Will Modi Government Cancel Chinese stake in HDFC??
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Reference
https://www.business-standard.com/article/finance/china-central-bank-hikes-stake-in-hdfc-amid-sharp-correction-in-shares-120041200860_1.htmlReference
https://www.livemint.com/news/india/govt-concerned-over-china-s-central-bank-raising-stake-in-hdfc-11586716713991.html
https://www.brookings.edu/research/following-the-money-china-incs-growing-stake-in-india-china-relations/
https://www.freepressjournal.in/analysis/chinas-investment-can-grow-further
https://www.ndtv.com/blog/what-to-make-of-china-banks-stake-in-hdfc-2210754?pfrom=home-topstories
https://www.moneycontrol.com/news/business/pboc-buys-1-1-hdfc-shares-on-behalf-of-chinese-sovereign-wealth-fund-saudi-picks-0-7-stake-deepak-parekh-5136431.html
https://en.wikipedia.org/wiki/East_India_Company
इस वीडियो के स्पांसर अविनेश सिंह जी को धन्यवाद, आपके सहयोग के कारण हम यह वीडियो बनाने में सफल हुए हैं.
जैसा की आपको पता लग गया होगा, की चाइनीस सेंट्रल बैंक ने HDFC में अपनी हिस्सेदारी को बढ़ा लिया है.
हमारे यहाँ अधिकतर एक्सपर्ट लोग हमें यही बताने की कोसिस कर रहे हैं, की चाइनीस सेंट्रल बैंक ने HDFC में हिस्सेदारी खरीदी है, HDFC बैंक में नहीं. और आगे जाकर वह हमें यह भी ज्ञान देते हैं, की चाइनीस सेंट्रल बैंक तो पहले से ही HDFC में हिस्सेदार रहा है.
पहले उसकी हिस्सेदारी 0.8 परसेंट थी, जिसे पिछले महीने बढ़ाकर 1.1 परसेंट कर दिया गया, इसलिए इन विद्वानों के अनुसार हम सभी बेवक़ूफ़ों की तरह फालतू में टेंशन ले रहे हैं.
आप सभी को पता है, चीन 100 सालों की स्ट्रेटेजी पर काम कर रहा है, तो उसके जवाब में भारत के एक्सपर्ट लोग सिर्फ आज का अख़बार पढ़कर निष्कर्ष पर जल्दी से पहुंच जाते हैं. NDTV अख़बार में तो एक एक्सपर्ट ने यह तक लिख दिया , की अच्छा हुआ, चाइनीस बैंक के पैसे लगने से साबित हो गया, की HDFC में और भारत के हाउसिंग फाइनेंस मार्किट में दम है.
आज आप देख लीजिये की हमने कितनी प्रगति कर ली है, भारतीय कंपनी अच्छी है या बुरी, यह भरोषा हमें तब होता है, जब हमारे दुश्मन देश का सेंट्रल बैंक उसमे हिस्सेदारी खरीद लेता है.
लेकिन भविस्य की और देखने के पहले हमें अपने इतिहास को भी देखना होगा, सन 1612 की बात है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुग़ल बादशाह जहाँगीर से सूरत में फैक्ट्री बनाने के लिए संधि की, तो जहाँगीर तुरंत राजी हो गया, और ब्रिटिश कंपनी को भारत में पांव ज़माने की इजाजत दे दी गयी, और बदले में ब्रिटिश कंपनी ने केवल यूरोपियन मार्किट से उपहार लाकर मुग़ल बादशाह के दरबार में देने थे.
आज आप देख सकते हैं, की उपहारों के आधार पर जहांगीर ने जिस दोस्ताने की शुरुआत की थी, उसके परिणाम स्वरुप भारत को 200 वर्षो की गुलामी झेलनी पड़ी.
इसलिए अब आप भी HDFC में चाइनीस सेंट्रल बैंक की 1.1 परसेंट हिस्सेदारी को लेकर भी निश्चिंत हो सकते हैं, लेकिन जो एक्सपर्ट आज हमें बता रहे हैं, की हमें परेशां होने की जरूरत नहीं है, क्योकि चाइनीस सेंट्रल बैंक के पास पहले ही HDFC की 0.8 परसेंट हिस्सेदारी थी.
