India make New Strong Air Force Station in Lakshadweep!!
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https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/pakistan-offers-assistance-to-sri-lankan-air-force/articleshow/74055199.cms
https://en.wikipedia.org/wiki/Agatti_Airport
https://www.asian-voice.com/Opinion/Columnists/Sardar-Patel-managed-to-Retain-Lakshadweep
https://www.quora.com/How-did-Andaman-Nicobar-Island-as-well-as-Lakshadweep-become-part-of-India
https://en.wikipedia.org/wiki/Lakshadweep
https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Indian_Air_Force_stations
https://www.hindustantimes.com/india-news/pension-cost-cut-top-on-military-agenda/story-aoZflSlDvYhbzjqM7eEP7M.html
हम सभी की इस बात पर पूरी सहमति है, की इंडियन Ocean रीजन हमारा इलाका है, और इस पुरे छेत्र के चप्पे चप्पे पर हमारी नज़र और असर होना चाहिए.
इसी दिशा में भारत अब बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. आप सभी को पता होगा, की अंडमान निकोबार आइलैंड पर भारत के दो एक्टिव एयर फाॅर्स स्टेशन हैं.
लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा, की लक्षद्वीप पर आज तक भारत का फुल्ली फंक्शनल एयरफोर्स स्टेशन नहीं है.
लक्षद्वीप तक हवाई रस्ते से पहुंचने के लिए अगत्ती एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है. चूँकि लक्षद्वीप एक बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, इसलिए इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल एयर फाॅर्स के साथ साथ सिविलियन्स के द्वारा भी किया जाता है.
लेकिन सिर्फ एक छोटी सी हवाई पट्टी को एयरपोर्ट कागज़ों पर तो कहा जा सकता है, जमीं पर यह एयरपोर्ट किसी भी बड़े सिविलियन और मिलिटरी ऑपरेशन को सपोर्ट नहीं कर सकता है.
इसलिए अब भारत सर्कार ने समुद्र की जमीं कब्जे में लेकर अगत्ती एयरपोर्ट पर सुविधाओं का विकास करने का निर्णय ले लिया है. ना सिर्फ अगत्ती एयरपोर्ट की हवाईपट्टी को लम्बा किया जायेगा, बल्कि वहां पर सुविधाओं का भी विकास किया जायेगा.
अगत्ती एयरपोर्ट की इस हवाई पट्टी का निर्माण किया गया था, वर्ष 1988 में. वर्ष 2013 से इस एयरपोर्ट पर कैपेसिटी डेवलपमेंट का प्लान ठन्डे बस्ते में पड़ा हुआ था.
कारण यह था, की इस एयरपोर्ट के विकास से पर्यावरण को खतरा हो सकता था. पता नहीं, यह कैसा लॉजिक है, जो एनवायरनमेंट की प्रोटेक्शन को नेशनल प्रोटेक्शन से ज्यादा इम्पोर्टेंस देता है.
आप ही बताएं, यदि इंडियन ओसेन ही हमारे पास नहीं रहा, तो हम किस पर्यावरण की रक्षा करेंगे??
वैसे इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, पिछले सत्तर सालों में पर्यावरण को बहाना बनाकर देश की सिक्योरिटी को कमजोर और डेवलपमेंट को रोकने का हर कुटिल प्रयास होते हम सभी ने कई बार देखा है.
चीन ने तो साउथ चाइना सी के बीचो बीच कई आर्टिफीसियल आइलैंड बना दिए, तब किसी पर्यावरण वादी ने चु तक नहीं की. तो पर्यावरण का पाठ अकेले भारत को ही क्यों पढ़ाया जाता है.
इसलिए अब भारत सर्कार ने चीन से सीखते हुए, Agatti एयरपोर्ट के चारो और आर्टिफीसियल आइलैंड को विस्तार देने का निर्णय लिया है, और जल्द इस हवाई पट्टी को ऐसा कर दिया जायेगा, की बिना किसी टेंशन से भारत का हर जहाज यहाँ पर उतर सकेगा, और उड़ान भी भर सकेगा.
इसीलिए जहाँ तक हम समझ सकते हैं, पर्यावरण की रक्षा होती रहेगी बाद में, पहले भारत का मजबूत एयरफोर्स स्टेशन बनना चाहिए, Agatti एयरपोर्ट पर. ताकि उस और के पुरे हिन्द महासागर और अरब सागर पर भारत dominate कर सके.
हम सभी को पता है, चाइनीस ड्रैगन पुरे के पुरे साउथ चाइना सी को निगल चूका है, और अब रिसर्च और मछलियां पकड़ने के बहाने उसने हिन्द महासागर में घुसना भी चालू कर दिया है.
इसलिए हमारे पास अब सोने का समय बिलकुल भी नहीं है. इंटरनेशनल कानूनों का भारत पूरा पालन करेगा, लेकिन पूरी दुनिया कान खोलकर सुन ले, की यदि इंडियन ओसेन में इंटरनेशनल फ्रीडम ऑफ़ नेविगेशन को रोकने की किसी ने कोसिस करि, तो भारत अब खड़ा खड़ा तमाशा नहीं देखेगा.
पूरा का पूरा हिन्द महासागर हमारा है, इस छेत्र के देशो को इंटरनेशनल कानूनों के अनुसार जो हक़ है, वह उसका जमकर जायज लाभ उठाये, लेकिन कानून तोड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी.
बात साफ़ है, जब हम शक्तिशाली होंगे तभी हम इंटरनेशनल कानूनों का हिन्द महासागर में सभी देशो से पालन करवा पाएंगे.
