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Reference
https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/taiwan-to-send-medical-equipment-to-india/articleshow/75090710.cms
https://www.channelnewsasia.com/news/asia/china-says-taiwan-s-bid-to-attend-key-who-meeting-will-fail-12715468
https://international.thenewslens.com/article/134819
https://www.citynews1130.com/2020/05/09/canada-backs-u-s-led-effort-for-taiwan-at-who-over-chinas-objections/
https://foreignpolicy.com/2020/04/13/taiwan-coronavirus-pandemic-mask-soft-power-diplomacy/
https://www.hindustantimes.com/india-news/taiwan-donates-1-million-face-masks-to-protect-indian-medical-personnel/story-E3cQ9bNJ75jieGZ6W5e6sM.html
https://www.tribuneindia.com/news/nation/taiwan-sends-10-lakh-face-masks-to-india-82598
https://www.wionews.com/india-news/india-to-assume-who-leadership-role-five-things-to-fix-297516
https://www.worldometers.info/coronavirus/

आपको याद होगा, पिछले महीने हमने चर्चा की थी, जल्द ही ताइवान भारत को सहायता भेज सकता है.



सायद आपको जानकारी हो, चीन के बाद ताइवान दुनिया में फेस मास्क का सबसे बड़ा उत्पादक देश है.



इसलिए १ अप्रैल को ताइवान की राष्ट्रपति ने announce किया था, की ताइवान एक करोड़ मास्क उन देशो को डोनेट करेगा, जो कोरोना महामारी से सबसे अधिक पीड़ित हैं.



यूरोप और अमेरिका को 10 लाख मास्क सप्लाई करने के बाद ताइवान ने शेष 90 लाख  मास्क उन देशो को बांटने का निर्णय लिया था, जिन्होंने मास्क की डिमांड को मीट करने के लिए ताइवान से हेल्प मांगी है. और उन देशो में भारत का नाम भी शामिल था.



सबसे पहले सवाल यह खड़ा होता है, की दुनिया में फेस मास्क की इतनी किल्लत कैसे हो गयी,  कारण यह है, की फरबरी महीने में ही चीन ने मास्क के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी. इसलिए आज मास्क को एक्सपोर्ट करके Fake हीरो चीन जिस समस्या को solve कर रहा है, असल में मास्क Shortage की इस प्रॉब्लम को रियल Villain चीन ने ही पैदा किया था .



लेकिन ताइवान अपने वादे पर खरा उतरा है, उसने चार मई को १० लाख फेस मास्क स्पेशल फ्लाइट के जरिये भारत भेज दिए. ताइवान के द्वारा one मिलियन फेस मास्क का डोनेशन दोनों देशो के बीच मेडिकल कोऑपरेशन की दिशा में उठाया एक महत्वपूर्ण कदम है.



भारत में ताइवान के अम्बेसडर ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के हवाले यह फेस मास्क कर दिए, जिनका प्रयोग फ्रंट लाइन पर तैनात मेडिकल प्रोफेशनल के द्वारा किया जायेगा.



लेकिन आप दुर्भाग्य  देखिये, की ताइवान ने भारत को मदद तक भेज दी, लेकिन भारत में किसी के पास ताइवान को थैंक यू बोलने का समय भी नहीं है. भारत सर्कार one चीन की पालिसी में बंधी हुई है, हमें यह बात समझ में आती है, लेकिन हमारी निडर मीडिया को ताइवान की इस मदद को कवर करने से डर क्यों लगता है .



हो सकता है, कुछ मीडिया हाउस ने इस पॉजिटिव डेवलपमेंट को कवर भी किया हुआ हो. लेकिन अभी जहाँ तक हमने observe किया है, इस खबर को इग्नोर करने की कोसिस की जा रही है.



अच्छा होता की मोदी सर्कार ताइवान से फेस मास्क की डोनेशन लेने के बाद थैंक यू बोल पाने का साहस जुटा पाती है, आप ही बताएं, जब चीन one इंडिया की पालिसी के अस्तित्वा तक को स्वीकार नहीं करता है, तो हमारे ऊपर क्यों one चाइना की पालिसी का पागलपन सवार है.



उम्मीद है, कभी न कभी तो भारत सर्कार सार्वजनिक तौर पर ताइवान को थैंक यू बोलने की हिम्मत जुटा पायेगी. लेकिन हम जैसे आम लोग तो मदद करने वाले को थैंक यू बोल ही सकते हैं.


