ट्रम्प ने ईरानियन मिलिट्री कमांडर क़ासिम सुलेमानी को क्यों मार गिराया??


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जैसा की आपको पता लग गया होगा, कुछ ही घंटो पहले अमेरिका की ड्रोन स्ट्राइक में ईरानियन रेवोलुशनरी गार्ड्स के पावरफुल कमांडर क़ासिम सुलेमानी की मौत हो गयी.



यह कितना बड़ा घटनाक्रम है, यह समझने के लिए हमें जानना होगा, की क़ासिम सुलेमानी आखिर कौन थे?



ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी के बाद और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से ऊपर नंबर आता  है, क़ासिम सुलेमानी का.



पिछले 23 साल से वह effectively ईरान के लिए ऐसे काम कर रहे थे, जैसे अमेरिका में तीन अधिकारी CIA डायरेक्टर, फॉरेन मिनिस्टर और जॉइंट ऑपरेशन्स कमांड मिलकर अलग अलग करते थे.



सुलेमानी इराक और सीरिया में ईरानियन मिलिट्री के सारे ऑपरेशन्स को डायरेक्ट लीड कर रहे थे.



देखा जाये तो ईरान कहीं भी कुछ भी  करे, उसके केंद्र में रहते थे, बेहद शातिर क़ासिम सुलेमानी. और ओबामा प्रशासन तो  इस निष्कर्ष पर पंहुचा था, की अमेरिका क़ासिम सुलेमानी को हाथ भी नहीं लगा सकता है.



अब आपको समझ आ गया होगा, की राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर किसे मार गिराया गया.



कल रात को जब सीरिया से हवाई यात्रा करके इराक के बग़दाद international airport पर क़ासिम सुलेमानी उतरे, तो अमेरिकन ड्रोन्स की नजर उन पर थी.



और फिर जब एयरपोर्ट से दो कारें बाहर निकली, तो उन्हें अमेरिकी स्ट्राइक का निशाना बना लिया गया .



अब सवाल उठता है, की आखिर अमेरिका ने क़ासिम सुलेमानी को हाल के किस घटनाक्रम के बाद मार गिराया.



पिछले सप्ताह इराकी सिटी किरकुक में ईरान सपोर्टेड मिलिशिया ने राकेट अटैक में अमेरिकन कांट्रेक्टर को मार डाला.



इसी बीच ईरान ने गल्फ ऑफ़ ओमान और उत्तरी हिन्द महासागर में  रूस और चीन के साथ मिलकर दिसंबर महीने के अंत में दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा नौसैनिक अभ्यास करके यह जताने की कोसिस करि,की  अमेरिका अब दुनिया के नंबर एक पावर नहीं रह गया है.



इस दौरान अमेरिका मुँह में दही जमा के बैठ तो सकता नहीं था, इसलिए  जवाब में अमेरिका ने ईरान सपोर्टेड मिलिशिया के इराक में तीन और सीरिया में दो ठिकानो पर ताबड़ तोड़ बमबारी कर दी.





फिर बारी आई ईरान की, और इस मंगलवार को ईरानियन मिलिशिया ने बाग्दाद् में स्थित अमेरिकी दूतावास को घेर लिया, और  अमेरिकी अधिकारीयों की जान के लाले पड़ गए.



अमेरिकी दूतावास की इस घेरा बंदी में रिसेप्शन एरिया को भी जला दिया गया. और एम्बेसी पर मिलिशिया के झंडे लगा दिए गए.



24 घंटो के भीतर एम्बेसी की घेरा बंदी बुधवार को ख़तम हो गयी.



इस पुरे घटनाक्रम ने दुनिया को वर्ष 1979-81 के ईरान होस्टेज क्राइसिस की याद दिला दी थी, जिसमे 444 दिनों तक अमेरिका के 52 अधिकारियो और नागरिको को तेहरान में स्थित US एम्बेसी में बंदी बना दिया गया था.



इसलिए जब इराक में बाग्दाद् एम्बेसी की घेराबंदी ख़त्म हुई, तो दुनिया ने  राहत की साँस ली.



लेकिन अमेरिका को विस्वास हो गया, की पिछले कुछ महीनो से अमेरिकन फोर्सेज को जिस तरह इराक में टारगेट किया गया, और जिस तरह बग़दाद एम्बेसी को घेरा गया, वह सब क़ासिम सुलेमानी के इसारे पर ही हो रहा था.



यहाँ तक की गुरुवार को अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी ने कहा था, की यदि उन्हें हमले की बात भी सुनाई दी, तो इस बार  अमेरिका चुपचाप हमले का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि आगे बढ़कर हमले को रोकने के लिए कारवाही करेगा. क्योकि अमेरिका ने खेल को खेलने का तरीका ही बदल दिया था.



