Great Job Modi ji - First India Armenia Defense Deal


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Reference
https://www.aninews.in/news/national/general-news/india-beats-russia-poland-to-bag-40-million-defence-deal-in-europe20200301162402/
https://www.ndtv.com/india-news/external-affairs-minister-s-jaishankar-meets-us-house-speaker-nancy-pelosi-in-munich-2180677


इस वीडियो की शुरुआत में हम अपने Silver मेंबर्स प्रबीर कुमार, साधु बाबा और समरजीत पटनायक को धन्यवाद देना चाहते हैं, आपके सहयोग और प्रोत्साहन के कारण ही हम इस चैनल को चालू रख पा रहे हैं.


आप सभी को पता है, टर्की भारत को अपना दुश्मन मानता है, और कश्मीर हो या भारत का कोई भी अन्य इंटरनल मसला हो, टर्की अपनी टांग अड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ता है.

हमने टर्की के द्वारा किये गए आर्मेनियन नरसंहार को इतिहास में जगह नहीं दी, तभी तो आज टर्की के राष्ट्रपति भारत को दिल्ली के ऊपर ज्ञान बांटने की जुर्रत कर लेते हैं.


हमेशा की तरह जब जब टर्की भारत विरोधी स्टेटमेंट जारी करता था, भारत उसके खिलाफ स्टेटमेंट जारी करके औपचारिकता निभा देता था.

लेकिन जमीनी सच्चाई यह है, की टर्की पाकिस्तान को हथियार बेचता है, और यह डर हमारे सामने खड़ा हुआ है, की एक न एक दिन टर्किश सैनिक इंडियन बॉर्डर पर तैनात ना हो जाये.

इसलिए सवाल उठता था, की आखिर कब तक हम टर्की और पाकिस्तान के गठजोड़ का जवाब स्टेटमेंट जारी करके देते रहेंगे.

दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, इसी कहावत पर चलते हुए, जब पिछले साल UN जनरल Assembly में टर्की ने पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर का मुद्दा उठाया, तो मोदी जी ने टर्की के दुश्मन अर्मेनिआ के प्रधान मंत्री और सायप्रस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात करि.

दोस्त ग्रीस को भी भारत समर्थन देता आया है, इस प्रकार ग्रीस सायप्रस और अर्मेनिआ के साथ मिलकर भारत टर्की को उसी की खुराक खिला रहा है. इसलिए टर्की के पास अब तिलमिलाने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है.

आप को अच्छे से ध्यान होगा, अभी कुछ ही दिनों पहले म्युनिक सिक्योरिटी Conference में भारतीय विदेश मंत्री ने अर्मेनिआ के फॉरेन मिनिस्टर से मिलकर टर्की की सबसे कमजोर नस दबा दी थी.

आपको पता है, एक तरफ सीरिया में और दूसरी तरफ लीबिया में रूस से टर्की जबरदस्त मार खा रहा है, तो भारत भी टर्की पर दवाब बढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है.

इसी दिशा में एक बहुत लम्बी छलांग लगाते हुए, भारत ने पहली बार अर्मेनिआ को 40 मिलियन डॉलर की कीमत पर राडार बेचने की डील जीत ली है.

इस डील को लेकर भारत का कम्पटीशन था, रूस और पोलैंड के साथ. और अर्मेनिआ ने इन दोनों देशो के राडार को भी टेस्ट किया था, वह भी बहुत अच्छे थे. लेकिन अंत में अर्मेनिआ ने मेड इन इंडिया विस्वस्नीय स्वाति वेपन लोकेटिंग रेडार को खरीदने का निर्णय लिया.

इस डील के होने की खबर तब सामने आयी है, जब भारत ने इन चार रेडार को सप्लाई करना भी चालू कर दिया है, इससे साफ़ हो जाता है, की इस डील को बहार तभी लाया जा रहा है, जब सब कुछ फुल एंड फाइनल हो चूका है.

