Ban on Malaysian Palm Oil - Mahathir Mohamad starts Crying !!


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https://www.reuters.com/article/us-india-malaysia/india-says-no-meeting-with-malaysia-in-davos-as-palm-row-simmers-idUSKBN1ZI0DW
https://www.reuters.com/article/us-malaysia-politics-mahathir-palmoil/malaysias-mahathir-says-no-trade-action-on-india-after-palm-oil-boycott-idUSKBN1ZJ080




जैसा की आप सभी को पता है, मलेशिया के खिलाफ कारवाही करते हुए, पिछले सप्ताह  भारत ने रिफाइंड पाम आयल के आयत को रिस्ट्रिक्टेड बना दिया.







लेकिन फिर भी मलेशिया की अकल ठिकाने पर नहीं आयी, और मलेशिया के प्रधान मंत्री ने कहा, की पैसे के बारे में परेशान ना होकर, अगर कुछ भी गलत होगा, तो वह उसके खिलाफ आवाज़ उठाएंगे.







मलेशिया से बहुत बड़े चीन में कुछ भी गलत हो, तो मलेशिया के प्रधानमंत्री अपने मुँह पर टेप लगा लेते हैं, लेकिन भारत में अगर कुछ सही भी होता है, तो उन्हें उसमे भी गलत दिखाई देने लगता है.







इसलिए मलेशिया पर और दवाब को बढ़ाने के लिए, भारत सरकार मलेशिया से आने वाले माइक्रो प्रोसेसर के लिए नए टेक्निकल स्टैण्डर्ड का इस्तेमाल करने की सोचने लगी और  साथ ही मलेशिया से आने वाले टेलीकॉम  इक्विपमेंट को क्वालिटी की कसौटी पर और कसने की योजना बनायीं जाने लगी.







इसी बीच व्यापर के आंकड़े सामने आने लगे, जिससे साफ हो गया, की मलेशिया के प्रधान मंत्री के उल जुलूल स्टेटमेंट का सीधा लाभ इंडोनेशिया को मिल रहा था.







परिणाम यह हुआ, की कल डावोस में चालू होने वाली world economic forum की मीटिंग में भारत और मलेशिया के बीच के इस विवाद को सुलझाने के लिए मौका तलाशा जाने लगा.







जैसा की मलेशिया के बाजार में पाम आयल की कीमतों के नीचे गिरने की संकेत मिलने लगे, मलेशिया के सरकारी प्रवक्ता ने कहा, की दोनों देशों के ट्रेड मिनिस्टर्स डावोस में मुलाक़ात कर, इस विवाद को सुलझाने की कोसिस कर सकते हैं.







लेकिन भारत की तरफ से साफ़ कर दिया गया, की डावोस में इंडियन कॉमर्स मिनिस्टर को किस किस से मिलना है, उसका कार्यक्रम तय हो चूका है, अब उसमे बदलाव की गुंजाइश नहीं है.







हाँ यदि, बहुपक्षीय मीटिंग में मलेशिया के ट्रेड मिनिस्टर का इंडियन कॉमर्स मिनिस्टर से सामना हो जाये, तो वह बात अलग है.







लेकिन Bilateral सेटिंग में दोनों देशो के बीच कोई मीटिंग नहीं होने वाली.







94 वर्षीय मलेशिया के प्रधानमंत्री के बचकाना सपनो की कीमत अब मलेशिया के किसान और व्यापारी चूका रहे हैं.







सायद इसीलिए अब मलेशिया के प्रधान मंत्री को समझ आ गया है, की मलेशिया एक बहुत छोटा सा देस है.



आप देख लीजिये, भारत की जवाबी कारवाही के बाद ही मलेशिया को समझ आ पाया, की चीन की तरह भारत का साइज बहुत बड़ा है.



मलेशिया के प्रधान मंत्री के ही अनुसार, भारत के खिलाफ जवाबी कारवाही मलेशिया नहीं कर सकता है, क्योकि मलेशिया एक बहुत छोटा सा देश है. इसलिए भारत ने जो कदम उठाया है, मलेशिया उससे निपटने के लिए रास्ते तलाशेगा.



यहाँ पर एक बात और सिद्ध हो गयी, अभी कुछ ही दिनों पहले भारत में कुछ बेहद पड़े लिखे लोग बेवजह फालतू में  चिंता कर रहे थे, की मलेशिया में काम करने वाले इंडियंस को मोदी सर्कार की पाम आयल पर जवाबी कारवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी.



बात साफ़ है, भारत के खिलाफ कोई भी कुछ करेगा या कहेगा, तो भारत उसका मुँह तोड़ जवाब देगा. विवाद बढ़ाना है, या मिटाना है, इसकी कैलकुलेशन करने का मौका अब केवल दुश्मन पक्ष को ही दिया जायेगा. नया भारत हर अखाड़े में दुश्मन की टांग तोड़ने के लिए तैयार है.





मलेशिया के प्रधानमंत्री जी चाहे जितना पाम आयल पाकिस्तान को पिला लें, चाहे तो अपना पाम आयल मलेशिया में ही सड़ने के लिए छोड़ दें, हमें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है.







लेकिन मलेशिया के नेताओं को समझ आ जाना चाहिए, की भारत के खिलाफ स्टेटमेंट जारी करने के पहले भी मलेशिया को यह सोचना चाहिए था, की उसका आकार भारत के मुकाबले कितना छोटा है.







फिर भी यदि मलेशिया ने भारत के खिलाफ जवानी जंग चालू रखी, तो हर बार मलेशिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.







जहाँ तक हम समझ सकते हैं, स्वाभिमानी भारत ने डावोस में मलेशिया के ट्रेड मिनिस्टर से बातचीत का प्रस्ताव ठुकरा कर बहुत सही किया.







भारत के इंटरनल मैटर पर बातों की तलवार चलाना मलेशिया ने चालू किया था, इसलिए पहले मलेशिया को ही अपने मुँह पर ताला डालना होगा.



लेकिन एक सवाल पर भारतीय मीडिया में कोई ध्यान नहीं दे पाया है, मलेशिया से पाम आयल के आयात में कमी आने से इंडोनेशिया बड़ी मलाई उड़ा रहा है.  इसलिए भारत सर्कार कोसिस कर रही है, की इंडोनेशिया भारत से सक्कर और चावल का आयात बढ़ाये.



हर साल की तरह पिछले साल भी इंडोनेशिया के साथ व्यापर से भारत को 10 बिलियन डॉलर से भी अधिक का घाटा हुआ था. इसलिए मलेशिया और भारत के बीच चल रहे तनाव के कारण इंडोनेशिया के साथ भारत के व्यापारिक घाटे को आसमान नहीं छूने दिया जायेगा.



भारत से शक्कर और चावल और अधिक मात्रा में खरीदने को लेकर इंडोनेशिया बहुत बड़ी बड़ी बातें देता आया है, अब उन बातों पर अमल करने का वक़्त आ गया है.



हमारा साफ़ तौर पर मानना है, भारत सर्कार ने चावल और शक्कर की खरीद बढ़ाने को लेकर इंडोनेशिया पर और अधिक दवाब लगाना चाहिए, ताकि भारत का व्यापारिक घाटा कम हो और भारतीय किसानो का भला हो. यदि आप इस विचार से सहमत है, तो इस वीडियो को लाइक जरूर कीजियेगा.

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