तो हमारा इन विद्वान लोगों से एक छोटा सा सवाल है, की आखिर चीन ने कब यह 0.8 परसेंट की हिस्सेदारी HDFC में खरीद ली??
बात यह है दोस्तों, की चाइनीस मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स के डेटा के अनुसार वर्ष 2014 तक चीन ने भारत में केवल १.6 बिलियन डॉलर का निवेश किया था.
और वर्ष 2018 के आते आते चीन भारत में 8 बिलियन डॉलर का निवेश कर चूका था.और ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूट की मार्च 2020 की स्टडी के मुताबिक यदि करंट और प्लांड इन्वेस्टमेंट को मिला दिया जाये, तो चीन का भारत में 26 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट हो रहा है.
अब यह आप पर निर्भर करता है, की आप बीमारी के लक्षण यानि की HDFC में 2.9 हज़ार करोड़ के चाइनीस इन्वेस्टमेंट पर ध्यान देना चाहते हैं, अथवा बीमारी यानि की भारत में चीन के कुल 182 हज़ार करोड़ के निवेश पर फोकस करना चाहते हैं.
बात साफ़ है, जब आप सभी बीमारी के बारे में बिलकुल जायज चिंता कर रहे थे, तब एक्सपर्ट लोग आपको लक्षणों के बारे में चिंता ना करने की फ़र्ज़ी सलाह दे रहे थे.
लेकिन और भी बढ़ा सवाल यह है, की जबकि पश्चिमी देशो से आने वाले निवेश की अच्छे से जाँच पड़ताल करि जाती है, उसके ठीक विपरीत मोदी सर्कार की नाक के नीचे चीन भारत में निवेश करता रहा, और किसी को भनक तक नहीं लगी.
आपने कुछ एक्सपर्ट लोगों को यह बताते हुए भी सुना होगा, की हमें पैनिक रिएक्शन देने की जरूरत नहीं है, क्योकि गवर्नमेंट ऑफ़ सिंगापुर, अबू धाबी और नॉर्वे की संस्थाओं ने भी HDFC में निवेश कर रखा है.
अब आप ही बताएं, क्या दुनिया का सबसे लम्बा सीमा विवाद भारत और सिंगापूर के बीच है, क्या नॉर्वे अरुणाचल प्रदेश पर दवा पेश करता है. क्या UAE ने अक्साई चिन पर कब्ज़ा कर रखा है?
इसलिए सवाल उठता है, की आम आदमी को मुर्ख समझने वाले विद्वान लोगों को क्या दोस्त और दुश्मन का फ़र्क़ मालूम है??
इसी बीच जब HDFC में चीन के सेंट्रल बैंक ने हिस्सेदारी बढ़ा ली, और यह खबरें अख़बार में छपी, तो लाइव मिंट के अनुसार देर से सही मोदी सर्कार के कान खड़े हो गए.
हालाँकि यह बात भी सही है, की चाइनीस सेंट्रल बैंक ने HDFC में हिस्सेदारी को बढ़ाकर किसी भी भारतीय कानून का उल्लघन नहीं किया है. और इस डील को कैंसिल नहीं किया जा सकता है.
लेकिन क्या इस गलती से हमें कुछ नहीं सीखना चाहिए?? अगली बार यदि चीन का कोई सरकारी संस्थान भारत की प्राइवेट कंपनी को खरीदे, तो क्या हमें उस डील पर ध्यान नहीं देना चाहिए??
हमें पूरा विस्वाश है, मोदी सर्कार देर से ही सही दुरुस्त कदम उठाएगी, यह बात सही है, की हम विदेशी निवेश का स्वागत करते हैं, लेकिन क्या इसका मतलब यह है, की हम भारत को खुले आम नीलाम होने दें??
यदि मुश्किल में फसी अच्छी भारतीय कंपनियों को धीरे धीरे होने वाले चाइनीस कब्जे से हमारे नियम और कानून बचा नहीं पा रहे हैं, तो ऐसे रूल्स एंड रेगुलेशन को जल्द से जल्द बदल देना समय की मांग है.
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