वैसे जल्द ही भारत को धन्यवाद् बोलने का अवसर भी मिलने वाला है, जैसा की आपको जानकारी होगी, 22 मई को इस बात की सम्भावना है, की भारत का नॉमिनी WHO एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरपर्सन बन जाये.



इसलिए जबकि भारत WHO के नेतृत्वा की भूमिका में आने वाला है, तो भारत की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, पिछले महीने G20 समिट में मोदी साहेब ने WHO के काम काज में सुधार का जो आईडिया प्रस्तुत किया था, अब उसे जमीं पर उतारने का मौका हमें मिलने वाला है.



लेकिन इससे पहले की 22 मई को भारत ऑफिशियली WHO का लीडर बने, 18 और 19 मई के बीच होने वाली है, वर्ल्ड हेल्थ असेंबली की बैठक.



जिसमे वर्ष 2009 से 2016 के बीच ताइवान को आब्जर्वर के रूप में बुलाया जाता रहा है. 2017 से ताइवान की प्रेजिडेंट से चिढ़ कर चीन ने ताइवान को भेजे जाने वाले इनविटेशन पर रोक लगवा दी थी.



लेकिन इस साल WHO के 194 में से  छह सदस्यों ने ताइवान को आब्जर्वर के रूप में इनविटेशन भेजे जाने का सपोर्ट कर दिया है. ये छह देश हैं, जो की one चाइना की पालिसी का पालन नहीं करते हैं, और ताइवान के स्वतंत्र अस्तित्वा का आदर करते हैं.



अमेरिका के विदेश मंत्री ने खुले आम सभी देशों से आह्वाहन भी कर दिया है, की वह WHO में आब्जर्वर के रूप में ताइवान को इनविटेशन भेजे जाने के प्रस्ताव का समर्थन करें.



अमेरिका के बाद में न्यू ज़ीलैण्ड और कनाडा की तरफ से ऐसी खबरें आ रही है, की वह भी ताइवान को आब्जर्वर स्टेटस दिए जाने का समर्थन करते हैं.



हालाँकि WHO के पिछले डायरेक्टर्स की तरह डॉ टेडरोस को यह हक़ हांसिल है, की वह ताइवान को इनविटेशन भेज सकते हैं.



लेकिन जैसा आप सभी को अंदाज़ा होगा, वह चीन की कठपुतली हैं, इसलिए उनसे कोई उम्मीद करना बेवकूफी ही होगी .



अब देखना होगा, की अगले कुछ दिनों में अमेरिका की यह मुहीम कितनी रफ़्तार पकड़ती है.



ताइवान को इनविटेशन मिलेगा या नहीं, यह तो तय होने में समय लग सकता है, लेकिन एक बात पक्की है, की यदि ताइवान को WHO में कोई भी स्टेटस प्राप्त होता, तो आज Wuhan से निकली छोटी सी वीमारी पूरी दुनिया के लिए महामारी ना बनती.



ना तो 40 लाख लोग इसके शिकार बनते, और ना ही पूरी दुनिया को घरों में कैद होना पड़ता. ग्लोबल इकॉनमी को हुए इतने बड़े नुकसान के बाबजूद भी यदि दुनिया के देश WHO के मीटिंग में ताइवान को invite करवाने का साहस नहीं कर पाएं, तो एक बार फिर साफ़ हो जायेगा, की जिसकी लाठी उसी की भैंस भी होती है.



वैसे भी चीन ने कह दिया है, की ताइवान को WHO की मीटिंग में invite करवाने का प्रस्ताव बुरी तरह से विफल होगा



जहाँ तक भारत का सवाल है, जब हमारी सर्कार ताइवान को थैंक यू तक नहीं बोल पा रही है, इस बात की सम्भावना बेहद कम है, की वह ताइवान को निमंत्रण भेजे जाने का औपचारिक समर्थन करेगी.



फिर भी हमें उम्मीद है, की यदि कोई सर्कार चीन के खिलाफ कभी  आवाज़ बुलंद कर सकती है, तो वह मोदी सर्कार ही है. इसलिए आगे आने वाले दिनों में हम इंतजार करेंगे, की इंडियन गवर्नमेंट ताइवान को WHO की मीटिंग में शामिल कराने की मुहीम का हिस्सा बने.



सिंपल सवाल वही है, की जब लगातार चाइनीस ड्रैगन भारत पर आग उगल रहा है, तो हम कब तक चीन का तुस्टीकरण करते रहेंगे?? और कितनी बर्बादी के बाद हमारे होश ठिकाने आएंगे.

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