Very Good News - America Europe Stopped buying Chinese Auto Parts
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Reference
https://www.scmp.com/economy/china-economy/article/3078213/coronavirus-chinas-car-part-makers-face-collapsing-ordersReference
https://www.forbes.com/sites/kenrapoza/2020/04/07/new-data-shows-us-companies-are-definitely-leaving-china/#7268581440fe
https://www.dailymail.co.uk/news/article-8188629/430-000-people-traveled-China-COVID-19-outbreak-appeared.html
https://www.businessinsider.in/science/news/5-million-people-left-wuhan-before-china-quarantined-the-city-to-contain-the-coronavirus-outbreak/articleshow/73677674.cms
बचपन में हम सभी को सिखाया गया है, जो दूसरों के लिए गड्डा खोदता है, वह ही सबसे पहले उस गड्डे में गिरता है.
लगता है, चीन के राजा को यह पाठ नहीं पढ़ाया गया. कोई बात नहीं, जो लोग समय पर ढंग की चीज़ नहीं सीखते हैं, उन्हे ढंग से फिर सिखाता भी समय ही है.
आपको सायद जानकारी हो, चीन सीधा दुनिया के मार्किट में अपनी कार्स बेचने में सफल नहीं हुआ है, लेकिन चीन ऑटोमोटिव सप्लाई चैन का एक प्रमुख हिस्सा है.
वर्ष 2018 में जर्मनी अमेरिका और जापान के बाद चीन दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कार पार्ट्स एक्सपोर्टर था. और वर्ष 2019 में चीन ने दुनिया भर में massive 53 बिलियन डॉलर के ऑटो पार्ट्स बेचे थे. और चीन से सबसे अधिक कार पार्ट्स ख़रीदे थे अमेरिका और यूरोप के देशो ने.
अब आप देखिये, की lockdown लगने के पहले 50 लाख लोगों ने वुहान सिटी को छोड़ दिया. इसी बीच 4 लाख 30 हज़ार लोगों ने अकेले चीन से अमेरिका की यात्रा की. इसलिए जब कोरोना वायरस के आँकड़े छुपाकर चीन अपनी इमेज चमकाने की कोसिस कर रहा था, तब दुनिया में अँधेरा कायम करने के लिए एक्चुअली में यह वायरस तेजी से फ़ैल रहा था.
यह तो हो गयी आंकड़ों की बात, लेकिन जब चीन ने इस वायरस पर जीत का प्रदर्शन करने के लिए अपनी फैक्ट्री खोलनी चालू की, तो उसे सच्चाई का पता चला, की जो गड्डा उसने दुनिया के लिए खोदा था, वह स्वयं उसमे गिर चूका है.
परिणाम यह हुआ, की फरबरी में फैक्ट्री खुलना तो चालू हो गयी, लेकिन मार्च महीने में जितने ऑर्डर्स नोर्मल्ली आते हैं, उनमे 70 से 80 फीसदी की गिरावट नोटिस की गयी.
जबकि अमेरिका और यूरोप में car असेंबली प्लांट पर ताला पड़ा हुआ है, तो यह स्वाभाविक है, की वह मार्च महीने के पहले प्लेस किये गए ऑर्डर्स का शिपमेंट रोकने के लिए रिक्वेस्ट चीन को भेजने लगे.
ये आर्डर ऑफिशियली कैंसिल नहीं हुए, लेकिन अमेरिकन और यूरोपियन खरीदारों ने पुराने ऑर्डर्स के लिए पैमेंट भी रोक दिया, और अब चाइनीस फैक्ट्री तो खुल गयी है, लेकिन उनके पास ना तो पैसा है, और ना ही आर्डर हैं.
ये चाइनीस ऑटो पार्ट्स suppliers पहले ही कुछ सालों से चल रही अमेरिका चाइना ट्रेड टेंशन की मार झेल रहे थे, अब जबकि नए आर्डर आना बंद हो गए हैं, और पुराने आर्डर का पेमेंट और शिपमेंट रुक गया है, उनको दिन में तारे दिखने लगे हैं.
