The Best Strategy for India to Defeat China (💪Guaranteed Win💪)



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हमारे देश में इस बात की चर्चा तो बहुत होती है, की भारत और पाकिस्तान के बीच यदि युद्ध हुआ, तो भारत जीत कैसे हांसिल करेगा.



लेकिन भारत और चीन के युद्ध में कौन सा देश कैसे जीतेगा, इस बारे में एनालिसिस कम ही किया जाता है. और जब भी भारत और चीन के बीच युद्ध की बात चलती है, तो हम भारतीय सेना की शक्ति की तुलना चीन की सैन्य तगत से करने लगते हैं.



और ऐसा करते हुए, इस निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत आसान होता है, की भारत की तुलना में चीन बहुत अधिक शक्तिशाली है, और चीन से लड़ने के बजाय अच्छा होगा, की हम चीन से लड़ाई को अवॉयड करें.



देखा जाये तो पिछले 72 सालों में भारत चीन से विवाद से बचता ही आया है. 1962 की लड़ाई भी इसीलिए चालू हुई थी, क्योकि चाइनीस लीडरशिप ने भारत के राजनैतिक नेतृत्व को सबक सिखाने का फैसला लिया था.



परिणाम हमारे सामने हैं, पाकिस्तान के खिलाफ हम डिफेंसिव mode में हैं, और चीन के खिलाफ हम अवोइडेन्स मोड में हैं.



लेकिन जिस तेजी से चीन अपनी शक्ति को बड़ा रहा है, देर सवेर हमें चीन के साथ मैदान में दो दो हाथ करने ही होंगे.



इसलिए सवाल उठता है, की हम चीन से ऐसी हालत में कैसे निपटेंगे. इस सवाल का डीप एनालिसिस किया है, फॉर्मर पेंटागन स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस Dougherty ने. इस वीडियो में हम उन्ही के एनालिसिस को कवर करेंगे.



चीन के खिलाफ भारत की डिफेंस की मुख्या रणनीति यह है, की वह Defensive mode में पहले LAC पर बॉर्डर की रक्षा करेगी, और मौका दिखते ही, offensive स्ट्राइक के जरिये चाइना occupied  तिब्बत के पठार पर कब्ज़ा कर लेगी, जिससे चीन को बातचीत की टेबल पर बैठने के लिए मजबूर किया जा सकेगा.



हालाँकि तिब्बत को आजाद करने के लिए यह ऑप्शन अच्छा दिखाई पड़ता है, लेकिन इसकी दिक्कत यह है, की ऐसा करने से भारतीय सेना हिमालय के पहाड़ों से निकलकर तिब्बत के पठार पर पहुंच जाएगी, और फिर हमारी सेना सीधे चीन के जबरदस्त जबाबी हमले का शिकार होगी.



हिमालय पहाड़ को छोड़कर तिब्बत में लड़ाई को ले जाना, भारत के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है.





इसलिए सवाल उठता है, की चीन से फिर कैसे निपटा जाये, इसका जवाब मिलता है, 1950 से 1953 के बीच लड़ी गयी कोरियन वॉर से. जिसमे चीन ने अपने से बड़ी आधुनिक और शक्तिशाली अमेरिकी सेना को धुल चटाई थी.



अगर 1953 में कोरियन वॉर में चीन अमेरिका को हरा सकता है , तो भारत उसी खुराक का इस्तेमाल चीन के खिलाफ क्यों नहीं कर सकता है??





कोरियन वॉर में चीन ने नार्थ कोरियन माउंटेन का इस्तेमाल करके अमेरिका के खिलाफ सरप्राइज और धोके का इस्तेमाल करके लगातार अमेरिका को निशाना बनाया था.



उसी तरह भारतीय सेना ने भी चीन के द्वारा हमला कीए जाने पर, रहना हिमालय के पहाड़ो में ही है, और मौका पड़ते ही चीन के सेना पर हमला करके भाग जाना है. Basically चीन के खिलाफ हमें गोरिल्ला वॉर की टैक्टिस का इस्तेमाल करना होगा.



लेकिन इस स्ट्रेटेजी की समस्या यह है, की नार्थ कोरिया के माउंटेन्स की तुलना किसी भी प्रकार से हिमालयन माउंटेन से नहीं की जा सकती है. इसलिए हिमालय की दुर्गम चोटियों और रास्तों का हमें भली प्रकार से शांति काल में अध्यन करना होगा.



सायद इसी लिए LAC के इस तरफ हमारे पास मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का होना बेहद जरूरी है, ताकि हम हिमालय के पहाड़ो में लड़ी जाने वाली हिट एंड रन की लड़ाई के लिए लम्बे समय के लिए सप्लाई की व्यवस्था कायम रख सकें.



