Turkish President's Pakistan Visit - Why it Fully Failed??
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https://www.al-monitor.com/pulse/originals/2020/02/turkey-syria-russia-idlib-escalation-unintended-consequences.html
https://www.hurriyetdailynews.com/us-says-it-supports-turkeys-legitimate-interests-in-idlib-152020
https://www.dawn.com/news/1534372/pakistan-turkey-sign-two-mous
https://www.middleeastmonitor.com/20200214-saudi-arabia-accuses-turkey-of-supporting-extremist-militias-in-three-arab-countries/
https://www.dawn.com/news/1534429/no-difference-between-gallipoli-and-occupied-kashmir-erdogan-stands-by-pakistan-in-parliament-speech
https://www.dawn.com/news/1534372
जैसा की आपको पता है, अभी जबकि सीरिया में टर्की ने आफत अपने सर पर ले ली है, टर्की के राष्ट्रपति दो दिनों की पाकिस्तान यात्रा पर कल आ गए.
अपेक्षा के अनुसार पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने ड्राइवर बनकर टर्की के राष्ट्रपति का स्वागत किया, अब तो सायद ऐसा लगता है, की जल्द ही यह पाकिस्तान का ऑफिसियल प्रोटोकॉल बन जायेगा, की विदेशो से आये खास मेहमानो के लिए ड्राइवर का काम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को दिया जाना चाहिए.
एनीवे मुद्दे की बात यह है, की आज टर्की के राष्ट्रपति ने रिकॉर्ड चौथी बार पाकिस्तान की पार्लियामेंट के जॉइंट सेशन को सम्बोधित किया.
टर्की के राष्ट्रपति ने कहा, की दोनों देशो के बीच की दोस्ती स्वार्थ पर नहीं, बल्कि प्यार पर टिकी हुई है.
हमें इतिहास में बहुत पीछे जाने की जरूरत नहीं है, पिछले साल दिसंबर महीने में पूरी दुनिया ने पाकिस्तानी प्यार की नुमाइश देखि है, जब लास्ट मोमेंट पर टर्की और मलेसिया को धोका देते हुए, पाकिस्तान कुआलालम्पुर समिट से पीछे हट गया.
लेकिन उस समय टर्की के इन्ही राष्ट्रपति ने कहा था, की सऊदी अरब से धमकिया खाने के बाद, पाकिस्तान के पाँव कांपने लगे. इसलिए टर्की के राष्ट्रपति को तय कर लेना चाहिए, की दिसंबर महीने में उन्होंने जो कहा था, वह सही है, या आज वह जो बातें कह रहे हैं, वह सच है.
एनीवे हमें कोई उम्मीद भी नहीं है, की टर्की के राष्ट्रपति पाकिस्तान में आकर अचानक से सत्यवादी राजा हरिस्चन्द्र बन जायेगे..
यह बात और है, की पाकिस्तान में किसी की हिम्मत नहीं है, की टर्की के राष्ट्रपति से यह तक पूछ सके, की सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कौन सी धमकी कब दी, यह आपको पता कैसे चला?
आगे बढ़ते हुए, टर्की के राष्ट्रपति ने FATF में पाकिस्तान का सपोर्ट करते रहने का वचन दोहराया है, पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट जाकर कालिया होगा, या वाइट लिस्ट में लौटकर गोरा हो जायेगा, इसका निर्णय कुछ ही दिनों में हो जायेगा.
पाकिस्तान में लाख बुराइयां भले ही हो, लेकिन एक बात तो है, की उसने ऐसे पक्के दोस्त भी खड़े किये हैं, जो हर बार डूबते पाकिस्तान के लिए तिनके का सहारा बन जाते हैं.
सायद यही कारण था, आज अपने भाषण में टर्की के राष्ट्रपति ने पिछले 100 वर्षो के इतिहास की चर्चा करि, और उस हर एक घटना के बारे में जिक्र किया, जब ब्रिटिश इंडिया और पाकिस्तान के लोगों ने टर्की की मदद करि.
जब टर्की के राष्ट्रपति यह धर्म पर आधारित दोस्ती की बात कर रहे थे, तो एक छोटा सा सवाल यह था, की सीरिया और टर्की के धर्म में क्या अंतर है?