यदि हम कमजोर और दीन हीं बने रहे, तो एक न एक दीन हिन्द महासागर में भी चीन के आर्टिफीसियल आइलैंड बन जायेंगे.
इसी बीच आपको लग सकता है, की हम फालतू में डर पैदा कर रहे हैं.
लेकिन यदि आप हल्का सा गूगल सर्च करें, तो आप पाएंगे, की पिछले सप्ताह पाकिस्तान के एयरफोर्स चीफ ने श्री लंका की यात्रा करि. और श्री लंकाँ एयरफोर्स को मदद करने का प्रस्ताव पेस कर दिया.
चीन के श्री लंका के ऊपर प्रभाव के बारे में आप सभी को पता है. इसलिए साफ़ तौर पर राजपक्षे सर्कार कितनी ही मीठी मीठी बातें कर ले, फिर भी इंडिया के खिलाफ चीन श्री लंका और पाकिस्तान का अलायन्स तो उभर रहा ही है.
यह अलायन्स भारत को जब नुकसान पहुचायेगा, तब पहुचायेगा ही, लेकिन हाल फिलहाल श्री लंका पाकिस्तान और चीन के साथ रोमांस बढ़ाकर भारत को ब्लैकमेल करने की पूरी कोसिस तो कर ही रहा है.
अभी कल ही श्री लंका के प्रधान मंत्री भारत में बातें दे रहे थे, की यदि भारत उन्हें कर्ज की अदायगी में राहत दे दे, तो वह फिर चीन जैसे अन्य देश से भी रिक्वेस्ट कर सकते हैं.
बात साफ़ है, चीन पाकिस्तान का डर दिखाकर किसी को भी भारत से अपना काम निकालने नहीं दिया जायेगा. श्री लंका को जरूरत से अधिक मदद करने से अच्छा है, की भारत उस पैसे का इस्तेमाल अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए करे.
इसलिए आपको समझ आ गया होगा, की अगत्ती एयरपोर्ट पर छमताओं का विकास कितना महत्वपूर्ण है.
अगत्ती एयरपोर्ट के बारे में रिसर्च करते हुए, आज हमारे मन में सवाल आया, की आखिर कैसे लक्षद्वीप पर भारत का अधिकार स्थापित हुआ.
जैसे ही भारत आजाद हुआ, सरदार पटेल को अंदाज़ा लग गया, की पाकिस्तान मुस्लिम मेजोरिटी वाले लक्षद्वीप को कब्जे में ले सकता है.
फिर क्या था, उन्होंने केरला के मुदलियार ब्रदर्स को अर्जेन्ट संदेसा भिजवाया, और उनसे कहा, के कलेक्टर को बोले की जल्द से जल्द Indian पुलिस को लक्षद्वीप पर भेजें.
पुलिस के पास हथियार न हो, तो भी बहाना नहीं बनाना है, लाठी के साथ पुलिस को भेंजे, लेकिन जल्द से जल्द वहां पर तिरंगा फहरना जरूरी है.
फिर क्या था, इधर सरदार पटेल का सन्देश गया, उधर हमारा तिरंगा लक्षद्वीप के आसमान में लहराने लगा. कुछ ही देर में पाकिस्तान के जहाज भी आ गए, लेकिन तिरंगे को दूर से देखकर उनके दांत खट्टे हो गए.
उन्हें क्या पता था, की लाठियों के साथ आयी भारतीय पुलिस ने तिरंगा फहराया था, कब्जे करने की कोसिस में कहीं भारतीय सेना से लड़ाई में जान के लाले ना पड़ जाये, इसी डर से कायर पाकिस्तानी जहाज जिस रास्ते से आये थे, हताश होकर उसी रास्ते से वापस लौट गए.
लड़के दुश्मन को सब हराते हैं, लेकिन असली चाणक्य वह होता है, जो दुश्मन की लड़ने की हिम्मत को ही हरा देता है.
दुश्मन कदम उठाये इससे पहले ही सरदार पटेल ने उसकी चाल भांप ली थी. परिणाम हमारे सामने है, आज 36 के 36 द्वीपों के साथ लक्षद्वीप भारत का अभिन्न हिंसा है.
उस समय यदि पटेल साहब ना होते, तो आप जस्ट इमेजिन करिये, की केरला के सामने पाकिस्तान होता, और पुरे के पुरे अरब सागर पर पाकिस्तान का प्रभाव कितना अधिक बढ़ जाता.
बात साफ़ है, अगर सरदार पटेल ना होते, तो 72 सालों का इतिहास कुछ और ही होता.
लेकिन यह आज भी आप पर निर्भर करता है, की लक्षद्वीप भारत का हिस्सा कैसे बना, इसे आप नेहरू की किस्मत का चमत्कार माने, अथवा सरदार पटेल की सूझ बूझ का परिणाम.
नेहरू नाम की माला जपने वाले डिग्री धारियों के पेट में कितने ही पाकिस्तानी और चाइनीस चूहे दौड़ते रहे, हमारा तो साफ़ तौर पर मानना है, की हम सरदार पटेल की याद में एक नहीं 1000 स्टेचू ऑफ़ यूनिटी भी बना दें, तो भी हम उस महा मानव की महानता को भौतिक आकार नहीं दे पाएंगे.
हमारी तो यही अपेक्षा है, की मोदी सर्कार अगत्ती एयरपोर्ट का नाम सरदार पटेल के नाम पर रखे. अगर आप इस सुझाव से सहमत है, तो इस वीडियो को लाइक जरूर कीजियेगा. ताकि सभी को पता चले, की आप में से कितने दर्शक इस सकारात्मक सुझाव के साथ हैं.
अंत में आदर के साथ सरदार पटेल को चरण स्पर्श करते हुए, हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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