NRC की बहाने NPR के विरोध हुआ चालू,मोदी सरकार को क्या करना चाहिए?


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आप सभी दर्शको को हमारा नमस्कार, चलिए आज के रोचक रियल क्विक एनालिसिस की चर्चा करते हैं.

कल से भारत सर्कार ने नेशनल पापुलेशन रजिस्टर के लिए ४ हज़ार करोड़ के बजट को अप्रूवल दे दिया है.

भारत सर्कार ने इस निर्णय के साथ ही यह क्लियर करने की कोसिस करि, की एनपीआर का NRC से कोई सम्बन्ध नहीं है.

लेकिन हमारे यहाँ विवाद छिड़ गया है , की एनपीआर भी हमारे देश में नहीं होना चाहिए, क्योकि एनपीआर NRC की तरफ उठाया पहला कदम है.


और चुकी वर्तमान सर्कार ने ऐसा आधिकारिक रूप से कहा था , इसलिए इस मांग को बल भी मिलता जा रहा है. की चूँकि एनपीआर NRC की दिशा में उठाया गया कदम है, इसलिए इस पहले कदम का ही विरोध किया जाना चाहिए.

आप सभी को पता है, की UPA सर्कार ने ही एनपीआर स्टार्ट करवाया है, और उनका कहना है, की उन्होंने कभी भी NRC और एनपीआर को जोड़ कर नहीं देखा है.

यह तो वर्तमान सर्कार है, जिसने ऐसा अपराध कर दिया है.

लेकिन UPA सर्कार के अस्तित्वा में आने के पहले 10 दिसंबर 2003 में NDA सर्कार ने नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमे लिखा था, की पापुलेशन रजिस्टर में लोगों के वेरिफिकेशन हो जाने के बाद, उनकी जानकारी को लोकल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स में शामिल किया जायेगा.


वैसे भी यह कॉमन सेंस हैं, की देश में रहने वाले लोगों के वेरिफिकेशन के बाद ही, उन लोगों की पहचान की जाएगी, जो देश की नागरिक हैं.

इसलिए जब UPA सर्कार सत्ता में आई, तो क्या उसके पास यह कॉमन सेंस नहीं था, क्या उसने दिसंबर 2003 का नोटिफिकेशन नहीं पड़ा था. की पापुलेशन रजिस्टर में लिखी जानकारी का प्रयोग कभी रजिस्टर ऑफ़ सिटीजनशिप में किया जा सकता है.

और उन्हें यदि पता था, की एनपीआर से NRC का रास्ता खुलता है, तो फिर उन्होंने क्यों NPR की शुरुआत देश में कराई??

और फिर यदि NRC और एनपीआर जुड़े हुए हैं, तो जो लोग आज एनपीआर का विरोध कर रहे हैं, उन्होंने UPA के समय NPR का विरोध क्यों नहीं किया?

वैसे यदि भारत सर्कार को NRC करवाना ही है, तो वह तो पिछले UPA सर्कार के द्वारा इखट्टा किये गए एनपीआर के डाटा के आधार पर भी करा सकती है. तो फिर क्यों UPA सर्कार के द्वारा  इखट्टा किये गए एनपीआर के डेटा के NDA सर्कार के द्वारा अपडेट का विरोध किया जा रहा है?

आपको भी पता है,, यह सब राजनीती है. और NRC के विरोध की ठंडी पड़ती हुई आग में एनपीआर विरोध का पेट्रोल डाला जा रहा है. 

अब जबकि सर्कार ने एनपीआर की दिशा में कदम तो उठा दिया है, और जैसा की हम सभी इस सर्कार को समझते हैं, वह  एनपीआर से पीछे तो हटेगी नहीं.

इसी बैकग्राउंड में महान बुद्दिजीवी अरुंधति रॉय  ने कहा है, की चूँकि एनपीआर NRC के लिए जानकारी supply करेगा, इसलिए एनपीआर के लिए गलत जानकारी दे देनी चाहिए.

अगर लोगों ने इनकी बात मान ली, तो इससे एनपीआर की पूरी एक्सरसाइज पर ही सवालिया निशान लग  जायेगा. जो डेटा अपडेट होगा, वह गलत होगा.

इसलिए क्या अरुंधति रॉय जी यह बताएंगी, की एनपीआर में लगने वाला ४ हज़ार करोड़ पैसा है किसका? क्या उनके इस महान सुझाव से टैक्स पयेर्स का पैसा बर्बाद नहीं होगा?

जैसा की वह गरीबो और माइनॉरिटी के हितों के लिए हमेसा लड़ती आई हैं ,तो वह यह भी बता दें, की जब एनपीआर का डेटा गलत हो जायेगा, तो सर्कार किस डाटा का इस्तेमाल करके  गरीबो और माइनॉरिटी के कल्याण की योजना बनाएगी?

किस डाटा के आधार पर पहले से चली आ रही योजनाओ में सुधार किया जायेगा, ताकि जिसको लाभ मिलना चाहिए था, उसी को जमीं पर लाभ मिले भी.

जाहिर है, जो लोग  गरीबो और माइनॉरिटी के दुःख बेचकर सुखी बने हैं, उन्हें इन सवालों का जवाब ढूडने का समय नहीं मिलेगा.

जहाँ तक वर्तमान सर्कार का सवाल है, उसकी इतनी कोसिस के बाद भी दुष्प्रचार तो चल ही रहा है. इसलिए एनपीआर क्या है, और उसका NRC से क्या सबंध है, इस बारे में डिफेंसिव होने के बजाये.

प्रोऐक्टिवली उसे आगे आकर चीज़ों को जनता के सामने क्लियर करते रहना चाहिए. जनता के डाउट क्लियर हमारी  मीडिया और विपक्षी नेता करेंगे, यह अनुमान लगाना तो सही होगा नहीं.

जहाँ तक विरोध से डरने का सवाल हैं, विरोध तो पोलियो की दो बूंदों का भी किया गया था . इसलिए सर्कार को आगे बढ़ना चाहिए.

और इस वीडियो को देखने के लिए आपका बहुत धन्यवाद

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