Well Done Trump - US Massive Air Strike on Taliban
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Reference
https://www.brecorder.com/2020/03/04/576949/us-conduct-airstrike-on-taliban-in-helmand-afghanistan-hours-after-trump-mullah-35-minute-phone-call/
https://www.latimes.com/world-nation/story/2020-03-04/us-military-says-it-has-conducted-airstrike-against-taliban-forces-in-afghanistan-in-first-such-attack-since-peace-deal
https://www.newindianexpress.com/world/2020/mar/04/us-hits-taliban-with-air-strike-after-20-afghan-soldiers-cops-killed-in-attack-by-insurgents-2112090.html
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/us-hits-taliban-with-air-strike-military-spokesman/articleshow/74473857.cms
https://www.dawn.com/news/1538327/us-launches-airstrike-against-taliban-to-defend-afghan-forces
https://www.aljazeera.com/news/2020/03/pakistan-calls-kabul-abide-taliban-prisoner-swap-deal-200303094039082.html
https://www.dawn.com/news/1538082/ask-us-for-explanation-on-prisoner-swap-clause-in-taliban-deal-fm-qureshi-to-ghani
https://www.aljazeera.com/ajimpact/trump-administration-cut-number-employees-chinese-media-200302232945785.html
पिछले शनिवार की ही तो बात है, जब अफ़ग़ान पीस डील पर हस्ताक्षर हुए थे.
तभी से पाकिस्तान और तालिबान खुसी से झूम रहे थे, की उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान को जीत लिया.
जीतनी खुसी पाकिस्तानी मना रहे थे, उतना ही रोना हमारे भारतीय एक्सपर्ट रो रहे थे, की अफ़ग़ानिस्तान भारत के हाथ से निकल गया, अफ़ग़ानिस्तान में अब तेरा क्या होगा इंडिया.
लेकिन Geo पॉलिटिक्स में कभी भी निष्कर्ष पर पहुंचने में जल्दवाजी नहीं करनी चाहिए, क्योकि यह कभी ना ख़तम होने वाला खेल है, इसे तो कॉंफिडेंट होकर खेलना चाहिए, और ठीक यही कर रही थी, मोदी सर्कार, जिसने कभी भी लोकतान्त्रिक अफ़ग़ान सर्कार का साथ नहीं छोड़ा.
और आज तालिबान पर एयर स्ट्राइक लांच करके अमेरिका ने भी साफ़ कर दिया, की उसने भी अफ़ग़ान सर्कार को बीच मझदार में मरने के लिए नहीं छोड़ा है.
Hemland प्रान्त में ११ दिनों के बाद पहली एयर स्ट्राइक करके अमेरिका ने पाकिस्तानी तालिबान के कानो में पिघला लोहा डाल दिया. क्योकि इसी जगह पर कल ही कल में तालिबान ने 43 अटैक किये थे, तालिबान ने सायद यही गफलत पाल ली थी, की अफ़ग़ान सिक्योरिटी फोर्सेज पीटती रहेंगी, और अमेरिका तमासा देखता रहेगा.
यहाँ तक की तालिबान का भी कहना था, की अब उसकी लड़ाई विदेशी सेना से नहीं है, बल्कि अफ़ग़ान सर्कार से है.
जबकि इस बात की भविस्यवाणी कई दिनों से की जा रही है. कम से कम अब यह साफ़ हो जाना चाहिए, की अमेरिका अफ़ग़ान सर्कार का पतन नहीं होने देगा, Kabul will not be allowed to fall
लेकिन यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है, की कल ही तो प्रेजिडेंट ट्रम्प ने पहली बार तालिबान के पोलिटिकल चीफ से बात करि थी, और उन्होंने दुनिया को बताया था, की बहुत अच्छी बात हुई, उनके तालिबान के मुल्ला ब्रदर के साथ अच्छे रिलेशनशिप हैं, और तालिबान ने ट्रम्प को यह बताया है, की अब वह शांति चाहता है.
इसलिए जब तालिबान ट्रम्प की बातें सुनकर खुस हो रहा होगा, तभी आसमान से आग बरसने लगी.
हमें यहाँ पर हल्का सा डॉट्स को कनेक्ट करना होगा. अगर आप पीछे जाएँ, तो चाहे नार्थ कोरिया हो, चाहे चीन हो, प्रेजिडेंट ट्रम्प हमेसा जान बूझकर confusion क्रिएट करते हैं.
आप ही बताएं, नार्थ कोरिया और चीन के तानाशाहों के साथ भी ट्रम्प ने डील कर ली हैं, लेकिन क्या ट्रम्प ने इन दोनों देशो को कोई भी राहत दी आज तक?
हर बार प्रेजिडेंट ट्रम्प कहते हैं, की सी जिनपिंग और किम जॉन उन के साथ उनके बड़े अच्छे रिलेशनशिप हैं, लेकिन अमेरिका उन पर दवाब बढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ता है.
आज भी नार्थ कोरिया के ऊपर मैक्सिमम प्रेशर कैंपेन चालू है, और चीन के साथ ट्रेड डील हो जाने के बाद, कल ही अमेरिका ने चाइनीस मीडिया के अघिकारियों की संख्या को कम करने का आदेश जारी कर दिया.
अमेरिका चीन को वहां हिट कर रहा है, जहाँ सबसे ज्यादा दर्द होता है, आपको भी पता है, अमेरिका में चाइनीस मीडिया के पर कतरना कितनी बड़ी बात है, जवाब में चीन चिल्ला भी नहीं पा रहा है, वह सिर्फ यही कह रहा है, की अमेरिका ने जो किया गलत किया.