और ऐसा नहीं है, की इस एयर स्ट्राइक को अचानक से अंजाम दिया गया, क्योकि इसी साल मई महीने में अमेरिका ने इस इलाके में 14 हज़ार सैनिक तैनात किये थे.



और बग़दाद में अमेरिकी एम्बेसी की घेराबंदी के ख़तम होने के बाद, अमेरिका ने 750 सैनिक तुरंत डेप्लॉय कर दिए थे, और 3000 सैनिको को इराक और सीरिया में भेजने की तैयारी चल रही थी.



यह बात इसलिए भी गले नहीं उतर रही थी, क्योकि राष्ट्रपति ट्रम्प हमेसा से कहते आ रहे थे, की वह अमेरिकी सैनिको को वापस घर बुलाना चाहते हैं. इसलिए जब बुलाने के बजाय सैनिको को भेजा जा रहा था, तो कोई न कोई प्लानिंग तो जरूर होगी.



इसलिए क़ासिम सुलेमानी को मारने के लिए तैयार लम्बे समय से चल रही होगी, हो सकता है, हाल के घटनाक्रम ने अमेरिका को चेता दिया हो, की जो भी करना है, जल्दी से कर डालो.



पिछले कुछ बर्षों से ईरान और अमेरिका के बीच जो  तना तनी चल रही थी, वह अब सबसे ख़राब स्तर तक पहुंच चुकी है.



क्योकि कासिम सुलेमानी ना सिर्फ एक मिलिट्री कमांडर थे, बल्कि वह पोलिटिकल और डिप्लोमेटिक फिगर भी थे.



कहा तो यहाँ तक जाता था, की 80 वर्षीय अली खामेनी के बाद 62 वर्षीया क़ासिम सुलेमानी ही ईरान के सुप्रीम लीडर बनेंगे.



इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कासिम सुलेमानी को ख़तम करके, ईरान के भविस्य पर ही सवालिया निसान लगा दिया है.



कोई आश्चर्य नहीं है, की ईरान ने क़ासिम सुलेमानी की मौत को कन्फर्म करते हुए , साफ़ कर दिया है, की अब इस अमेरिकी एयर स्ट्राइक के बाद जो कुछ भी होगा, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ अमेरिका की होगी.



अभी तक अमेरिका और ईरान आल आउट वॉर से बचते हुए दिखाई पड़ रहे थे, लेकिन जिस तरह राष्ट्रपति ट्रम्प ने क़ासिम सुलेमानी को टारगेट करने का निश्चय किया, वह सिद्ध करता है, की अब अमेरिका और ईरान के सम्बद्ध सुधरने वाले तो नहीं है.



ईरान जवाबी कारवाही करेगा, या नहीं. यह तो समय ही बताएगा. लेकिन इस घटनाक्रम के बाद ईरान हाथ पर हाथ धरकर बैठेगा, यह अनुमान लगाना भी ठीक नहीं होगा.


अमेरिका ईरान के बीच चल रहे शतरज के खेल में अभी तक प्यादे ही मारे जा रहे थे, लेकिन प्रेजिडेंट ट्रम्प ने अब ईरान का बजीर ही गिरा दिया है.

इसलिए यह भी हो सकता है, की क़ासिम सुलेमानी के चले जाने के बाद ईरान अपनी रणनीति में परिवर्तन कर ले. क्योकि खुरापात करने वाला आदमी ही चला गया. लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो क़ासिम सुलेमानी को मारकर अमेरिका जो हांसिल करना चाह रहा था, वह उसे मिल जायेगा.



इसलिए ईरान अमेरिका को इतनी आसानी से जीत तो गिफ्ट करेगा नहीं.



आगे आने वाले दिन इराक और सीरिया में बेहद गंभीर होने वाले हैं, इन दो हाथियों की लड़ाई भी तो वही लड़ी जानी है. आइये देखते हैं, अब ईरान कौन सी चाल चलता है.



जहाँ तक भारत का सवाल है, साफ़ तौर पर हमारे लिए स्थिति और भी गंभीर हो गयी है.यह देखने वाली बात होगी, की ईरान अमेरिका की कारवाही का जवाब अनुपात में यानि की ईंट का जवाब ईंट से  देता है, अथवा लड़ाई को भड़काते हुए ईंट का जवाब पत्थर से देता है.



हमें तो यही लगता है, की ईरान इस पूरी लड़ाई को आल आउट वॉर में कन्वर्ट तो होने देगा नहीं. इसलिए जवाब तो दिया जाएगा, लेकिन ऐसे दिया जायेगा, की लड़ाई और ज्यादा ना भड़के.

लेकिन भविस्य कौन सी करवट लेगा, यह अभी तो निश्चित रूप से  नहीं कहा जा सकता है.

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