America Deployed Massive Power In Indian Ocean
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https://www.taiwannews.com.tw/en/news/3986625
जैसा की आप सभी को पता है, पिछले 40 सालों में पहली बार अमेरिकन कैबिनेट मेंबर ने हाल ही में ताइवान की यात्रा पूरी की.
इस प्रकार अमेरिका ने one चाइना की पालिसी को तार तार कर दिया, और थोथा चना बाजे घना की तरह चीन ने भी अमेरिका को धमकियाँ देने की औपचारिकता पूरी कर दी.
इसी बीच अगले सप्ताह चीन साउथ चाइना सी में मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहा है, जिसके दौरान चीन के दो युद्ध पोत ताइवान के पानी में तैनात किये जायेंगे, और युद्ध अभ्यास के माध्यम से चीन ताइवान के द्वीपों पर हमला करने की अपनी योजना को निखारना चाहता है.
अमेरिकन कैबिनेट मेंबर की यात्रा के दौरान ताइवान के विदेश मंत्री ने भी कहा था, की चीन ताइवान को नेक्स्ट होन्ग कोंग बनाना चाहता है.
जबकि ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच गरमा गर्मी बढ़ती जा रही है. लद्दाक में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
चीन की तरफ से कहा जा रहा है, की भारत ने ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए, जिससे काम्प्लेक्स सिचुएशन और कॉम्प्लिकेटेड हो जाये. इसे कहते हैं, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.
इस बैकग्राउंड में अमेरिका ने उठाया है, एक बेहद साहसिक और स्ट्रेटेजिक कदम, जिसके अंतर्गत ताइवान और इंडिया जैसे अमेरिकन allies और पार्टनर्स के साथ अपने संबधो को मजबूत और अमेरिकन रिस्पांस को शार्प करने के उद्देस्य से अत्याधुनिक B2 स्टील्थ बॉम्बर्स को इंडियन ओसेन में डिएगो गार्सिआ नेवल बेस पर तैनात कर दिया गया है.
इस अमेरिकन डिप्लॉयमेंट का महत्वा सिर्फ इस बात से बढ़ जाता है, की वर्ष 2016 के बाद पहली बार अमेरिका ने B2 बॉम्बर्स को इंडियन ओसेन में उतारा है.
अमेरिकन एयर बेस से डिएगो गार्सिआ तक B2 बॉम्बर्स को आने में भले ही 29 घंटे लगे हों. लेकिन इस डिप्लॉयमेंट के बाद शार्ट नोटिस पर यह B2 बॉम्बर साउथ चीन सी में प्रलय ला सकता है.
अमेरिका ने तो अपने मोहरे आगे बड़ा दिए हैं, अब यह चीन पर निर्भर करता है, की वह अमेरिकन सन्देश को पढ़ पता है, या नहीं.
कहने की जरूरत नहीं है, हिन्द महासागर में B2 बॉम्बर होने से इस पुरे इलाके में चीन के नापाक इरादों पर लगाम भी लगेगी.
लेकिन अभी जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार कार्यक्रम जोर पकड़ रहा है, कॉमन सेंस कहता है, की चीन कोई गुस्ताखी करके प्रेजिडेंट trump की जीत की राह आसान करने की गलती नहीं करेगा.
आगे बढ़ते हुए, भारत हो भूटान हो ताइवान हो या ताजीकिस्तान हो, चाइनीस ड्रैगन दूसरे देशो की जमीं पर नजर गड़ाए हुए है, लेकिन स्वयं चीन में खाने के लाले पड़े हुए हैं.
आप स्वयं देख लीजिये, एक महीने में दो वार चीन के तानाशाह को आह्वाहन करना पड़ा, की लोगों ने फ़ूड waste को कम करना चाहिए.
हम सभी ने बचपन में सीखा था, जो लोग दुसरो के लिए गड्ढा खोदते हैं, वही उसमे सबसे पहले गिरते हैं, लेकिन 67 साल के बूढ़े चीन के राजा को यह नहीं पता, कोई बात नहीं, परिणाम अब चीन की जनता को भुगतना पढ़ रहा है.
पहले कोरोना वायरस और बाद में बाढ़ के कारन चीन का खाद्य संकट गहरा चूका है.
इसलिए आप सभी का यह ऑब्जरवेशन एक दम सही रहा है, की चीन एक फर्जी ड्रैगन है, छिपकली है. क्योकि साल दर साल चीन में बम्पर फ़ूड प्रोडक्शन हो रहा है, एक साल जरा सी दिक्कत क्या आयी, चीन के लोगों की थाली से चावल गायब होने लगा है.
कोरोना संक्रमण काल में, एक तरफ भारत में खाद्य सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था भारत सर्कार ने की है, तो दूसरी तरफ चीन के लोगों को अपने पेट पर पट्टी बांधनी पढ़ रही है. यह बात और है, की हमारी मीडिया में हमेसा की तरह चीन का महिमा मंडन फिर भी चालू रहेगा.
इसी परिपेक्ष में आज ही भारतीय विदेश मंत्री ने अन्नौंस किया है, की भारत सर्कार मालदीव्स के कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए 400 मिलियन डॉलर लाइन ऑफ़ क्रेडिट के रूप में देगी, और 100 मिलियन डॉलर ग्रांट के रूप में मालदीव्स को दिए जायेंगे.
पॉइंट सिंपल है, राहत और बचाव कार्यक्रम हो अथवा इंफ्रास्ट्रक्चर और इकनोमिक डेवलपमेंट हो , इस कोरोना संकट के समय पर भी भारत अपने मित्र देशो का ख्याल रखने की हर संभव कोसिस कर रहा है.
अब आप में से कुछ लोग यह नेगेटिव प्रश्न पूछ सकते हैं, की मोदी सर्कार विदेशो पर पैसा क्यों उड़ा रही है, तो इसका आसान जवाब हमने पहले भी दिया है, लाइन ऑफ़ क्रेडिट के रूप में जो पैसा दिया जाता है, वह लौट कर अंत में भारत में ही आता है, क्योकि इन प्रोजेक्ट का काम या तो इंडियन कंपनी के द्वारा किया जाता है, अथवा इन प्रोजेक्ट में लगने वाला 75 से 80 फीसदी माल भारत से ही खरीदना होता है.
सरल सब्दो में भारतीय पैसा खर्च भले ही मालदीव के हाथो से होगा, लेकिन वह घूम फिरकर आएगा भारत में ही.
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