साथ ही जब चीन की जो सेना हिमालय माउंटेन में फसी होगी, उसको मिलने वाली चाइनीस सप्लाई लाइन का भी बंद होना बेहद जरूरी है. यहाँ पर साइबर वारफेयर कैपेबिलिटीज काम आ सकती है, ताकि चीन पर हमला करने की कॉस्ट बड़ाई जा सके.



यहाँ पर सवाल यह है, की चीन को हिमालय की पहाड़ियों में कैसे भटकाया जाए, इसके लिए तो पहले घुसपैठ ही करनी होगी, और फिर जब चाइनीस सेना आये तो उस पर जबरदस्त काउंटर अटैक किया जा सकता है.



जब चीन की सेना हिमालय में अपना खून बहा रही होगी, तब मैन युद्ध तो लड़ा जायेगा, हिन्द महासागर के पानी में.



हिन्द महासगर में भी चीन के खिलाफ जवाबी कार्यवाही के लिए अभी भारत एयर क्राफ्ट कर्रिएर की छमता बढ़ाने पर काम कर रहा है. लेकिन अमेरिकी एक्सपर्ट के अनुसार चीन इस मामले में पहले ही बहुत आगे निकल चूका है.



हमें अपनी अंडर वाटर वॉर fare capability का विकास करना होगा. इसलिए भारत के पास पनडुब्बियों की शक्ति में इजाफा बेहद जरूरी है.



सबमरीन्स का अंडर सी फ्लीट निश्चित करेगा, की हिन्द महासागर को चीन के जंगी जहाजों का कब्रिस्तान बना दिया जाये.



आज ही अपने अख़बारों  में पड़ा होगा, की डिफेंस एक्वीजीशन कॉउन्सिल ने छह पनडुब्बियां का इंडिया में ही निर्माण करने के लिए ल&टी और Mazagaon Docks लिमिटेड का चुनाव कर लिया है.



45 हज़ार करोड़ की लागत से बनने बाली ये पनडुब्बियां भारत की शक्ति में इजाफा करेगी, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन इस प्रोजेक्ट पर तेजी करने की जरूरत है.



यहाँ पर हमें ध्यान रखना होगा, की ब्रिटिश राज के दौरान भारत की शक्ति गल्फ ऑफ़ aden से लेकर मालक्का स्ट्रेट तक थी.  इसलिए हमें अपना प्रभाव छेत्र को संकुचित नहीं रखना चाहिए.



बात यह है, की भले ही जिबूती, ग्वादर और Hambantota में चीन के बेस हों, इन दोनों चौक पॉइंट्स पर चीन का गला घोटने की तागत का हमें विकास करना ही होगा.



जहाँ तक हमारा विचार है, अगर चीन अपने इतिहास का हवाला देकर पुरे साउथ चाइना सी पर दाबा  पेश कर सकता है, तो हिंदुस्तान भी उसी इतिहास का example  देकर पुरे हिन्द महासागर पर अपना दाबा  क्यों नहीं ठोक सकता है?



दुनिया हमारा क्लेम माने या ना माने, सबसे पहले हमें अपने दिमाग में यह बैठाना होगा, की इंडियन ocean दुनिया का एक मात्र ऐसा महासागर है, जिसका नाम किसी एक देश India के नाम पर आधारित है.



इसलिए हमें अपने दिमाग का दायरा बढ़ाना होगा, और पुरे end to end हिन्द महासागर को अपने प्रभाव छेत्र में ही लाना होगा.



हमारा तो साफ़ साफ़ मत है, यदि साउथ चाइना सी चीन का हो सकता है, तो इंडियन Ocean India का क्यों नहीं हो सकता है?



अंत में बात वही सिंपल है, चीन के खिलाफ लड़ाई के लिए हमें तैयारी नहीं करनी है, बल्कि हमें उस लड़ाई को जीतने के लिए कमर कसनी है.

इसके लिए सेना की तीनो अंगो का समुचित विकास करना जरूरी है, और चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के पद का निर्माण किया जाना, उसी दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है.



जैसा की अभी हाल ही हमें CDS विपिन रावत ने कहा था, की पाकिस्तान के साथ युद्ध के scenarios को प्रेडिक्ट नहीं किया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार चीन के साथ युद्ध की परिस्थितियों की भविस्यवाणी करना भी मूर्खता होगी.



लेकिन फिर भी हमें चीन का सामना करने की रणनीति को छोड़कर चीन को उठाकर पटकने की रणनीति पर काम करना ही होगा.



आपके हिसाब से चीन को हराने की यदि और कोई बेहतर रणनीति हो, तो आप कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं.

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