India US Friendship Forever - China has NO Future in Indian Ocean


यदि आप हमें प्रोत्साहित और सपोर्ट करना चाहें, तो आप PayTM, Google Pay, Phone Pe नंबर - +917649046884 पर हमें डोनेट (any amount) कर सकते हैं. Thank You!!
If you want to support & encourage our creative work, please donate (any amount) on PayTM, Google Pay, Phone Pe number- +917649046884. Thank You!!
यदि आप हमें प्रोत्साहित और सपोर्ट करना चाहें, तो आप PayTM, Google Pay, Phone Pe नंबर - +917649046884 पर हमें डोनेट (any amount) कर सकते हैं. Thank You!!
If you want to support & encourage our creative work, please donate (any amount) on PayTM, Google Pay, Phone Pe number- +917649046884. Thank You!! Please join our membership & enjoy special perks. https://www.youtube.com/channel/UCo-l5eRAYHWjQtuhWsb3jEg/join You can support us by being our Patron. In addition, you can suggest interesting topics to us.On selected topics we will make special videos. Please click on below link to become our Patron. कृपया हमारे संरक्षक (Patron) बनकर हमें सपोर्ट कीजिये. साथ ही आप हमें टॉपिक्स सजेस्ट कर सकते हैं. चुनिंदा टॉपिक्स पर हम स्पेशल वीडियो बनायेगे. Patron बनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। https://www.patreon.com/Realquickinfo Please click on below link to join us on Facebook इस लिंक पर क्लिक करके, आप हमसे फेसबुक पर जुड़ सकते हैं. https://www.facebook.com/realquickinfo/ Please click on below link to join us on Twitter इस लिंक पर क्लिक करके, आप हमसे ट्विटर पर जुड़ सकते हैं. https://twitter.com/RealQuickInfo Note - The video was created in the Software and includes a link to https://www.movavi.com/ Congratulations, you are today's lucky winner.😊👊👊😊 Please watch today's video. real quick info latest,real quick info,real quick analysis,rqi latest,trending now in india,trending news in india,study iq latest video,study iq latest current affairs,real quick info hindi,

Reference
https://www.livemint.com/news/india/us-clears-sale-of-harpoon-missiles-torpedoes-worth-155-million-to-india-11586850126846.html
https://www.navyrecognition.com/index.php/news/defence-news/2019/december/7737-indian-navy-to-acquire-6-more-p-8i-maritime-aircraft.html
https://en.wikipedia.org/wiki/Boeing_P-8_Poseidon#India
https://www.business-standard.com/article/economy-policy/india-to-buy-harpoon-missiles-lightweight-torpedoes-from-us-for-155-mn-120041400147_1.html
https://en.wikipedia.org/wiki/Harpoon_(missile)
https://en.wikipedia.org/wiki/Mark_54_Lightweight_Torpedo
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/alarm-over-chinese-research-ships-in-indian-ocean-region/articleshow/73755293.cms

जैसा की आपको पता लग गया होगा, की अमेरिका ने हार्पून मिसाइल और torpedoes भारत को बेचने को लेकर कांग्रेस को नोटिफाई कर दिया है.



टोटल 155 मिलियन डॉलर की कीमत पर ये दोनों घातक हथियार खरीदे जा रहे हैं, इंडियन नेवी के मल्टी मिशन  Boeing P-8 I मेरीटाइम एयरक्राफ्ट के लिए.



भारत ने वर्ष 2009 और 2010 में ख़रीदे थे, १२ P-8 I  एयरक्राफ्ट और वर्ष 2019 में मोदी सर्कार ने 6 और P-8I एयरक्राफ्ट को अमेरिका से खरीदने का निर्णय लिया.



P-8I एयरक्राफ्ट को जाना जाता है, इसकी एंटी सबमरीन warfare और एंटी सरफेस warfare के लिए. लेकिन भारत ने ये एयरक्राफ्ट खरीद तो लिए थे, फिर भी इनके पास अभी तक  एंटी सबमरीन और एंटी सरफेस warfare की कपाबिलिटी नहीं थी.



अब हार्पून ब्लॉक two  एयर launched मिसाइल से लेस होने पर P-8I एयरक्राफ्ट एंटी सरफेस warfare में दक्ष हो जायेगा, सरल शब्दों में इसका मतलब है, अब यह एयरक्राफ्ट समुद्र में तैर रहे किसी भी जहाज पर हवा से अचूक निशाना लगा सकेगा.



साथ में बेहद हलके Mark 54 torpedoes से लेस होने पर P-8I एयरक्राफ्ट एंटी सबमरीन warfare में कुशल हो जायेगा, सिंपल शब्दों में, P-8I एयरक्राफ्ट अब हवा से समुद्र की गहराइयों में छुपी किसी भी परमाणु पनडुब्बी को हमेसा के लिए डुबो सकेगा.



ऐसा नहीं है, की ये दोनों हथियार भारत कोई पहली बार ले रहा है, ये दोनों ही हथियार इंडियन नेवी और इंडियन एयर फाॅर्स के पास पहले से हैं, लेकिन अब पहली बार ये दोनों हथियार नौसेना के P-8I एयरक्राफ्ट platform के लिए ख़रीदे जा रहे हैं.



इसलिए इन हथियारों को अकेले देखने के बजाये, हमें उस प्लेटफार्म को भी ध्यान में रखना होगा, जिन पर इन्हे लगाया जाना है.



