Take POK Back - Indian Army Ready to Take Action🔥🔥💪💪


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Reference 


यह हमारे लिए संतुस्टी का विषय है, की पहली बार बेहद साफ़ शब्दों में इंडियन आर्मी चीफ ने कह दिया है, की अगर इंडियन आर्मी को ऑर्डर्स मिले. तो POK को पाकिस्तान से वापस लेने के लिए उचित कार्यवाही की जाएगी.

अपने इस स्टेटमेंट के पीछे उन्होंने बैकग्राउंड यह दिया, की फरबरी 1994 में संसद के दोनों सदनों ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित किया था.

जिसमे साफ़ लिखा था, जम्मू कश्मीर राज्य पूरा का पूरा भारत का अभिन्न हिस्सा था, और हमेसा रहेगा.

और पाकिस्तान से यह मांग की गयी थी, की आक्रमण करके पाकिस्तान ने जिस हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है, पाकिस्तान ने उसे खली करना ही होगा.

लेकिन अगर आप उस resolution को पड़ें, तो आप पाएंगे, उसमे यह कहीं भी नहीं लिखा, की पाकिस्तान से POK वापस लेने के लिए भारत हर संभव कदम किसी भी कीमत पर उठाएगा.

इसी लिए सायद इंडियन आर्मी चीफ ने कहा, की यदि पार्लियामेंट चाहे, की POK पर भारत का रियलिटी में कण्ट्रोल होना चाहिए, तो आर्मी उचित कारवाही करेगी.

इंडियन आर्मी को जब POK पर जमीनी कारवाही करना है, इसका समय वह अपने हिसाब से तय करे. लेकिन Parliament को इस बारे में रेसोलुशन पास करने में देरी नहीं करनी चाहिए.

जब 1994 में हमने पाकिस्तान से मांग करी थी, की वह POK को खाली कर दे, जिस पर अभी तक पाकिस्तान ने अमल नहीं किया है, तो क्या अब समय नहीं आ गया है, की हमारी पार्लियामेंट एक और रेसोलुशन पास करके यह साफ़ कर दे, की भारत सर्कार ने POK को वापस लेने के लिए कोसिस चालू कर देनी चाहिए.

वैसे इस पुरे मामले में भारतीय पार्लियामेंट के रेसोलुशन का केवल सांकेतिक महत्वा है, मोदी सर्कार के आदेश पर जल थल और नभ में पूरा काम करना तो इंडियन आर्म्ड फोर्सेज को ही है.

लेकिन जैसे ही POK को वापस लेने की बात चलती है, कई एक्सपर्ट लोगों और नेताओं के घुटने कांपने लगते हैं., की भारत के ऐसे कदम से इंडिया और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हो सकता है.

हालाँकि यह डर होना स्वाभविक है, लेकिन हमें यहाँ समझना होगा, की इस डर को पालकर क्या हम पाकिस्तान के बिछाये जाल में अपने आप को खुद उलझा नहीं रहे हैं.

यह अच्छे से समझने के लिए हमें थोड़ा सा इतिहास में जाना होगा, वर्ष 1963 में जुल्फिकार अली भुट्टो बने पाकिस्तान के विदेश मंत्री. तब उनकी कैलकुलेशन के मुताबिक परमाणु bomb से पाकिस्तान को तीन लाभ मिल सकते थे.

पहला यह था, की परमाणु bomb पाकिस्तान के लिए स्टेटस सिंबल होगा, क्योकि पुरे इस्लामिक वर्ल्ड में अकेले पाकिस्तान के पास यह हथियार रहेगा .

दूसरा लाभ यह था, की परमाणु bomb के कारण मित्र मुस्लिम देशो से आसानी से आर्थिक मदद मिलती रहेगी, और कच्चे तेल की सप्लाई के लिए पाकिस्तान हमेसा के लिए निश्चिंत हो जायेगा.