हम सिर्फ यह कहना चाह रहे हैं, की यह प्रेजिडेंट ओबामा का शाशन काल नहीं है, जहाँ अमेरिका चार साल पहले बता देता था, की किस तारिख को कितने अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौटेंगे.
प्रेजिडेंट ट्रम्प की रणनीति का यह मुख्या हिस्सा है, की दोस्त हो या दुश्मन, दोनों ही गेस करते रहे , की एक्चुअली में अमेरिका चाहता क्या है.
अब वापस अफ़ग़ानिस्तान पर लौटते हुए, अफ़ग़ान पीस डील हुई, लेकिन आपने नोटिस किया होगा, डील पर साइन होने के पहले स्पीच दी थी, अफ़ग़ान प्रेजिडेंट ने, उसी से साफ़ हो गया था, भले ही तालिबान अमेरिका को बहला फुसलाकर अफ़ग़ान सर्कार को Isolate करने की कोसिस कर रहा हो, अमेरिका यह करने के लिए तैयार नहीं है.
और यही तालिबान ने लगातार किया भारत के साथ, बार बार तालिबान की तरफ से स्टेटमेंट आये, की वह सब देशो के साथ अच्छे सम्बन्ध चाहता है, और भारत से उसे कोई विशेष दुश्मनी नहीं है.
हम सभी ने कई बार एक्सपर्ट लोगों को ज्ञान देते भी सुना, की अब भारत ने तालिबान से बातचीत चालू कर देनी चाहिए.
आप स्वयं देख लीजिये, तालिबान ने बिछाया था जाल, तो इंडियन एक्सपर्ट भारत को उसी जाल में फसने के लिए धक्का लगा रहे थे.
लेकिन आप सभी का साफ़ तौर पर मानना था, की भारत ने अपने दोस्तों को अफ़ग़ानिस्तान में किसी भी हालत में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए.
हार हो या जीत हो, सालों पुरानी ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, यही सन्देश था आपका. इसलिए आज अमेरिका की अफ़ग़ान एयर स्ट्राइक से साफ़ हो गया, की भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की बिसात पर सही मोहरे चले थे.
जहाँ तक आपका सुझाव है, की अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में हेमलैंड की जगह पाकिस्तान में क्वेटा पर एयर स्ट्राइक करनी चाहिए थी. यह बात सही है, क्योकि अफ़ग़ानिस्तान में सिर्फ बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, बीमारी की जड़ तो रावलपिंडी में हैं.
जब तक पेट के दर्द के लिए अमेरिका सर दर्द की दवाई खाता रहेगा, तब तक उसे राहत नहीं मिलेगी.
जहाँ तक पाकिस्तान का सवाल है, उसने भी अफ़ग़ान पीस डील से पल्ला झाड़ लिया है, उसका कहना है, डील के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान सर्कार ने तालिबानी बंदियों को रिहा नहीं किया, इसलिए तालिबान ने फायर खोल दिया.
लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने बंदियों को रिहा न करने की बात इसलिए कही थी, की पहले बातचीत और मोलभाव चालू करो, फिर बंदियों की रिहाई को लेकर वह निर्णय लेगी.
यदि तालिबान शांति के लिए रियलिटी में बेताब है, तो वह कम से कम एक बार बातचीत करके क्यों नहीं देख लेता.
जब एक पीस डील के लिए तालिबान अमेरिका से 2 साल तक बात चीत कर सकता है, तो अपने 5000 भाइयो की रिहाई के लिए तालिबान 2 दिन के लिए अफ़ग़ान सर्कार से बात क्यों नहीं कर सकता है?
अभी जबकि अफ़ग़ान पीस डील लावारिश नजर आ रही है, हमें जल्दवाजी में किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना है, जैसे जैसे खेल आगे बढ़ता है, हमें अपने मोहरे आगे बढ़ाने हैं.
जब पूरी दुनिया कह रही थी, की इंडिया अफ़ग़ानिस्तान हार गया, तब भी मोदी सर्कार ने हिम्मत हारकर संतुलन नहीं खोया, आप सभी ने देखा है, इसे कहते हैं, कॉन्फिडेंस और करेज का कॉम्बो, जब इंडियन फॉरेन सेक्रेटरी ने अफ़ग़ान पीस डील पर साइन होने से पहले अफ़ग़ान सर्कार के लीडर्स से मुलाक़ात की, और नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की डील भी फाइनल करि.
इसलिए जब आप सच के साथ हों, तब आपने संकोच न करते हुए, मजबूती से खड़ा होना होता है, और मोदी सर्कार ने ठीक बिलकुल ऐसा ही किया.
पीस डील की लॉलीपॉप चूसते हुए जो लोग आज तक अफ़ग़ानिस्तान में जीत का सपना देख कर उछल रहे थे, अमेरिकन एयर स्ट्राइक ने उड़ने के पहले ही उनके पर क़तर दिए हैं.
लेकिन पाकिस्तान तालिबान और एक्सपर्ट लोगों की तरह अभी भी हमें अफ़ग़ान शतरंज की बिशात पर से नजर नहीं हटानी है.
आइये देखते हैं, शांति के लिए अफ़ग़ानिस्तान को और कितना इंतजार करना पड़ता है.
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