Well Done Africa - First Time Africa Challenged China
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Reference
https://edition.cnn.com/2020/04/10/china/africans-guangzhou-china-coronavirus-hnk-intl/index.htmlReference
https://www.bloomberg.com/news/articles/2020-04-11/u-s-leads-world-in-deaths-pentagon-funds-masks-virus-update
https://www.reuters.com/article/us-health-coronavirus-africa/some-african-nations-complain-about-treatment-of-africans-in-chinas-guangzhou-idUSKCN21T0T7
https://www.africanews.com/2020/04/12/african-nations-berate-china-over-covid-19-linked-racism/
https://www.financialexpress.com/defence/india-gets-ready-to-send-aid-to-13-countries-including-neighbourhood/1925732/
https://www.ndtv.com/world-news/coronavirus-outbreak-us-accuses-china-of-xenophobia-in-treatment-of-africans-over-covid-19-2210211
हम सभी को चाइनीस दोस्ती का सच अच्छे से पता है, लेकिन अफ्रीका के ऊपर चीन के प्यार का खुमार अभी कुछ ही वर्षो पहले चढ़ा है.
चीन और अफ्रीका की दोस्ती की झलक तब देखने को मिली, जब कोरोना महामारी के शुरुआती चरण में अफ्रीका के देशो ने वायरस से लड़ाई के लिए चीन की प्रशंसा करि, यहाँ तक की जब अफ्रीकन स्टूडेंट्स को चीन से बहार निकालने की मांग उठी, तो चीन से अपनी दोस्ती को ध्यान में रखते हुए, अफ्रीकन विद्यार्थियों को चीन से evacuate नहीं किया गया.
मौका पड़ने पर अफ्रीका के देशो ने चीन का साथ दिया, लेकिन अब उन्हें चीन के साथ दोस्ती की सच्चाई पता लग रही है.
हाल ही के कुछ दिनों में आप ने भी नोटिस किया होगा, की चीन का लगातार कहना रहा है, की उसके यहाँ इम्पोर्टेड केस की संख्या बढ़ती जा रही है, और घरेलु स्तर पर वायरस का संक्रमण अब ख़तम सा हो गया है.
इस प्रकार चीन ने अपने यहाँ रहने वाले विदेशियों और चाइनीस लोगों के बीच खड़ी कर दी एक दिवार. और इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है, चीन में रहने वाले लाखो अफ्रीकंस और अमेरिकन अफ्रीकंस को.
अफ्रीकंस के साथ खुले आम पर भेदभाव चल रहा है, उनके बार बार सैंपल लिए जाते हैं, फिर भी रिपोर्ट का रिजल्ट उन्हें नहीं मिल पा रहा है. साथ में इन लोगों को उनके घरों से भी निकाला जा रहा है.
यहाँ तक की चाइनीस व्यापारियों ने उनके साथ बिज़नेस करना बंद कर दिया, और उन्हें होटल में रुकने नहीं दिया जा रहा है.
परिणाम यह हो रहा है, अफ्रीकंस लोगों को सडकों पर राते बितानी पड़ रही है, और पुलिस भी उनके साथ भेदभाव कर रही है.
यदि आपकी आँखों पर चाइनीस चस्मा लगा हो और यह खबरें आपको फेक लगें, तो आप स्वयं गूगल पर सर्च कर के सच्चाई का पता लगा सकते हैं.
यहाँ तक की जब चाइनीस फॉरेन मिनिस्ट्री का ध्यान इस रंग भेद की तरफ लाया गया , तो उन्होंने साफ कह दिया, की चीन का पूरा ध्यान, इम्पोर्टेड कोरोना केसेस को कण्ट्रोल करने पर है. और चीन सभी विदेशियों को समान रूप से ट्रीट करता है, यदि कहीं किसी को दिक्कत हो रही है, तो यह उनकी मिस अंडरस्टैंडिंग के कारण हो रहा है.
यह तो बात हो गयी चाइनीस ऑफिसियल रिस्पांस की, लेकिन क्या चीन बताएगा, की क्यों अफ्रीकंस को रात में होटल्स के बहार निकाला जा रहा है, उनके पासपोर्ट क्यों जब्त किये जा रहे हैं, उन्हें वीसा कैंसलेशन और डेपोर्टेशन की धमकियाँ क्यों दी जा रही है.