तीसरा लाभ यह था, की यह पाकिस्तान को इतनी शक्ति दे देगा, की भारत हमेसा के लिए डिफेंसिव मोड में आ जायेगा.

जबकि भारत परमाणु हथियार सिर्फ इसलिए बना रहा था, ताकि कोई दुश्मन देश उस पर परमाणु हमला करने की हिमाकत ना कर पाए, लेकिन पाकिस्तान परमाणु बम्ब को लेकर भी अपने नफा नुकसान का अंदाज़ा लगा रहा था.

इन्ही भुट्टो साहब ने 1965 में कहा था, की पाकिस्तान घास खायेगा, भूखा भी रह लेगा, लेकिन पाकिस्तान अपना खुद का परमाणु बम हांसिल जरूर करेगा.

अब यदि आप आज खड़े होकर इतिहास को देखें, तो आप पाएंगे, की पाकिस्तान ने परमाणु बम को जिस लिए बनाया था, बिलकुल वैसा का वैसा लाभ पाकिस्तान को आज तक हो रहा है.

इसलिए जब हम पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध के खतरे की बात करते हैं, तब हम एक्चुअली पाकिस्तान की रणनीति के मुताबिक ही रियेक्ट कर रहे होते हैं.

लेकिन हम उस समय हम अपनी खुद की परमाणु रणनीति भूल जाते हैं, की हमने परमाणु हथियार हांसिल ही इसलिए किये थे, की कोई हमारे ऊपर परमाणु हथियारों का प्रयोग ना कर पाए.

जो लोग अपनी स्ट्रेटेजी को भूलकर दुसमन की साजिस पर अमल करने लगते हैं, उनको हार के अलाबा कुछ और मिल ही नहीं सकता है.

वैसे हमारे जिन एक्सपर्ट को परमाणु बम का डर लगा रहता है, वह यह क्यों नहीं बताते, की जब दाव पर रावलपिंडी और कराची होंगे, तो क्या POK को बचाने के लिए पाकिस्तान परमाणु बम चलाएगा.

जिस प्रकार परमाणु हथियारों का प्रयोग ना तो सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हुआ, और ना ही एयर स्ट्राइक के बाद, उसी प्रकार POK पर तिरंगा भी फहराने लगेगा, और पाकिस्तान हाथ मलता ही रह जायेगा.

लेकिन जिस प्रकार सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के लिए हमारी सेनाओ ने फूल प्रूफ स्ट्रेटेजी बनाई, उसी तरह POK को वापस लेने के लिए भी सेना के पास बेहद कारगर रणनीति होगी, इस तरह का पक्का विस्वास हम सभी को होना चाहिए.

जहाँ तक युद्ध के भड़कने का सवाल है, हम सभी ने अभी हाल ही में देखा है, की अमेरिका ने ईरान के अमित शाह को बग़दाद में ड्रोन स्ट्राइक से मार गिराया, और ईरान ने जवाबी कारवाही के तौर पर लोल्लिपोप स्ट्राइक करके बदला भी ले लिया.

यदि ईरान युद्ध से होने वाले खतरे का अंदाज़ा लगा सकता है, तो पाकिस्तान भी ऐसा आसानी से कर पायेगा. 

वैसे भी यदि हम POK वापस ना भी लें, तो भी पाकिस्तान भारत के टुकड़े टुकड़े करने की साजिस पर दिन रात अमल करता ही रहेगा.

इसलिए POK को वापस लेना हमारे लिए कोई विकल्प नहीं है, वह एक मजबूरी है. हमें लड़ाई को पाकिस्तान की और ले जाना ही होगा.

अगले साल तक भारत के पास दोनों रफ़ाएल लड़ाकू विमान और S400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा, इसलिए तब हम हर दृस्टि से पाकिस्तान के खिलाफ कारवाही के लिए तैयार हो जायेंगे.

जहाँ तक आप में से कुछ लोगों का कहना हो सकता है, की चीन भी पाकिस्तान की मदद के लिए आ सकता है.

