Well Done Mr Trump - New American Sanctions Target China & Pakistan



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Reference
https://eurasiantimes.com/is-russia-planning-to-deploy-troops-in-afghanistan-post-us-withdrawal/
https://www.reuters.com/article/us-healthcare-coronavirus-iran-usa/us-sanctions-iran-seeks-release-of-americans-amid-coronavirus-outbreak-idUSKBN2143EN

इस वीडियो को स्पोंसर करने के लिए हम विशाल कदम जी को धन्यवाद् देना चाहेंगे. आपके सहयोग के कारण ही हम यह वीडियो बना पाए हैं.

इस वीडियो की शुरुआत में हमें क्लैरिफिकेशन जारी करना होगा, पिछले एक  वीडियो में हमने बताया था, की अफ़ग़ानिस्तान के लिए प्रेजिडेंट पुतिन के दूत ने कहा है, की अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाने पर रूस अफ़ग़ान जमीं पर अपने सैनिक तैनात कर सकता है.

लेकिन अब रूस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है, इस तरह की खबरें सरासर गलत हैं, और अफ़ग़ानिस्तान में रसियन सैनिक तैनात करने की अभी कोई योजना नहीं है. लेकिन आतंकवाद नशीले पदार्थो के खिलाफ लड़ाई में रूस अफ़ग़ान सर्कार की मदद करता रहेगा, जैसा की अभी भी हो रहा है.

तब प्रेजिडेंट पुतिन के प्रतिनिधि झूठ बोल रहे थे, अथवा उनके सच को मीडिया ने गलत समझ लिया हो, दोनों ही स्थिति में जमीनी हालत तो बदल नहीं रही है. अफ़ग़ानिस्तान में आगे क्या होगा, इसकी भविस्यवाणी अभी करना तो मुश्किल है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है, की हम अफ़ग़ानिस्तान को लेकर हार मानकर बैठ जाएँ. इस खेल का मजा तो इसे खेलने में हैं.

मैन टॉपिक की बात करते हैं, अभी कुछ ही दिनों पहले ईरान ने दुनिया भर में ढिढोरा पीटा था, की अमेरिका के द्वारा लगे आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वह कोरोना वायरस से लड़ नहीं पा रहा है, और दुनिया ने ईरान की मदद करनी चाहिए.

जबकि humanitarian गुड्स और मेडिकल सप्लाई को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबन्ध कवर नहीं करते हैं. फिर भी ईरान की आवाज़ में आवाज़ मिलाते हुए चीन ने कहा था, की चाइनीस वायरस से लड़ने के लिए अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटा देना चाहिए.

लेकिन अमेरिका है, की पीछे हटने का नाम ही नहीं ले रहा है. और वर्ष 2018 से चल रही मैक्सिमम प्रेशर कैंपेन के अंतर्गत अमेरिका ने ईरान का गरीबी में आटा गीला करते हुए, और कड़े आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए हैं.

इस चरण में लगाए प्रतिबंधों के अंतर्गत अमेरिका ने साउथ अफ्रीका होन्ग कोंग और चीन की 9 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जो ईरानियन petrochemical  बिज़नेस में भाग ले रही थी.

अब आप स्वयं देख लीजिये, की एक और मक्कार चीन अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है, तो दूसरी और वही चीन अमेरिकन सैंक्शंस को तोड़ने का कोई मौका भी नहीं छोड़ रहा है.

साथ ही साथ अमेरिकन कॉमर्स डिपार्टमेंट ने ईरान की एक,UAE की पांच, चीन की दो और पाकिस्तान की 9 कम्पनियो पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया है, ताकि वह ईरान की कंपनियों के साथ उन आइटम्स का व्यापर ना कर पाएं, जिनका उपयोग परमाणु हथियारों में किया जा सकता है.

पाकिस्तान को जा रहा चीन का autoclave भारत ने पकड़ लिया, दुनिया में किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई, अब एक बार फिर ईरान के नुक्लेअर प्रोग्राम को मदद करते हुए चीन और पाकिस्तान दोनों रंगे हाथ पकड़े गए, फिर भी किसी के पेट का पानी नहीं हिल रहा है.

लेकिन आप स्वयं देख लीजियेगा, ये जो लोग आज चुप बैठे हुए हैं, वही बालाकोट स्ट्राइक के समय परमाणु युद्ध का आधारहीन डर फैला रहे थे.

एनीवे अमेरिका ने ईरान के ऊपर प्रतिबन्ध का सिकंजा और कसते हुए, चाइनीस वायरस से निपटने के लिए मदद का हाथ ईरान की तरफ आगे बड़ा दिया है.

साथ ही साथ अमेरिका के फॉरेन सेक्रेटरी ने ईरान से अपेक्षा करि है, की कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए, ईरान ने अपने जेलों में बंद अमेरिकियों को छोड़ देना चाहिए.

हलाकि ईरान इन अमेरिकी बंदियों को छोड़ने के ऊपर पहले से विचार कर रहा है, अब जबकि अमेरिका ने ईरान के ऊपर आर्थिक प्रतिबंधों का दवाब बड़ा दिया है, यह देखने वाली बात होगी,क्या ईरान अमेरिका के सामने झुक जायेगा.

अभी जबकि मानवता के सामने चाइनीस वायरस का संकट मुँह बाये खड़ा है, रूस और सऊदी अरबिया ने आयल प्राइस वॉर छेड़ दी है, ईरान ने सैंक्शन से निजाद पाने की कोसिस चालू कर दी, तो अमेरिका ने ईरान पर दवाब और बड़ा दिया है.  तो कश्मीर का पागल पाकिस्तान दुनिया से कर्ज माफ़ी के लिए रिक्वेस्ट कर रहा है.

वायरस को हराना तो छोड़िये, सब वायरस का लाभ उठाकर अपना अपना राजनैतिक और व्यापारिक हित साधने में लगे हैं. देश चाहे कोई भी हो, सर फिरे शासको के कारण सबसे अधिक सर दर्द आम आदमी के सर में ही हो रहा है.

अभी जबकि दुनिया का हर देश ग्लोबल वायरस से लोकल स्तर पर लड़ रहा है.पहले सार्क समिट और अब G20 समिट के जरिये मोदी जी कोसिस कर रहे हैं, की ग्लोबल समस्या से ग्लोबल स्तर पर निपटा जाये.

मोदी साहेब की यह पहल कितनी सफल होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन आज जबकि बड़े बड़े देशो के नेता कॉकरोचों की तरह भड़भड़ाते घूम रहे हैं, तब अकेला भारत दुनिया को आगे की राह बताने के लिए लीडरशिप की भूमिका में आ गया है.

यह बात और है, की हमारे देश में ही,सराहना करते हुए भारत सर्कार के काम में मदद करना तो छोड़िये, मोदी जी को गलियां देखर TRP बटोरी जा रही है.

वैसे जिस देश में क्लीन इंडिया मिशन तक की आलोचना की गयी, उस देश में मेड इन चाइना कोरोना वायरस पर भी राजनीती की जाये, तो कोई अचरज नहीं होना चाहिए.
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