जनवरी और फ़रवरी के महीने के बीच चीन में lockdown होने के कारण ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट में 13 फ़ीसदी की गिराबट आयी थी, लेकिन अब दुनिया भर में lockdown जैसे हालत हैं, बंदरगाह कार्गो शिप की जगह पर समुद्री हवा का स्वागत कर रहे हैं.
इसलिए स्वाभाविक है, की मार्च अप्रैल महीने में चीन के ऑटो पार्ट्स का एक्सपोर्ट पक्के से और गिरेगा.
यहाँ तक की चाइनीस फॉरेन ट्रेड की सीनियर अधिकारी ने भी स्वीकार किया है, की चाइनीस ऑटोमोटिव सप्लाई चैन में बैचनी पसरी हुई है.
अटल जी कहा करते थे, चिंगारी का खेल बुरा होता है, दुनिया में आग लगाकर अपनी रोटी सेंकने का सपना देखने बाला चीन आज अपनी ही घर में आग लगा चूका है.
लेकिन यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात है, की अभी बिनाशकारी आंकड़े सिर्फ चीन से आ रहे हैं, कोरोना महामारी ने हमारे देशो में कितनी बर्बादी की है, हमें जल्द ही ऐसे भयावह आंकड़े भी देखने को मलने वाले हैं. इसलिए बुरी खबरों को सुनने के लिए हमने तैयार हो जाना चाहिए.
आज कल fashion सा बन गया है, जो खबर पसंद नहीं है, उस पर फेक का लेवल लगा दिया जाता है. इस लिए चाइनीस ऑटो पार्ट्स suppliers की खस्ता हालत को जानने के लिए आप स्वयं भी गूगल कर सकते हैं.
आगे बढ़ते हुए, आप कह सकते हैं, की यह सब टेम्पररी है, चीन हमेसा की तरह ग्लोबल फैक्ट्री बना रहेगा. लेकिन अब जैसा की डेटा सामने आ रहा है, यह साफ़ दिखाई दे रहा है, की अमेरिकन कंपनियों ने चीन को छोड़ना चालू कर दिया है.
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग कंसल्टिंग फर्म Kearney ने जब अमेरिकन मनुफैचरिंग की तुलना की, अमेरिकन इम्पोर्ट से तो उसने पाया, की अमेरिकन प्रोडक्शन बढ़ रहा है, और इसका प्रमुख कारण यह है, की अमेरिका चीन ट्रेड टेंशन के कारण चीन के अमेरिका को एक्सपोर्ट में 17 फ़ीसदी की गिराबट आयी है.
सरल सब्दो में ना सिर्फ चीन का अमेरिका को निर्यात घट रहा है, बल्कि अमेरिका का लोकल प्रोडक्शन भी बढ़ रहा है. और इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पांच सालों के डेटा को एनालाइज किया गया है.
साफ़ तौर पर हम देख सकते हैं, की प्रेजिडेंट ट्रम्प की चाइनीस पालिसी जमीं पर काम कर रही है, लेकिन यह बात भी सच है, की जब 30 सालों में चीन को लाभ पहुंचाने वाली ग्लोबल सप्लाई चैन शिफ्ट हो रही है, तो इस प्रोसेस में दर्द और नुकसान तो सबको उठाना ही पड़ेगा.
पिछले साल तक अमेरिकन कंपनियां चीन से फैक्ट्री शिफ्ट करने की सोच रही थी, लेकिन अब उनकी सोच आंकड़ों में भी दिखने लगी है, और चाइनीस वायरस उन्हें सोच को अमली जमा पहना ने के लिए और मजबूर करेगा, ऐसी अपेक्षा की जा सकती है.
भविस्य में चीन के साथ क्या होगा, यह फाइनली तय होगा, नवंबर महीने में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से. सायद इसलिए चीन बेसब्री से चाहने लगा है, की किसी तरह प्रेजिडेंट ओबामा के काल में वाईस प्रेजिडेंट रहे प्रो चाइना जो बाईडन जल्द से जल्द अमेरिका के प्रेजिडेंट बन जाएँ. कहीं कोरोना वायरस ट्रम्प को राष्ट्रपति चुनाव हराने की चाइनीस साजिस तो नहीं, क्या ख्याल है आपका??
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