स्वाति रडार 50 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के द्वारा मोर्टार्स, शेल्स और रॉकेट्स के द्वारा किये जा रहे अटैक के सोर्स का फ़ास्ट एंड आटोमेटिक तरीके से  पता लगाने में सक्छम है.

कहने की जरूरत नहीं है, यह रडार सस्ते भी हैं, और इंडियन आर्मी भी इनका इस्तेमाल LOC पर कर रही है.

आप सभी को पता है, अभी हर साल भारत 17 हज़ार करोड़ के हथियार निर्यात करता हैं, और मोदी सर्कार ने वर्ष 2024 तक सालाना 35 हज़ार करोड़ के हथियारों के एक्सपोर्ट का लक्ष्य अपने सामने रखा है.

इसलिए अर्मेनिआ के साथ हुई इस डील को उसी दिशा में उठाया गया कदम है.

अब आप कह सकते हैं, 40 मिलियन डॉलर की डील बहुत छोटी है, लेकिन बड़ी बात यह है, की यह शुरुआत है.  वैसे भी कांटा कितना ही छोटा क्यों न हो, चुभता जरूर है.

और अगर पूछना ही है, तो इस डील का दर्द टर्की से पूछिए.

जहाँ तक डील की साइज का सवाल है, यह इस पर भी depend करता है, की अर्मेनिआ का बजट और जरूरत कितनी है. इसलिए यहाँ पर इम्पोर्टेंस है, एक नए रिलेशनशिप की, जो स्थापित हो गया है, अब इस सम्बन्ध को सजाने और सवारने की जरूरत है.

पिछले महीने ही टर्की के राष्ट्रपति पाकिस्तान आये थे, और वह पाकिस्तानी पार्लियामेंट के जॉइंट सेशन को चार बार एड्रेस करने वाले पहले विदेशी नेता बन गए.

चीन के बाद टर्की पाकिस्तान के लिए दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस इक्विपमेंट सप्लायर है. इसलिए भारत के साथ पाकिस्तान की दुश्मनी के कारण टर्की बहुत मलाई उड़ा रहा है. यही कारण है, वह भारत के खिलाफ हर मौके पर जहर उगलता है.इसलिए जब भारत अर्मेनिआ को हथियार बेच रहा है, तो किसी के पेट में चुलबुली नहीं उठना चाहिए.

इसी बीच आप का सुझाव हो सकता है, की भारत ने ब्रह्मोस भी अर्मेनिआ को बेचना चाहिए, हम इसका समर्थन करते हैं, लेकिन बड़ी बात यहाँ पर है, की अर्मेनिआ कब ब्रह्मोस खरीदने का मन बनाता है. जब भी कभी अर्मेनिआ के पास बजट हो, भारत को ब्रह्मोस बेचने की कोसिस aggressively करनी चाहिए.

आप सभी की तरह, हम यहाँ पर किसी को भी फ्री में हथियार बांटने के पक्ष में नहीं है.इसलिए ब्रह्मोस को बेचने के लिए हमें इंतजार करना चाहिए.

मुद्दे की बात यह है, की यह स्वाभिमानी और आक्रामक भारत है, जो हर गेंद पर छक्का मारने के लिए तैयार है.

लेकिन यही कारण है, की भारत की पाकिस्तानी मीडिया मोदी से नफरत करती है. भारत अर्मेनिआ को हथियार बेचने लगा, तो उन्हें जरूर विश्व शांति को खतरा नजर आने लगेगा.

जब यही टर्की भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार बेचता है, तो यह आँखों पर पट्टी बांध कर मुँह में दही जमा लेते हैं, लेकिन अब जब भारत ने अर्मेनिआ को रडार बेच दिए, तो इन्हे भारत में डेमोक्रेसी और सेकुलरिज्म खतरे में तो नजर आएगा ही.

कहने वाले कुछ भी कहते रहें,हम सभी तो अर्मेनिआ को रडार सेल का स्वागत करते  है, और उम्मीद करते हैं, की भारत और अर्मेनिआ की दोस्ती और भी घनिष्ठ होती रहेगी.

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