Well Done France and India



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Reference -

जैसा की आप सभी को पता है, पिछले बुधवार को पाकिस्तान और चीन के बीच 5.8 बिलियन डॉलर के डैमर भासा डैम को लेकर करार हुआ.

फिर क्या था, गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी चीन और पाकिस्तान के बीच हुए इस कॉन्ट्रैक्ट का पुरजोर विरोध किया.

और आज चीन के तरफ से भी जवाब आ गया, की कश्मीर को लेकर चीन की पालिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और चीन गिलगित बाल्टिस्तान में जो कुछ कर रहा है, उससे सभी पक्षों को बराबर लाभ होगा.

चीन की प्रतिक्रिया देखकर हमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, लेकिन बड़ा सवाल है, की विरोध करते समय भारतीय विदेश मत्रालय को क्या अपेक्षा थी.

आप ही बताएं, सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने से क्या होगा??

सवाल वही है, की जब one इंडिया के अस्तित्वा को नकारते हुए, चीन POK में बांध का निर्माण कर सकता है, तो आखिर भारतीय विक्रम अपनी पीठ पर क्यों one चाइना की पालिसी का बेताल लादे हुए है??

यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है, क्योकि ताइवान ने भारत को 10 लाख सर्जिकल फेस मास्क दान में दिए, लेकिन भारत सर्कार में किसी की हिम्मत नहीं हुई, की ताइवान को थैंक यू बोल सके.

भारत ने ताइवान की मदद को नजरअंदाज कर दिया, तो परिणाम सामने है, चीन अब हमारी जमीं पर पाकिस्तान के साथ मिलकर बांध बनाएगा.

ताइवान वर्ष 2009 से 2016 तक वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में आब्जर्वर के रूप में भाग लेता था, लेकिन ताइवान की महिला राष्ट्रपति से चीन के मर्द राष्ट्रपति को ऐसा दर्द हुआ, की उन्होंने वर्ष 2017 से ताइवान का observer स्टेटस कैंसिल करवा दिया.

यदि वर्ष 2017 में दुनिया ने चीन का तुस्टीकरण ना किया होता, तो आज पूरी मानव जाती को घरों में कैद ना होना पड़ता. ताइवान को यदि WHO तक पहुंच होती, तो यह कोरोना महामारी Wuhan बीमारी के रूप में ही दम तोड़ देती.

लेकिन हमें अभी भी ऐसा लगता है, की इतनी बड़ी ठोकर खाने के बाद भी दुनिया की अकल ठिकाने पर नहीं है, अभी भी सब चीन की चप्पल से डरते हैं.

आपको सायद जानकारी हो, की भारत ताइवान को आब्जर्वर स्टेटस दिलाने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यू जी लैंड, साउथ कोरिया और वियतनाम के साथ बातचीत कर रहा है.

इन छह में से 4 देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यू जी लैंड ने इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस और कनाडा के साथ कुल मिलाकर आठ देशों ने WHO को कह भी दिया है, की ताइवान को आब्जर्वर के रूप में वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में शामिल किया जाना चाहिए.

लेकिन अभी तक इन देशो की लिस्ट में भारत का नाम शामिल नहीं हुआ है, ताइवान के भारत में राजदूत ने निवेदन किया है, की जैसा की भारत की आम जनता ताइवान के साथ खड़ी हुई है, इसलिए उसे उम्मीद है, की भारत सर्कार ताइवान की मदद करेगी.

अमेरिकन NSA ने सही कहा है, की पिछले 20 सालों में चीन ने दुनिया को चार महामारियों की सजा दी है, और अब दुनिया चीन से पांचवी महामारी की सजा नहीं भुगत सकती है.

इसलिए ताइवान को उसका छिना हुआ हक़ वापस दिलाकर दुनिया ताइवान पर कोई उपकार नहीं कर रही है, यदि ताइवान को वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में बैठने का मौका मिलेगा, तो हो सकता है, की दुनिया को पांचवी चाइनीस महामारी का शिकार ना होना पड़े.

भारत का कहना है, की 18 से 19 के बीच होने वाली वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में ताइवान को शामिल किये जाने को समर्थन कारन को लेकर भारत अंतिम निर्णय कुछ दिनों बाद लेगा. उम्मीद है, 18 मई के पहले भारत सर्कार इस सन्दर्भ में सकारात्मक निर्णय ले लेगी.

लेकिन जिस तरह चीन ने पाकिस्तान में बांध का निर्माण कार्य हाथ में लिया, यह बात साफ़ हो जाती है, की चीन को भारत की कोई परवाह नहीं है, उल्टा सिक्किम और लद्दाक में खुरापात करके वह चोरी के ऊपर सीनाजोरी भी कर रहा है.

इसलिए सवाल यह है, क्या स्वाभिमानी भारत ताइवान को उसका खोया हुआ अधिकार वापस दिलाएगा अथवा हमेसा चीन का मूर्खतापूर्ण तुस्टीकरण ही करता रहेगा.

इसी बीच फ्रांस ने तीस सालों पहले ताइवान को जंगी जहाज बेचे थे, और अब फ्रांस पुराने कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ताइवान को हथियार बेचकर उन जहाजों को अपग्रेड कर रहा है.

जाहिर है, यह बात चीन कैसे पचा पायेगा, उसने फ्रांस को one चाइना की पालिसी याद दिला दी, लेकिन फ्रांस ने भी साफ़ कह दिया, की अच्छा होगा चीन कोरोना क्राइसिस से निपटने पर ध्यान केंद्रित करे.

जब फ्रांस ताइवान को हथियार बेच सकता है, तो भारत ताइवान को थैंक यू बोलने तक से क्यों कतराता है??

यदि हमें सम्मान चाहिए, तो हमें साहस भी दिखाना होगा, कायरों को ना तो सम्मान मिलता है, और ना ही सुरक्षा परिषद् में परमानेंट सीट.

लेकिन हमें मोदी सर्कार पर पूरा भरोसा है, हमें उम्मीद है, की वह स्वाभिमानी भारत के अस्तित्व  का आभाष चीन को कराने का यह सुनहरा मौका हाथ से नहीं जाने देगी. मित्र ताइवान को भारत की जरूरत है, क्या भारत दोस्ती के कसौटी पर खरा उतरेगा?? आपका क्या ख्याल है इस बारे में??

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