इसी बीच कश्मीर मुद्दे पर टर्की के राष्ट्रपति ने बताया, की कश्मीर का मसला जितना पाकिस्तान के दिल के करीब है, उतना ही वह टर्की के दिल के पास है. इसलिए कश्मीर के मुद्दे पर टर्की ने पहले की तरह आगे भी पाकिस्तान का सपोर्ट करने की बात दोहरा दी.
टर्की कश्मीर मुद्दे पर कोई भी बात करता रहे, लेकिन अच्छा होगा, की वह अभी सीरिया में अपनी 12 ऑब्जरवेशन पोस्ट को बचाने पर पूरा ध्यान और शक्ति केंद्रित करे.
इसी बीच जब पाकिस्तान के भोले दिल को खुस करने वाली बातें टर्की के राष्ट्रपति कर रहे थे, हमारे मन में एक सवाल खड़ा हुआ, की पाकिस्तान और टर्की के बीच आखिर किन किन एग्रीमेंट पर साइन हुए.
बताया तो जा रहा है, की इंफ्रास्ट्रक्चर और इन्वेस्टमेंट को लेकर कई एग्रीमेंट किये जायेंगे. लेकिन अभी तक ऐसा ही पता चल पाया है, की आपसी व्यापर को बढ़ाने के लिए दोनों देशो के बीच दो मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर सहमति बनी है.
देखते हैं, कल तक टर्की के राष्ट्रपति किस और बड़े एग्रीमेंट पर साइन करते हैं, लेकिन यह भी हो सकता है, की टर्की के राष्ट्रपति के पाकिस्तान से चले जाने के बाद, अज्ञात सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें सामने आने लगे, की टर्की ने आसमान से चाँद तोड़कर लाने का वादा पाकिस्तान के साथ कर दिया है.
पाकिस्तान और टर्की के बीच हुए एग्रीमेंट को लेकर हमें अभी थोड़े समय तक इंतजार करना चाहिए, लेकिन अभी तक तो जो जानकारी निकल कर सामने आ रही है, उससे तो यही समझ आ रहा है, की पाकिस्तान ने खोदा पहाड़ और निकली चुहिया.
वैसे टर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की संसद में क्या कहा, इसका कम से कम भारत पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, टर्की अचानक से भारत का दोस्त बन जायेगा, ऐसी गलत फहमी हमें भी नहीं है.
आगे बढ़ते हुए बात करते हैं, सीरिया के संग्राम की. जहाँ टर्की को दिन में तारे दिखाई देने लगे हैं.
जबकि टर्की को समझ नहीं आ रहा है, की अब क्या होगा, अमेरिका की तरफ से टर्की के समर्थन में आवाजे सुनाई देने लगी है.
लेकिन बड़ी बात यह है, की जब लड़ाई जमीं पर चल रही है, तब अमेरिका डिप्लोमेसी के इस्तेमाल की बात कर रहा है. इसलिए देखना होगा, अमेरिका बातों से कब तक टर्की को मजबूत करता रहेगा.
इसी बीच टर्की के विरोध में आवाजे आने लगी सऊदी अरब से, चाहे सीरिया हो, लीबिया हो या सोमालिया हो, हर जगह टर्की के हस्तक्चेप का सऊदी अरब के राज्य विदेश मंत्री ने जमकर विरोध किया है.
अभी कुछ दिनों पहले तक ऐसी बाते आ रही थी, की टर्की रूस की तरफ से ट्रोजन हॉर्स बनकर नेटो को नस्ट कर देगा. लेकिन टर्की ने यह अनुमान लगाकर गलती कर दी, की उसने 2.5 बिलियन डॉलर में S400 को नहीं बल्कि सीधा राष्ट्रपति पुतिन को खरीद लिया है.
सीरिया की सिविल वॉर पिछले 9 सालों से चल रही है, यदि प्रेजिडेंट पुतिन न होते, तो सीरियन सर्कार का पतन कबका हो चूका होता.
इसलिए जो लोग आज यह सोचते हैं, की टर्की प्रेजिडेंट पुतिन के पांव के नीचे से जमीं किसका सकता है, अच्छा होगा, की वह USSR का नहीं, बल्कि राष्ट्रपति पुतिन ने जिस इतिहास का निर्माण किया है, उसे पढ़ ले.
लेकिन अभी जबकि सीरिया के संग्राम में कुछ भी हो सकता है, एक बात तो तय सी जान पड़ती है, की किसी भी हालत में इस लड़ाई में प्रेजिडेंट पुतिन की पराजय होती तो दिखाई नहीं दे रही है.
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