Master Strategy of Modi ji - India to become Mobile Factory of The world


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Reference
https://www.thehindubusinessline.com/economy/emc-20-scheme-will-help-india-become-mobile-manufacturing-hub/article31128745.ece
https://www.republicworld.com/india-news/politics/ravi-shankar-prasad-announces-new-schemes-to-boost-manufacturing-in-in.html
https://www.thehindu.com/business/Industry/cabinet-approves-production-linked-incentives-for-electronics-manufacturing-firms/article31129195.ece
https://www.hindustantimes.com/india-news/govt-announces-incentive-for-electronics-to-make-india-a-manufacturing-hub/story-qJiyRwWkrKe53iDungA8wN.html

https://www.business-standard.com/article/economy-policy/centre-nod-to-incentive-scheme-of-rs-40-995-cr-for-electronics-firms-120032200057_1.html



दुनिया में दो तरह के लीडर्स होते हैं, पहले वह जो आपदा में भी राजनीती का रायता फैलाते हैं, और दूसरे वह जो आपदा में भी अवसर की तलाश में रहते हैं. आज का यह वीडियो देख कर आप स्वयं तय कीजिये, की मोदी जी किस तरह के लीडर हैं.

पिछले 20 सालों में हज़ारों बार हमने एक्सपर्ट लोगों को कहते सुना है, की भारत ने अपने मार्किट को दुनिया के के लिए खोल देना चाहिए.  ताकि हमारे यहाँ की कंपनियां ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धा में सफलता प्राप्त कर सकें.

लेकिन हमारा अनुभव बताता है, की जब ये एक्सपर्ट दुनिया की बात कर रहे थे, एक्चुअली ये चीन की तरफ से भारतीय पिच पर बैटिंग कर रहे थे.

पहले भारत ने ग्लोबलाइजेशन को स्वीकार कर लेना चाहिए, और फिर बाद में ग्लोबल कम्पटीशन जादुई तरीके से भारतीय कंपनियों को दुनिया में अव्वल बना देगा, और भारत मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बन जायेगा.

तब की भारत सरकारों ने एक्सपर्ट लोगों के द्वारा पढाये इस पाठ को पढ़ भी लिया, लेकिन परिणाम आज हमारे सामने है, चीन दुनिया के फैक्ट्री बन गया, और चीन से आये माल की बाढ़ में इंडियन मैन्युफैक्चरिंग डूब गयी.

भारत में माल का उत्पादन करने वाले इंडस्ट्रियलिस्ट कब चाइनीस माल को बेचने वाले इम्पॉर्टिंग मर्चेंट बन गए, यह सब हमने अपनी आँखों के सामने होते देखा है.

हमने ग्लोबल माल के लिए भारत के दरवाजे खोल दिए, लेकिन उसी माल को बनाने वाली ग्लोबल manufacturing कंपनियों का स्वागत करना हम भूल गए.

आप सभी कब से कहते चले आ रहे थे, की भाई, भारत के बाजार को दुनिया के लिए खोल दो, कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पहले अपने यहाँ इंडस्ट्री को पनपने, फलने और फूलने के लिए विशेष सुविधा दो.

पहले हम तैरना तो शीख लें, फिर हमें समुद्र में फेंका जाये. लेकिन तब की so called स्मार्ट secular और इंटेलीजेंट सरकारों ने यह समझ लिया था, की समुद्र में फेंक देने से इंडियन इंडस्ट्री अपने आप तैरना सीख जाएगी.

आज जो लोग बेरोजगारी और गरीबी का दिन रात रोना रोते रहते हैं, मोदी को तो आप गलियां देते ही रहते हैं, लेकिन हमारे बाजार और घर मेड इन चाइना माल से भर गए, इसका जिम्मेदार कौन है?? किसने इंडियन एलीफैंट को चाइनीस ड्रैगन के साथ नचाने के सपने देखे थे. आज से 10 साल पहले यह क्यों नहीं कहा गया, की इंडिया एलीफैंट नहीं लायन है, वह चाइनीस ड्रैगन के सामने शिकार करके दिखायेगा.

यह था बैकग्राउंड, लेकिन आपको यह बातें लग रही होंगी, लेकिन अब आप आंकड़े देखिये, दुनिया में जितना भी मोबाइल फ़ोन्स का एक्सपोर्ट होता है, उसमे 85 % मार्किट शेयर दो देशो चीन और वियतनाम ने दबा रखा है. और ग्लोबल मोबाइल Phone एक्सपोर्ट में भारत की हिसेदारी महज 0.5% है.

लेकिन यदि हम कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग के लेवल पर देखें, दुनिया भर में बिकने वाले फ़ोन्स में लगे 95% कॉम्पोनेन्ट मेड इन चाइना होते हैं.

इसलिए जो बात आप सभी को पहले से पता थी, वही बात आंकड़े भी बताते हैं.

