Well Done Japan - China & WHO must be Punished🔥👌✌💪🔥
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Reference
https://www.republicworld.com/india-news/general-news/japan-deputy-pm-slams-who-says-should-be-renamed-as-china-health-org.htmlReference
https://theprint.in/world/rename-who-as-chinese-health-organization-japan-slams-un-body-for-giving-into-chinas-spin/393961/
https://www.change.org/p/united-nations-call-for-the-resignation-of-tedros-adhanom-ghebreyesus-who-director-general
https://www.tweaktown.com/news/71599/japanese-deputy-pm-who-should-be-called-chinese-health-organization/index.html
https://www.moneycontrol.com/news/world/coronavirus-pandemic-as-cases-rise-japan-urges-hospital-beds-be-saved-for-the-severely-ill-5103651.html
https://www.worldometers.info/coronavirus/
https://freebeacon.com/policy/tom-cotton-debuts-plan-to-take-pharma-production-back-from-china/
https://www.washingtonexaminer.com/news/tom-cotton-there-has-to-be-an-accounting-and-a-reckoning-for-china-over-coronavirus
https://www.nytimes.com/2020/04/02/us/politics/cia-coronavirus-china.html
हमारे इस वीडियो के स्पांसर मंगेश बेलोरकर जी को धन्यवाद्. आपका कंट्रीब्यूशन हमारे लिए बेहद इम्पोर्टेन्ट हैं.
जैसा की हम सभी को पता है, आज दुनिया जिस संकट का सामना कर रही हैं, वह चीन और WHO की मिली भगत का नतीजा है.
हालाँकि अमेरिका और इटली की तरह इस चाइनीस महामारी की मार जापान पर नहीं पड़ी है, लेकिन अब जापान पर दवाब बढ़ने लगा है.
पहले तो जापान में कोरोना वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को हॉस्पिटल में भर्ती किया जा रहा था, लेकिन अब जापान की सर्कार ने निश्चित किया है, की केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों को ही हॉस्पिटल में बेड दिया जायेगा.
Tokyo में आयोजित होने वाले ओलम्पिक के पोस्टपोन होने के बाद अब जापान में मांग भी की जाने लगी है, की इस संकट से लड़ने के लिए इमरजेंसी की घोसणा होनी चाहिए.
इसी बीच जापान के उप प्रधान मंत्री ने चीन और WHO के खिलाफ जापानीज parliament में मोर्चा खोल दिया.
जो बात आप सभी को पता है, और भारत के नेता जिसे बोलने से डरते हैं, वही बात कह दी जापान के deputy प्राइम मिनिस्टर ने, की यदि WHO ने समय पर दुनिया को बता दिया होता, की चीन में निमोनिया की वीमारी तेजी से फ़ैल रही है, तो पूरी दुनिया को सजग और सतर्क होने का समय मिल जाता.
जिस तरह WHO ने चीन को बचाने की कोसिस करते हुए पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया, उसी के लिए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन का नाम बदलकर चाइनीस हेल्थ आर्गेनाइजेशन कर देना चाहिए.
जापान के प्रधान मंत्री ने आगे बढ़कर यह भी कहा, की जबकि ताइवान ना तो WHO का मेंबर है, और ना ही ऑब्जर्वर है, फिर भी ताइवान ने इस कोरोना वायरस को रोकने में दुनिया का नेतृत्वा किया है.
अब आप ही बताएं, जब WHO की मदद के बिना ताइवान इस कोरोना महामारी से निपट सकता है, तो WHO की जरूरत ही क्या है.
इसी बीच WHO के डायरेक्टर जनरल और चीन की कठपुतली डॉ टेडरोस को हटाने के लिए जनता की मुहीम ने जोर पकड़ लिया है.
जैसा की आपको पता है, डॉ टेडरोस WHO के ऐसे पहले डायरेक्टर जनरल हैं, जो बिना मेडिसिन की पढ़ाई के चीन के कंधे पर चढ़कर इस पद पर बैठे हैं. बन्दर के हाथ में उस्तरा देने से होने वाले नुकसान को आज पूरी दुनिया भर रही है.
तभी तो चेंज.ऑर्ग में डॉ टेडरोस से इस्तीफ़ा मांगने वाली पेटिशन पर अब तक 7 लाख लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं.
डॉ टेडरोस इस्तीफ़ा दें या ना दें, महत्वपूर्ण यह हैं ही नहीं, क्योकि वह तो केवल एक चाइनीस प्यादे हैं. असल में तो चीन को निशाने पर लिया जाना चाहिए.
आपको याद होगा, की हीरो बनने की कोसिस में कुछ दिनों पहले चीन ने इस महामारी से सम्बंधित सारा डेटा अमेरिका को दे दिया था.
लेकिन अब अमेरिका ने आधिकारिक रूप से उस पर भरोसा करने से इंकार कर दिया है. और सेंट्रल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी सीआईए को इस काम पर लगाया गया है, की वह पता लगाए, की एक्चुअली में इस माहमारी से चीन को कब और कितना नुकसान उठाना पड़ा है.
जबकि सीआईए ने इन्वेस्टीगेशन चालू कर दी है, अमेरिकन नेताओ ने यह मांग भी उठाना चालू कर दी है, की इस संकट के खिलाफ संग्राम में दुनिया के सफल होने के बाद, चीन का हिसाब किताब किया जाना चाहिए, ताकि पापी चीन को उसके कुकर्मो की सजा मिल सके.
साथ में अमेरिकन कांग्रेस में बिल भी पेस कर दिया गया है, जिसमे यह प्रस्ताव है, की अमेरिका में ड्रग मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए चीन से आने वाली दवाओं को रोका जाये. यहाँ तक की दवा के निर्माण में भी यदि चाइनीस रॉ मटेरियल का इस्तेमाल होगा, तो ऐसी दवा को भी अमेरिका में एंटर नहीं होने दिया जायेगा.
यह बिल पास होता है या नहीं, यह तो देखने वाली बात होगी, लेकिन यह अच्छा है, की देर से ही सही अमेरिका की आँखें खुल रही है, की वह जूते चप्पल और खिलोने को तो चीन से आयत कर सकता है, लेकिन लाइफ सेविंग ड्रग्स के छेत्र में अमेरिका को सेल्फ डिपेंडेंट होना ही पड़ेगा.
जैसा की आपको याद होगा, हाल के कुछ दिनों में भारत सर्कार ने भी ड्रग्स और मेडिकल इक्विपमेंट की फील्ड में आत्मा निर्भर होने की दिशा में निर्णय लिए हैं, अब हमें यह देखना होगा, की उन कागजी निर्णयों पर जमीं पर कैसे कदम कब उठाये जाते हैं.
यदि चाइनीस वायरस के कारण दुनिया दवाओं के मामले में चीन पर अपनी ओवर डिपेंडेंस को कम कर लेती है, तो यह मानव जाती के भविस्य के लिए बहुत ही अच्छा होगा.
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