1971 में जब पाकिस्तान one by two हो गया, तब चीन कुछ नहीं कर पाया, तो अब क्या कर लेगा.

इसी यूट्यूब पर आपको ऐसे वीडियो मिल जायेंगे, जिनमे पाकिस्तानी सेना के अधिकारी यह कहते हैं, की चीन पहले व्यापारी और बाद में पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है.

लेकिन फिर भी चीन को काबू में रखने के लिए यह जरूरी होगा, की अमेरिका के साथ निश्चित समय अबधि के लिए भारत का म्यूच्यूअल डिफेंस अग्रीमेंट हो, ताकि चीन को पता हो, की यदि उसने पाकिस्तान की लड़ाई अपने सर पर ली, तो भारत के साथ अमेरिका की तागत का सामना उसे करना पड़ेगा.

अब आप में से कुछ लोगों का कहना हो सकता है, की भारत अमेरिका के साथ ऐसा कोई भी एग्रीमेंट नहीं कर सकता है. अगर ऐसा है, तो आप ये भी जरूर बताएं, की दिसंबर 1971 में बांग्लादेश को आजाद कराने के पहले अगस्त 1971 में भारत ने रूस के साथ ऐसा ही एक पीस फ्रेंडशिप एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट क्यों किया था?

इसलिए बात साफ़ है, भारत को यदि चीन और पाकिस्तान के साथ two फ्रंट वॉर का खतरा है, तो चीन को सबसे अधिक डर इस बात से लगता है, की इंडिया और अमेरिका दोनों एक साथ मिलकर उसके खिलाफ मोर्चा ना खोल दें.

लेकिन दिक्कत यहाँ पर यह है, की हम अपने डरों के तिलिस्म में उलझे हुए हैं, की हम यह तक नहीं देख पाते, की हमारा दुश्मन चीन भी कांच के घर में बैठा हुआ है.

एक बड़ा सवाल यह है, की चीन और पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका भारत का साथ क्यों देगा, पहली बात तो यह है, की पिछले दस सालों में भारत ने अमेरिका से अकेले 18 बिलियन dollar के हथियार ख़रीदे हैं.

दूसरी बात यह है, की अफ़ग़ानिस्तान से यदि इज्जत के साथ अमेरिका को बहार निकलना है, तो उसका रास्ता कराची से होकर नहीं, बल्कि श्री नगर से होकर जाता है.

इसलिए जिस अफ़ग़ानिस्तान बेलआउट के लिए पाकिस्तान पिछले 40 सालों से अमेरिका को तड़पा रहा है, हो सकता है, वह बेलआउट अमेरिका को नसीब तब हो, जब POK पर भारत का अधिकार हो जाये.

अंत में हम सिर्फ यही कहना चाहेंगे , की इस समय भारत के 72 सालों की सबसे स्ट्रांग लीडरशिप हमारे पास है, जिसके पास डोवाल साहब जैसे सुरक्षा सलाहकार है. इसलिए हमें उन पर पूरा भरोषा रखते हुए, उन्हें पूरा समय देना चाहिए, ताकि वह रियल और सीक्रेट स्ट्रेटेजी को अपने दिमाग की ऊचाँइयों से जमीं पर उतार सके.

हड़बड़ी में गड़बड़ी करने के लिए हम सभी ने उनके ऊपर दवाब बनाने की फालतू कोसिस नहीं करनी चाहिए.

जब भी कभी मोदी सर्कार POK को वापस लेने के लिए आगे बढ़ेगी, बिना डर के हम सभी उसके साथ खड़े होंगे.

यदि आपको लगता है, की मोदी सर्कार ने सही समय पर  POK को वापस लेने के लिए कारवाही करनी चाहिए, तो आप इस वीडियो को like कीजिये. लेकिन  यदि आपको लगता है, की ऐसा नहीं होना चाहिए, तो आप इस वीडियो को dislike मारिये

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