 बिलियन डॉलर लगाए है.
जो चीन पूरी दुनिया में ब्लेंक चेक बाँट रहा है, उसी चीन को वर्ल्ड बैंक अगले पांच सालों के लिए कम ब्याज दर पर कम से कम १ बिलियन डॉलर सालाना Loan उपलब्ध कराएगा.
वर्ल्ड बैंक के अनुसार उसका यह सॉफ्ट लोन चीन में प्राइवेट सेक्टर को आगे बढ़ाने में, आर्थिक सुधार करने में, और प्रदुषण को कम करने जैसे कामो में उपयोग किया जायेगा.
अब आप ही बताएं, यह कहाँ का न्याय है?? क्या वर्ल्ड बैंक को इस दुनिया में गरीबी और भुखमरी और कहीं दिखाई नहीं देती है??
वर्ल्ड बैंक के किसी भी डिसिशन को लेकर अमेरिका के पास वीटो पावर होता है, और अमेरिका ने इस बार कोसिस भी करि थी, की यदि वर्ल्ड बैंक ने चीन को पैसा देना ही है, तो बहुत ही कम मात्रा में देना चाहिए.
लेकिन अमेरिकी विरोध के बाबजूद, वर्ल्ड बैंक ने चीन के लिए अगले पांच सालों के लिए सस्ते व्याज बाले कर्ज को अप्रूवल दे दिया.
अमेरिका की तरफ से इसका कारण यह बताया जा रहा है, की क्युकी इस निर्णय के लिए वोटिंग नहीं होनी थी, इसलिए वह अपने वीटो का इस्तेमाल नहीं कर पाया.
दोस्तों, यह बात तो हज़म नहीं होती है. अमेरिकी डॉलर में काम करने वाला वर्ल्ड बैंक अमेरिका को नाराज करके चीन को १ डॉलर भी नहीं दे सकता है.
इसलिए सवाल उठता है, की अमेरिका चीन का केवल दिखावटी विरोध कर रहा है, अथवा वह रियलिटी में चीन को आसान फंडिंग रोकना चाहता था.
वैसे भी हम सभी ने देखा है, अमेरिका ने पाकिस्तान को 22 वे बेलआउट का कितना विरोध किया था, लेकिन पाकिस्तान को बेलआउट हांसिल हो ही गया.
आपको समझ आ गया होगा, चाहे IMF बेलआउट हो अथवा वर्ल्ड बैंक का लोन हो, अमेरिका उसका प्रयोग अपने हितों को साधने के लिए मोल भाव में करता है.
अमेरिका आज भी अफ़ग़ानिस्तान बेलआउट के लिए तड़प रहा है, देखते हैं, चीन को वर्ल्ड बैंक से लोन दिलवाकर अमेरिका को क्या हांसिल होता है.
इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.
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