India China Border - Huge Road Construction Completed by BRO


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Reference 
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/in-ramp-up-75-roads-on-china-border-ready/articleshow/73409778.cms


कल हमारे दर्शक आशीष थापे ने इस टॉपिक के बारे में हमें जानकारी दी थी, इसलिए आज हम यह वीडियो बना रहे हैं.







आप सभी को अच्छे से पता है, दुनिया का सबसे लम्बा सीमा विवाद भारत और चीन के बीच है. और चीन ने लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल LAC के अपनी तरफ बेहद मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर लिया है, जिसके  मुकावले में भारत ने LAC के अपनी और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करने में काफी ढिलाई बरती.







इसका बेहद आसान कारण यह बताया जाता है, की चीन के साथ सीमावर्ती इलाको में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने के लिए भारत के पास आर्थिक संसाधनों का आभाव रहा.







लेकिन आपको भी पता है, जिस चीज को हम इम्पोर्टेन्ट समझते हैं, उसके लिए समय और पैसा दोनों अपने आप निकल आते हैं.







इसलिए बजट के आभाव में भारत ने चीन के साथ सीमावर्ती इलाको में सडकों और पुलों का निर्माण नहीं कराया, यह बात तो गले नहीं उतरती है.







सच्चाई यह है, की चीन के हाथों 1962 की करारी हार के बाद भारत ने यह निर्णय लिया, की यदि हमने सीमावर्ती इलाको में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया, तो उसका लाभ उठाकर चीन भारत पर कब्ज़ा कर लेगा.







वर्ष 2003 में तब के भारतीय उप प्रधानमंत्री के अनुसार यह निर्णय भारत सर्कार का सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक ब्लंडर था.







आप ही बताएं, क्या आपने इससे भी अधिक नकारात्मक विचार कभी सुना है??







वैसे पिछली सरकारों के इस लॉजिक को यदि मान लिया जाये, तो भारत में कहीं भी किसी भी प्रकार की रोड बनाने की जरूरत नहीं है.







एक सवाल यह भी है, की यदि भारत की  ओर सीमा वर्ती इलाको में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने से चीन को लाभ मिल सकता था, तो चीन ने अपनी और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण क्यों करवाया, क्या उस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल भारत की सेना तिब्बत पर कब्ज़ा करने में नहीं कर सकती थी.







बॉर्डर में हम रोड बनाएंगे, तो दुश्मन को अंदर घुसकर हमला करने में आसानी होगी, ऐसे विचार मन में तब आते हैं, जब आप डिफेंसिव मोड में हों.







जब आप चीन की तरह offensive मोड में होते हैं, तो आप बॉर्डर के इलाको में मजबूत, हर मौसम और हर हालत में काम करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते हैं,







हमारा तो साफ़ तौर पर मानना रहा है, की 72 सालों तक हमने बहुत रह लिया डिफेंसिव मोड में, अब वक़्त आ गया है, की हम offensive मोड में जाने  की तैयारियां करने लगें.







इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, लद्दाख उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में 73 इंडिया चीन बॉर्डर रोड्स ICBR का  निर्माण किया जाना था.







इन 73 इसबर में से 61 इंडिया चीन बॉर्डर रोड्स ICBR  को बनाने का जिम्मा मिला था, बॉर्डर रोड्स आर्गेनाइजेशन को.







61 इंडिया चीन बॉर्डर रोड्स की लम्बाई थी, 3350 किलोमीटर, जिसमे से 75% दुरी की रोड का निर्माण कार्य पूरा हो चूका है, और शेष 25% यानि की 805 किलोमीटर की रोड पर पक्की सड़क गिरना बाकि है.







अगले तीन सालों में बीआरओ की योजना के अनुसार यह काम पूरा कर लिया जायेगा.







बीआरओ इतने दुर्गम और पहाड़ी इलाको में खून पसीना एक इसलिए कर रहा है, ताकि LAC के उस तरफ चीन की सड़क और इस तरफ भारत की सड़क के बीच दुरी को कम से कम किया जा सके.







आईडिया वही सिंपल है, की यदि चीन कोई भी हरकत करे, तो उसके खिलाफ जवाब देने के लिए भारत ट्रूप्स का मूवमेंट तेजी से कर पाए.







इसलिए कहने की जरूरत नहीं है, यह सड़कें डिफेंसिव और offensive दोनों ही मोड के काम आने वाली है.







साथ ही BRO कोसिस कर रहा है, की बड़ी संख्या में पुलों का भी निर्माण किया जाये, और यह पुल ऐसे बनाये जा रहे हैं, ताकि यदि एक पुल प्राकृतिक  आपदा का शिकार हो जाये, तो भी कनेक्टिविटी को स्थापित करने के लिए दूसरे पुलों का विकल्प उपलब्ध रहे.







साथ ही जैसा की हमने पहले भी अपने वीडियोस में चर्चा करि थी, की चीन हमला करके भी इन पुलों को बर्बाद कर सकता है, इसलिए भारत सुरंगो का जाल भी चीन के साथ सीमा वर्ती इलाको में बिछा रहा है.







जबकि इतना सारा सकारात्मक काम किया जा रहा है, फिर भी हमारे यहाँ BRO के इस असाधारण काम की प्रशंसा नहीं की जाती है.







पहले जब बॉर्डर एरियाज में Infrastructure नहीं था, तो मीडिया में कभी कभी रोया और गया तो जाता था,  लेकिन अब जबकि सडको और पुलों के निर्माण पर काम तेजी से चल रहा है, तो तालियां बजाने का समय किसी को नहीं मिल रहा है.







वैसे भी जब हमारी मीडिया को सड़क छाप डिबेट करवाने से फुर्सत मिले, तब ही तो वह चीन के साथ बॉर्डर के इलाको में सड़क निर्माण की खबरों को कवर करने का समय निकाल पायेगी .







सीमावर्ती इलाको में हो रहे इसी विकास का परिणाम है, की Communist चीन और Islamic पाकिस्तान के पैसों पर पलने वाले लोगों को दिल्ली में लोकतंत्र और सेकुलरिज्म खतरे में दिखाई पड़ रहा है.







लेकिन अंत में हमारी तरफ से बीआरओ को इस असाधारण काम की बहुत बहुत बधाई.







आज का बेहद आसान सवाल है,  73 इंडिया चीन बॉर्डर रोड्स में से कितनी सडको के निर्माण का काम बीआरओ ने अपने हाथ में लिया है?

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