अब आप कह सकते हैं, की यदि चीज़े गलत थी, तो उन्हें पिछले छह सालों में सुधारा क्यों नहीं गया, तो आपके लिए भी हमारे पास डेटा पॉइंट हैं,  वर्ष 2014 में भारत में 3 बिलियन डॉलर का मोबाइल फ़ोन प्रोडक्शन होता था, जो पिछले साल बढ़कर 24 बिलियन डॉलर हो गया, और आज हमारी घरेलु मोबाइल की डिमांड को घरेलु प्रोडक्शन के द्वारा पूरा किया जा रहा है.

लेकिन बड़ा ही वाजिव सवाल यह है, की भारत में मोबाइल फ़ोन्स की मुख्य तौर पर असेंबली हो रही है, अभी भी कॉम्पोनेन्ट लेवल पर चीन का दबदबा पूरी तरह से बरक़रार है.

इसलिए कल भारत सर्कार ने तीन नई स्कीम को अप्रूवल दिया है.

पहली है, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम. जिसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करने वाली विदेशी कंपनियों को अगले चार सालों के दौरान भारत में 1000 करोड़ का निवेश करना होगा, जिसके बदले उन्हें अगले पांच सालों तक टोटल प्रोडक्शन की सेल के ऊपर 6 से 4 % का इंसेंटिव दिया जायेगा.

इस स्कीम के लिए 41 हज़ार करोड़ के बजट का एलोकेशन भी किया गया है. बात साफ़ है, इस स्कीम के दमपर विदेशी कंपनियां भारत में जितना अधिक उतपादन करेंगी, उन्हें उतना ही अधिक लाभ होगा, क्योकि यह स्कीम प्रोडक्शन से जुड़ी हुई है.

दूसरी है, स्कीम for Promotion of Manufacturing of Electronics Components and सेमीकंडक्टर्स जिसके लिए अगले आठ सालों के लिए 3 हज़ार करोड़ से भी अधिक बजट allocate किया गया है.
इस स्कीम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर के research डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन के लिए सुविधा के विकास के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 25% का इंसेंटिव दिया जायेगा.

बेहद सरल शब्दों में , यदि सेमीकंडक्टर की फैक्ट्री लगाने में 100 रुपये खर्च होंगे, तो around 25 रुपये सर्कार से मिल सकते हैं.

तीसरी है,Electronics Manufacturing क्लस्टर्स स्कीम, जिसके लिए भी अगले आठ वर्षो के लिए साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपयों को अलॉट किया गया है. सरल शब्दों में, इस स्कीम के अंतर्गत कम से कम 200 एकड़ के एरिया में Electronics मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के विकास की प्रोजेक्ट कॉस्ट में 50% की फाइनेंसियल असिस्टेंस दी जाएगी.

इसलिए यदि अब आप इन तीनो स्कीम्स को कुल मिलाकर देखे, तो आप पाएंगे, की यह end to end इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के नए प्रोजेक्ट को लगाने में और चलाने में अगले पांच से आठ वर्षो के लिए मदद करेंगी.

एप्पल सैमसंग फॉक्सकॉन जैसी कंपनियां जिन्होंने अभी भारत में पाँव जमाये ही थे, मोदी सर्कार की यह तीन स्कीम्स ऐसी कंपनियों  को मेड इन इंडिया फॉर the वर्ल्ड के लिए सुविधाएँ मुहैया करवाएगी.

अब आप कह सकते हैं, की ऐसी स्कीम से तो केवल कंपनियों को लाभ होगा, लेकिन आप ही बताएं, की इन नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में काम कौन करेगा?? सरकारी अनुमान के मुताबिक, इन तीनो योजनाओं में 48 हज़ार करोड़ का निवेश करके 20 लाख रोजगार पैदा होंगे.

हम यहाँ पर साफ़ करना चाहते हैं, मोबाइल फ़ोन प्रोडक्शन के छेत्र में भारत को एक अग्रण्ड़ी देश बनाने वाली ये तीन स्कीम कितनी सफल होंगी, यह तो आने वाला समय ही बताएं. लेकिन एक बात तो तय है, कोसिस करने वालों की हार नहीं होती है.

अभी जबकि हम मेड इन चाइना महामारी  से भारत में लड़ रहे हैं, यह देखना अच्छा लगता है, की भारत सर्कार इस चाइनीस वायरस से तो लड़ ही रही है, साथ में गवर्नमेंट के अन्य अंग अपने अपने निर्धारित काम में भी लगे हैं.

यह होना भी नहीं चाहिए, की चीन की साजिस के मुताबिक पूरी की पूरी सर्कार शार्ट टर्म में कोरोना वायरस से लड़ते हुए, लॉन्ग टर्म स्ट्रेटेजी को भूल जाये.

हम इस वायरस को भी हराएंगे, और दुनिया में मोबाइल फ़ोन का प्रोडक्शन हब भी बनेगे. जहाँ तक जलने वालों का सवाल है, वह जलते रहेंगे, और चलने वाले चलते रहेंगे.

हमारे कुछ दर्शको इस टॉपिक पर वीडियो बनाने के लिए सजेशन दिया था, हम उन्हें धन्यवाद् देते हैं.

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