आप सभी ने चीन को कहते सुना होगा, की कोरोना वायरस के साथ किसी देश का सम्बन्ध नहीं है, यह तो प्राकृतिक है, अगर हम चीन की बात को मान भी लेते हैं, तो क्या चीन बताएगा , की इस वायरस का चमड़ी के रंग से क्या लेना देना है?? आखिर क्यों चीन स्किन कलर को देखकर भेदभाव कर रहा है ???
जबकि चीन सरेआम मानवता के सिद्धांतों की धज्जियाँ उड़ा रहा है, तब WHO UN UNSC और UNHRC जैसे Human rights के ठेकेदार संघठन अपने मुँह में दही जमाये बैठे हैं.
आप जरा कल्पना कीजिये, की यदि ऐसा कुछ भी भारत में हो रहा होता, तो आज ये सारे के सारे घटिया संगठन दिन रात भारत और विशेषकर हिन्दुओं को गाली दे रहे होते.
बात साफ़ है, जिसकी लाठी उसकी भैंस, अगर आपके पास धन और बल की तागत है , तो दुनिया में कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है.
लेकिन इसी बीच अफ्रीका के देशो जैसे की केन्या और घाना ने आधिकारिक रूप से अपना गुस्सा और चिंता प्रकट की है, और नाइजीरिया ने तो चीन दूतावास के अधिकारी को बुलाकर उसकी क्लास भी लगा दी.
साथ में अमेरिका ने भी चीन के द्वारा किये जा रहे रंगभेद का घोर विरोध किया है, और अमेरिका ने यह भी जता दिया है, की आज चीन में जो अफ्रीकंस के साथ हो रहा है, वही चीन अफ्रीकंस के साथ अफ्रीका में कर रहा था. उम्मीद है, अब चाइनाऔर अफ्रीका पार्टनरशिप का सच अफ्रीकन देशो को समझ आएगा.
जब चीन खुद दुनिया को ज्ञान बांटता फिरता है, की हम सबने मिलकर इस वायरस को हराना चाहिए, तब चीन इस वायरस को हराने के लिए लोगों को राष्ट्रीयता, जाती और रंग देखकर कदम उठा रहा है.
चीन ने पहले इस बीमारी को एक्सपोर्ट करके महामारी बना दिया, अब जब वही वायरस आज चीन में इम्पोर्ट हो रहा है, तो चीन को बड़ी जलन हो रही है.
आपको तो याद होगा, जनवरी फ़रवरी में जब दुनिया ने चीन से आ रही फ्लाइट्स को रोक दिया, तो तिलमिलाकर चीन ने कहा था, की दुनिया ओवर रियेक्ट कर रही है. इसलिए सवाल उठता है, की यदि तब दुनिया ओवर रियेक्ट कर रही थी, तो चीन आज क्या कर रहा है??
जबकि चीन के कुकर्मो की अफ्रीका के देश घोर निंदा कर रहे हैं, तब अफ्रीका के देशो में एंटी मलेरिया ड्रग, पेरासिटामोल जैसे जरूरी सामान की सप्लाई करने के लिए भारत तैयारी कर रहा है.
भले ही भारत के पास चीन के बराबर आर्थिक शक्ति ना हो, लेकिन हम अफ्रीका के मित्र देशो की अपनी छमता के अनुसार पूरी मदद करेंगे.
आज जब संकट के बदल भारत के सर पर मंडरा रहे हैं, तब भी भारत दुनिया की मदद कर रहा है, और हम हेल्प करने के पहले सिर्फ दोस्त और दुश्मन का भेद कर रहे हैं. दोस्तों की भरपूर मदद हम करेंगे, और जहाँ तक पाकिस्तान जैसे दुश्मनो का सवाल है, उनकी ढंग से मरम्मत की जा रही है, एमो डंप को भारतीय तोपों ने ऐसे नस्ट किया, की पाकिस्तान आज भी लाशें गिन रहा है.
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