अमेरिका भारत को NATO+5 ग्रुप में शामिल करेगा??


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Reference 


हमारे दर्शक अनुरंजन कुमार मेहता ने इस टॉपिक पर वीडियो बनाने के लिए suggest किया, इसलिए हम यह वीडियो पब्लिश कर रहे हैं. जैसा की आपको पता होगा, की सबसे पहले अमेरिका चाहता था, की पाकिस्तान की तरह भारत मेजर नॉन नेटो ally की केटेगरी में शामिल हो जाये. लेकिन उस प्रस्ताव को भारत ने रिजेक्ट कर दिया. फिर जाके अमेरिका ने भारत के लिए स्पेशल केटेगरी का निर्माण किया, जिसके अंतर्गत भारत को वर्ष 2016 में मेजर डिफेंस पार्टनर का दर्जा दिया गया. जैसे जैसे भारत अमेरिका के करीब आ रहा था, वैसे वैसे भारत से डॉलर का फ्लो अमेरिका की तरफ बढ़ता जा रहा था. वर्ष 2008 में जहाँ भारत ने अमेरिका से जीरो डॉलर के हथियार ख़रीदे थे, वही वर्ष 2019 के अंत तक भारत अमेरिका से 18 बिलियन डॉलर के हथियार खरीद चुका है. इसलिए चाहे आप अमेरिका को पसंद करें, या उसे गालियां दें, वर्तमान की सच्चाई हमारे सामने है, इतिहास में भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस ट्रेड इस मुकाम पर पहले कभी नहीं था. जबकि हम अमेरिका से हथियार खरीद रहे हैं, तो क्या अच्छा नहीं होगा, की इस हथियार खरीदने की प्रक्रिया को अमेरिका की तरफ से कम से कम समय में पूरा किया जा सके. अमेरिका सबसे जल्दी हथियार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करता है, नेटो प्लस फाइव कन्ट्रीज को. ये पांच देश हैं ऑस्ट्रेलिया, New जी लैंड, जापान, साउथ कोरिया और इसराइल हैं. इस साल की शुरुआत में अमेरिकन संसद में एक बिल पेश किया गया, जिसमे प्रस्ताव था, की भारत को भी नेटो प्लस फाइव में शामिल कर लिया जाये, जिससे इस केटेगरी को नेटो प्लस सिक्स कहा जायेगा, ताकि अमेरिका सबसे तेज गति से भारत को हथियार बेच सके और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर सके. जहाँ तक हमें समझ आता है, इस नेटो प्लस सिक्स की केटेगरी में शामिल होने के लिए भारत ने अमेरिका को कोई विशेष सुविधा नहीं देनी होगी. और ना ही उसकी कोई अनोखी शर्त माननी होगी. अमेरिकी कानून नाटो प्लस फाइव को डिफेंस इक्विपमेंट बेचने की तुलनात्मक रूप से सबसे ज्यादा खुली छूट देता है, इसलिए अब वह इसी केटेगरी में भारत को शामिल कर, उसे नेटो प्लस सिक्स बनाना चाहता है. नेटो प्लस सिक्स के बिल का क्या हुआ, यह तो हमें नहीं पता. अभी हाल ही में अगले साल के लिए नेशनल डिफेंस authorization एक्ट का मसौदा तैयार हुआ है, जिसे US की संसद ने पास करना वाकी है. तो नेशनल डिफेंस authorization एक्ट में अमेंडमेंट यानि की संसोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसे अमेरिकन ज्यूस कमेटी का समर्थन प्राप्त है. यह देखने वाली बात होगी, की क्या यह संसोधन स्वीकार हो कर National Defense Authorization Act 2020 का हिस्सा बनता है, या नहीं. अमेरिका अपने कानून में क्या बदलाव करता है, यह अमेरिका का आतंरिक मामला है, लेकिन भले ही भारत इस केटेगरी में शामिल हो या ना हो, हम अमेरिका से हथियार तो खरीद ही रहे हैं. और मेक इन इंडिया के लिए हमें अमेरिका से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी चाहिए. इसलिए क्या यह अच्छा नहीं होगा, की अमेरिका अपने कानूनों का पालन करते हुए, जल्दी से जल्दी हथियार हमें बेच सके और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर पाए. आपने अख़बारों में आज पढ़ा होगा, की कारगिल के युद्ध के समय में जब हमें अचानक से जरूरत आन पड़ी, तो हमारे सभी दोस्तों ने हमारी आपत्ति का लाभ उठाकर पुराना माल बेचकर तगड़ा मुनाफा कमाया. इसलिए क्या अच्छा नहीं होगा, की शांति काल में हम ऐसी व्यवस्था कर ले, की आपत्ति के समय हमें हाथ फ़ैलाने की जरूरत ही ना पड़े. और अगर ऐसी मुसीबत आन पड़े, तो हमारे अपने मित्र देशो के साथ ऐसे कानूनी रूप से मजबूत सम्बन्ध हों, ताकि कानूनी अड़चनों का बहाना बनाकर हमारी मजबूरी का फायदा कोई न उठा पाए. वैसे भी नाटो प्लस सिक्स केटेगरी में शामिल होने से भारत और अमेरिका के बीच नेटो का म्यूच्यूअल डिफेंस पैक्ट तो होगा नहीं, जिसके कारन किसी भी एक देश पर हमला सभी देशो पर हमला माना जाता है. इसलिए कम से कम अभी तो हमें इस केटेगरी में शामिल होने से भारत को नुकसान होता हुआ दिखाई नहीं पड़ता है. आपके अनुसार क्या भारत को इस केटेगरी में शामिल होना चाहिए, कृपया कमेंट सेक्शन में लिख कर बताएं. और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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