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Reference
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-plans-first-ever-virtual-bilateral-summit-as-modi-morrison-hopes-to-deepen-indo-pacific-partnership/articleshow/75568346.cmsReference
https://www.indiatvnews.com/news/world/israel-s-first-covid-19-vaccine-factory-to-come-up-in-very-near-future-614495
https://www.hindustantimes.com/india-news/of-course-we-ll-share-it-with-the-world-israel-s-ambassador-to-india-on-covid-19-breakthrough/story-dMWd0ya1D7iuNaTjF5Aj9L.html
https://www.republicworld.com/world-news/rest-of-the-world-news/coronavirus-crisis-brought-india-and-israel-closer-says-israel.html
https://www.aa.com.tr/en/latest-on-coronavirus-outbreak/virus-vaccine-should-be-for-all-of-humanity-erdogan/1828570
https://en.wikipedia.org/wiki/Malabar_(naval_exercise)
https://timesofindia.indiatimes.com/india/india-planning-to-invite-australia-for-malabar-naval-exercise/articleshow/73715057.cms
जैसा की आप सभी को पता लग गया होगा, की कल इसराइल के विदेश मंत्री ने कन्फर्म किया था, की कोरोना वायरस के खिलाफ काम करने बाली एंटीबाडी वैक्सीन के विकास में इसराइल के बैज्ञानिको ने असाधारण सफलता प्राप्त कर ली है.
हालाँकि अभी तक यह तो क्लियर एंड कन्फर्म नहीं हो पाया है, की इसरलए ने चाइनीस वायरस का जो इलाज निकला है, उसकी इंसानो पर टेस्टिंग सफल हुई हैं नहीं, लेकिन इसराइल ने यह तो बता दिया था, की वह इस उपचार के लिए पेटेंट फाइल करने की प्रोसेस में हैं, साथ ही इंटरनेशनल कम्पनीयों के साथ मिलकर इस इलाज़ का लार्ज स्केल इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन करने पर भी बातचीत चालू हो गयी है.
चूँकि यह बात इसराइल के रक्षा मंत्री ने कही है, इसलिए इसपे विस्वास करना तो बनता है, और अब भारत में इसराइल के राजदूत ने भी कन्फर्म किया है, इसराइल कोरोना वायरस के खिलाफ काम करने वाली एंटीबाडी वैक्सीन के विकास की एडवांस्ड स्टेज में हैं. और निश्चित रूप से इसराइल यह इलाज़ पूरी दुनिया के साथ साझा करेगा.
कोई ज्यादा पुरानी बात नहीं है, 4 अप्रैल को टर्की के राष्ट्रपति ने अपेक्षा करि थी, चाहे कहीं भी सबसे पहले कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर वैक्सीन का डेवलपमेंट पूरा हो जाये, लेकिन इस इलाज़ पर पूरी दुनिया का अधिकार होना चाहिए. और यह सभी को उपलब्ध भी होनी चाहिए.
भारत और इसराइल की दोस्ती तो जगजाहिर है, इसलिए हम तो इस वैक्सीन का स्वागत करते हैं, लेकिन सवाल यह है, की यदि रियलिटी में इसराइल ने यह वैक्सीन सबसे पहले बना ली, तो क्या टर्की और उसका पिट्ठू पाकिस्तान इस इसरायली वैक्सीन का इम्पोर्ट करेंगे??
जो देश इसराइल के लिए मौत की दुआ करते हैं, वह क्या इसराइल का दिया जीवनदान ले लेगें?
इसी बीच भारत में इसराइल के राजदूत ने यह भी हाई लाइट किया है, की कोरोना वायरस ने इंडिया और इसराइल को एक दूसरे के और करीब ला दिया है, इस संग्राम से लड़ने के लिए दोनों देशो ने बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करि, और नई प्रोसेसेज का विकास भी किया.
पिछले महीने जब इसराइल को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दवाओं की जरूरत आन पड़ी, तो केवल इसराइल को लेकर हम सभी के बीच एक राय थी, की सबसे पहले भारत ने बिना सोचे विचारे इसराइल को Hydroxy chloroquine दवा का एक्सपोर्ट चालू कर देना चाहिए.
जो संकट में काम आये, उसे ही दोस्त कहा जाता है, इसलिए कोरोना वायरस ने इंडिया और इसराइल की दोस्ती को और मजबूत कर दिया है. इसराइल के हथियारों से भारत ने पाकिस्तान को पीटा है, अब इसराइल की वैक्सीन से भारत चाइनीस वायरस को मारेगा.
आगे बढ़ते हुए, जल्द ही भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रधान मंत्री के स्तर पर पहली शिखर वार्ता वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये चालू होने वाली है.
आपको सायद याद हो, यह समिट लेवल मीटिंग पहले इस साल जनवरी में होने वाली थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगने के कारण यह संभव नहीं हो पायी, फिर इस मीटिंग को मई महीने में होना था, लेकिन कोरोना महासंग्राम के कारण यह फिर टल गयी.
उम्मीद है, जल्द ही यह समिट लेवल मीटिंग होगी, ताकि इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच म्यूच्यूअल लोजिस्टिक्स शेयरिंग एग्रीमेंट फाइनल हो जाये.
आप सभी को जानकारी है, पिछले कुछ दिनों में ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तना तनी बहुत बढ़ चुकी है. ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ कोरोना वायरस के खिलाफ इंटरनेशनल इन्वेस्टीगेशन की मांग क्या कर दी, चीन ने धमकियाँ देना देना चालू कर दिया, की चाइनीस लोग ऑस्ट्रेलिया का माल खरीदना बंद कर देंगे.
कुछ लोगों को छोटी छोटी बातें समझने में बड़ा वक्त लग जाता है, कोरोना वायरस ने ऑस्ट्रेलिया के ऊपर से चीन के प्यार का बुखार उतार दिया है, ऐसा जान पड़ता है.
लेकिन यहाँ पर हम बात करेंगे, वर्ष 2007 की मालाबार नेवल exercise में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को invite किया, तो चीन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया.
तब ऑस्ट्रेलिया के आँखों पर चीन की लाल पट्टी बंधी हुई थी, तो भारत ने भी तुस्टीकरण की नीति का पालन करते हुए, ऑस्ट्रेलिया को आगे से बुलाने से इंकार कर दिया. तब से लेकर आज तक ऑस्ट्रेलिया मालाबार नेवल exercise में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहा है.
यहाँ पर मुद्दे की बात यह है, की वर्ष 2007 में चीन के सर फिरे शासक के आगे सर झुकाने का परिणाम यह हुआ, की वर्ष 2008 से चीन ने इंडियन ओसेन में अपनी नौसेना की तैनाती को बड़ा दिया. और ऑस्ट्रेलिया को भी चीन की चाल में फ़सने की सजा भुगतनी पड़ रही है.
चीन ने साउथ और ईस्ट चीन सी को निगल ही लिया है, और अब हिन्द प्रशांत महासागर को चीन से बचाने के लाले पड़े हुए हैं.
यदि इंडिया और ऑस्ट्रेलिया ने 2007 - 2008 में चीन का तुस्टीकरण न किया होता, तो आप ही बताएं, ये दोनों देश इंडो पसिफ़िक सी में फ्रीडम ऑफ़ नेविगेशन को बरक़रार करने के लिए क्या आज समिट का आयोजन कर रहे होते.
तुस्टीकरण की नीति से कभी किसी का भला नहीं हुआ है, यह केवल आज की समस्या को कल पर टालने का आसान तरीका है, उम्मीद है, कोरोना संग्राम में बर्बाद होने के बाद दुनिया को यह बात समझ आ जाये.
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