Chinese President's Myanmar Visit - How India will fight back??


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Reference 
https://www.reuters.com/article/us-myanmar-china/myanmar-china-ink-deals-to-accelerate-belt-and-road-as-xi-courts-an-isolated-suu-kyi-idUSKBN1ZH054
https://economictimes.indiatimes.com/news/international/business/china-and-myanmar-stand-together-despite-rohingya-backlash/articleshow/73353029.cms
http://www.xinhuanet.com/english/2020-01/18/c_138715583_2.htm
https://timesofindia.indiatimes.com/india/why-chinese-president-xi-jinpings-myanmar-visit-may-worry-india/articleshow/73324878.cms
https://www.hindustantimes.com/world-news/belt-and-road-initiative-gets-major-boost-as-china-and-myanmar-ink-33-deals/story-KamoB9sxiHMBLsAlDJzofM.html
https://www.wionews.com/india-news/xi-jinping-bolsters-relationship-with-myanmar-what-does-this-mean-for-india-275031


जैसा की आपको पता होगा, चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ने म्यांमार की दो दिवसीय यात्रा समाप्त की है .

इस यात्रा की इम्पोर्टेंस समझने के लिए यही काफी है, की पिछले 19 सालों में सर्वोच्च चाइनीस लीडर की यह पहली म्यांमार यात्रा है.

इस यात्रा में चीन और म्यांमार के बीच 33 एग्रीमेंट पर साइन किये गए, लेकिन जैसा चीन के साथ किये गए एग्रीमेंट के साथ होता है, यहाँ पर भी एग्रीमेंट के बारे में कोई ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आयी है.

बड़ी बात यह है, की ये सभी एग्रीमेंट पुराने प्रोजेक्ट्स के लिए ही किये गए हैं, किसी भी नए बड़े प्रोजेक्ट के बारे में अनोउसमेंट नहीं किया गया.

यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है, की म्यांमार में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं, इसलिए चीन के साथ कोई बड़ा प्रोजेक्ट अन्नोउंस करके म्यांमार की सर्कार अपने लिए मुसीबत मोल लेना नहीं चाहती है, ऐसा जान पड़ता है.

बात साफ़ है, म्यांमार की सर्कार चीन के बढ़ते हुए प्रभाव को लेकर चिंतित है. इसलिए भी पुराने एग्रीमेंट को पूरा किये बगैर नए प्रोजेक्ट के बारे में अनाउंसमेंट नहीं किया गया.

जैसा की 33 एग्रीमेंट को लेकर डिटेल्स सामने नहीं आयी है, इसलिए इस म्यांमार और चीन के सम्बन्धो को लेकर हमें अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. क्योकि हो सकता है, जब यह डिटेल्स बाद में सामने आये, तो हमें कुछ और ही पता चले.

इसलिए सजग रहते हुए, हमें आगे जमीनी काम को देखना होगा, वही हमें बताएगा, की रियलिटी में चीन और म्यांमार के बीच क्या एग्रीमेंट हुए हैं.

इस यात्रा के दौरान वर्ष 2011 में अन्नौंस किये गए 3.6 बिलियन डॉलर के बाँध के प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का भी आयोजन किया गया था.

आगामी चुनाव की पृष्ठ्भूमि में, म्यांमार की जनता के विरोध का परिणाम देखिये, की चीन की राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान उस बांध को लेकर कोई भी एग्रीमेंट नहीं किया गया.

लेकिन यही कारण है, की चीन के राष्ट्रपति को लोकतंत्र से बड़ी नफरत है, क्योकि दुनिया के अलग अलग देशों में उनके उड़ते हुए सपनो को लोकतंत्र ने ही जमीं पर उतारा है.

भारत के हिसाब से देखा जाये, तो म्यांमार और चीन इस सहमति पर पहुंचे, की चीन म्यांमार इकनोमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर इम्प्लीमेंटेशन तेजी से किया जाये .

इस कॉरिडोर के एक सिरे का अंत होगा, क्याप क्यु, जहाँ पर चीन के सहयोग से डीप सी पोर्ट और इकनोमिक जोन का विकास किया जा रहा है.

जब क्याप क्यु पोर्ट , हम्बनटोटा और ग्वादर पोर्ट को हम एक साथ देखें, तो हमें यह साफ़ साफ़ दिखाई देने लगता है, की चाइनीस ड्रैगन भारत को चारों और से घेरने की योजना पर धीरे धीरे आगे बढ़ रहा है.

सायद इसलिए देर से ही सही भारत अब सोमवार को तंजावुर एयर फाॅर्स बेस को activate करके वहां पर ब्रह्मोस मिसाइल से लेस सुखोई लड़ाकू विमान को तैनात कर रहा है. आपको जानकारी होगी, southern  एयर कमांड के लिए सुखोई लड़ाकू विमान की यह पहली स्क्वाड्रन होने जा रही है.

तंजावुर एयरफोर्स बेस से उड़ने वाले सुखोई लड़ाकू विमानों की आवाज़ को सुनकर हिन्द महासागर में किसी भी कारवाही को अंजाम देते हुए, चीन की रूह काँप उठेगी.

लेकिन कहने की जरूरत नहीं है, साउथ इंडिया में भारत ने अपनी डिफेंसिव और offensive capability का अभी बहुत विकास करना बाकि है. लेकिन लम्बी यात्रा के लिए पहले कदम को उठाया जाना, एक शुभ संकेत माना जा सकता है.

मैन टॉपिक पर लौटते हुए, म्यांमार अभी भी मुसीबत में फंसा हुआ है, कुछ ही दिनों में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस म्यांमार के रोहिंग्या इशू पर अपना फैसला सुनाने वाला है.

इसमें देखना होगा, की क्या इंटरनेशनल कोर्ट म्यांमार के खिलाफ कोई जमीनी कदम उठाता है.

इस दौरान चीन चट्टान की तरह म्यांमार के पीछे खड़ा हुआ है, इसलिए म्यांमार को किसी न किसी रूप में चीन के सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी.

आपको भी अंदाज़ा होगा, चीन जैसा चौधरी देश ऐसी ही मुसीबत में फंसे कमजोर देशो की मजबूरी का लाभ उठाने की फ़िराक़ में रहता है.

इसलिए चीन के राष्ट्रपति की म्यांमार यात्रा सफल हुई या नहीं, यह देखने के लिए हमें कुछ समय का इंतजार करना होगा.

लेकिन फिर वही बात, चीन के प्रभाव को म्यांमार और श्री लंका में लिमिट करने के बजाय अच्छा होगा, की भारत हिन्द महासागर में अपनी शक्ति में तेजी से इजाफा करे.

अगर हम मजबूत और चौककने रहे, तो चीन की स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स की स्ट्रेटेजी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगी.

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