जहाँ तक नौसेना के P-8I एयरक्राफ्ट का सवाल है, इसकी उपयोगिता को लेकर तो कोई सवाल है ही नहीं, क्योकि समुद्र में यह अपना कमाल भविस्य में दिखायेगा, लेकिन ढोकलाम विवाद में यह हवाईजहाज अपनी छमता को दिखा चूका है.



इसलिए अब जो 155 मिलियन डॉलर का खर्चा भारत करने जा रहा है, वह पैसे की बर्बादी नहीं है, बल्कि इस खर्चे के बाद हम 18  P-8I एयरक्राफ्ट को खरीदने  में किये गए कई बिलियन डॉलर धन के निवेश का पूरा लाभ उठा पायेगा.



अब बात उठती है, की भारत यह खर्चा कर क्यों रहा है, तो इसका जवाब सायद आपको पहले से मालूम होगा . चाइनीस जंगी जहाज, परमाणु पनडुब्बियां, और रिसर्च वेसल हिन्द महासागर में अपनी गतिबिधि तेजी से बढ़ाते जा रहे हैं.



अब आप कह सकते हैं, इंटरनेशनल वाटर में चीन कुछ भी कर सकता है, हमें इससे क्या लेना देना, लेकिन  इसी साल जनवरी में हमें पता चला था, की चीन रीसर्च के बहाने अंडमान के पास इंडिया के एक्सक्लूसिव इकनोमिक जोन में घुस आया था.



तब हमने उसे चुनौती देकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन तब आप सभी का कहना था, की हमने उसे मारकर डुबो देना चाहिए था , अब जब हमारे पास हार्पून मिसाइल होगी, तो इंडियन एक्सक्लूसिव इकॉनमिक जोन के पास से गुजरने पर  चीन की रूह कापेंगी.



India के पास है, मार्क 54 torpedoes है , इसलिए  चाइनीस पनडुब्बियों का भी हिन्द महासागर में स्वागत है.



अब आप कह सकते हैं, की मोदी साब फालतू में हमारा पैसा बर्बाद कर रहे हैं, अच्छा होता, की यह पैसा आम जनता की भलाई में लगाया जाता.



लेकिन सायद आपको जानकारी हो, वर्ष 2015 के बाद हर साल 600 चाइनीस बोट्स हिन्द महासागर में मछलियां पकड़ती पाई गयी है.



इसलिए चीन को आप भोला भालाऔर भारत का सच्चा दोस्त समझ सकते हैं, लेकिन हमें चाइनीस ड्रैगन के इरादे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे हैं. साउथ चाइना सी को बिना डकार के निगल जाने के बाद अब वह हिन्द महासागर पर अपनी लार टपका रहा है.



आप सभी को अच्छे से याद होगा, अभी कुछ ही दिनों पहले चीन ने वियतनाम की फिसिंग बोट को वियतनाम के ही पानी में टक्कर मारकर डुबो दिया था .



और जब दुनिया में हल्ला मचा तो चतुर चीन ने कह दिया, की वह तो एक्सीडेंट था, अब आप ही बताएं.  एक तरफ चीन एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का दम भरता है, तो दूसरी तरफ वह दूसरे देश के जहाजों में टक्कर दे रहा है.



आप ही बताएं, जब साउथ चाइना सी और ईस्ट चाइना सी चीन का हो सकता है, तो हिन्द महासागर हिंदुस्तान का क्यों नहीं हो सकता है??



इंडियन ओसेन में अंतरास्ट्रीय नियमो का पालन तभी तक होगा, जब तक भारत के पास नियमो का पालन करवाने की शक्ति होगी.



हिन्द महासागर छेत्र के देश अपने अपने Exclusive Economic Zone  में प्राकृतिक संसाधनों  का दोहन कर पाएं, और इंटरनेशनल वाटर में सभी की आवाजाही बनी रहे, यह सुनिश्चित करना ना तो फ्रांस की जिम्मेदारी है, और ना ही अमेरिका ब्रिटैन की.



यह जिम्मेदारी तो हमारे सामने कबकी खड़ी थी, अब हम केवल उसे निभा रहे हैं. यदि आज भी हम नोट गिनते रह गए, तो वह दिन दूर नहीं है, जब इंडियन ओसेन का नाम बदल कर चाइनीस ओसेन रखना पड़ जायेगा.



जहाँ तक अमेरिका का सवाल है, वह भारत की मदद करके कोई उपकार नहीं कर रहा है,  यदि भारत कमजोर हो गया, तो साउथ चाइना सी की तरह अमेरिका को हिन्द महासागर में भी फ्रीडम ऑफ़ नेविगेशन के ऑपरेशन करने की जरूरत आन पड़ेगी.



बात साफ़ है, फ्री एंड ओपन हिन्द महासागर हमारे सामने कोई विकल्प नहीं है, यह सुनिश्चित करना  हमारी मजबूरी है.

Tags
India China Latest News,India America Latest news,America India Latest news,India America latest news in Hindi,Modi latest news today,Modi latest news in Hindi

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मोदी योगी ने दी अमेरिकन मीडिया को करारी शिकस्त

Well Done President Trump - America Stops WHO Funding!!

How America indirectly HELPED in returning to Status Quo in between India and China?