Well Done President Trump (Best Indian Friend in America)

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जैसा की आपको पता है, टर्की और सायप्रस के बीच छत्तीस का आंकड़ा है. 

पिछले कुछ महीनो में टर्की ने सायप्रस के पानी में ना सिर्फ आयल एंड गैस ड्रिलिंग की कोसिस की, बल्कि लीबिया के साथ मिलकर एक गैरकानूनी एग्रीमेंट के जरिये मेडिटेरनियन सी को दो हिस्सों में तोड़ दिया.

आप सभी ने देखा है, एक और चीन ने पुरे के पुरे साउथ चीन सी को हड़प लिया, तो दूसरी और छोटे चीन टर्की ने मेडिटेरनियन सी के बीचो बीच के पानी पर कब्ज़ा कर लिया.

और ऐसा नहीं है, की टर्की की महत्वाकांक्षा सिर्फ मेडिटेरनियन सी में ही दम तोड़ देती है, यहाँ तक की लीबिया हो या सीरिया हो, हर जगह आपको टर्की आग में घी डालता हुआ दिखाई दिया है.

जहाँ तक सायप्रस के पानी में ड्रिलिंग का सवाल है, आप सभी ने देखा था, की यूरोपियन यूनियन ने धमकियाँ तो खूब दी, लेकिन यह खोखली बयान बाजी टर्की को रोकने में नाकाम साबित हुई.

लेकिन इस दौरान आप सभी का यह साफ़ तौर पर विचार था, की आखिर कब तक दुनिया चीन और टर्की के सर फिरे शासकों के आगे सर झुकाती रहेगी.

यहाँ तक की अमेरिका तक ने टर्की का तुस्टीकरण करने की निति अपनाई हुई थी. परिणाम हमारे सामने था, टर्की उन मामलों तक में टांग अड़ाने लगा था, जिनसे उसका दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था.

लेकिन अब देर सी ही सही कार्यकाल समाप्त होते होते ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने टर्की के खिलाफ कदम उठाना चालू कर दिया है .

और कल इतिहास में पहली बार अमेरिका ने सायप्रस को इंटरनेशनल मिलिट्री एजुकेशन एंड ट्रेनिंग मुहैया करवाने का निर्णय लिया है.

कूटनीति की भाषा में, इस प्रोग्राम के माध्यम से अमेरिका सायप्रस को सैन्य शिक्छा और प्रशिक्षण देगा, जिसके माध्यम से सायप्रस की डिफेंस कैपेबिलिटीज में बढ़ोतरी होगी , ताकि छेत्रिय शांति और स्थयित्वा को बढ़ाये जा सके.

हलाकि अभी सायप्रस को इस प्रोग्राम में शामिल करने का निर्णय लिया जा चूका है, लेकिन अभी भी इस डिसिशन पर अमेरिकी कांग्रेस की सील लगना बाकि है. जैसा की आपको भी उम्मीद होगी, ऐसे निर्णय को आम तौर पर अमेरिकी संसद हरी झंडी दिखा देती है.

इसलिए सरल सब्दो में हम सबने कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए, यदि कुछ ही समय बाद ऐसी खबरे आएं, की सायप्रस के जिस पानी में कल तक टर्की ड्रिलिंग किया करता था, वहीँ पर अमेरिका और सायप्रस मिलकर नौ सैनिक युद्धाभ्यास कर रहे हैं.

पॉइंट सिंपल है, साउथ चाइना सी हो या मेडिटेरनियन सी हो. दोनों ही जगह अमेरिका अपनी पावर को प्रोजेक्ट करने की भरपूर कोसिस कर रहा है.

जाहिर है, यह अमेरिकी निर्णय टर्की के गले नहीं उतरेगा, इसलिए टर्की के विदेश मंत्रालय का कहना है, की अमेरिका के निर्णय से ईस्ट मेडिटेरनियन सी में पीस एंड स्टेबिलिटी कम होगी. क्योकि कायदे से अमेरिका को सायप्रस ग्रीक कॉम्बो के सामने टर्की के साथ बैलेंस बनाये रखना चाहिए था.

टर्की की बातों में आपको पाकिस्तानी खनक सुनाई दे रही होगी, पिछले लम्बे समय में आप सभी ने पाकिस्तान को भी यह कहते सुना होगा, की भारत और उसके बीच शक्ति संतुलन बनाये रखने की जिम्मेदारी अमेरिका की है.

इसलिए बड़ा पॉइंट यहाँ पर है, की टर्की हो पाकिस्तान हो या चीन हो, इन तीनो की बातें और काम भी एक दूसरे से हूँ बहु मिलते हैं.

यहाँ पर एक छोटा सा सवाल यह है, की यदि सायप्रस को ट्रेनिंग देकर अमेरिका विवाद को भड़का रहा है, तो सायप्रस के पानी में ड्रिलिंग करके टर्की मानव जाती का कौन सा कल्याण कर रहा था.

बात साफ़ है, चीन हो या टर्की हो, दोनों ही चोर उल्टा कोतवाल को डाँटते हैं.

टर्की को विरोध के लिए विरोध करने दीजिये, अच्छी बात यह है, की देर सी ही सही अमेरिका ने टर्की और सायप्रस के विवाद में एक पक्ष का चुनाव कर लिया है. आइये देखते हैं, की अब टर्की ईस्ट मेडिटेरनियन सी में ड्रिलिंग करता है, या नहीं.

आप सभी के विचार पर अब अमेरिका ने तो अमल करना चालू कर दिया है, उम्मीद है, भारत भी सायप्रस और ग्रीस के साथ दोस्ती को और पुख्ता करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा.

अंत में आईडिया वही है, की चीन और टर्की के तानाशाहो को लोकतंत्र का लोहा मनवाने के लिए डेमोक्रेटिक दोस्तों को एक जुट होना ही पड़ेगा.

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