First Time - US Officer deployed in Indian Neval Center
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हम सभी को अच्छे से पता है, की हमारे हिन्द महासागर छेत्र में चीन खुरापात करने की जुगाड़ में लगा रहता है.
साउथ चाइना सी को गवाने के बाद अब अमेरिका को भी दर लगने लगा है , की कहीं इंडो पसिफ़िक रीजन उसके हाथो से ना निकल जाये.
आज अमेरिका को साउथ चाइना सी में फ्रीडम ऑफ़ नेविगेशन ऑपरेशन करने पड़ रहे हैं, यदि डेमोक्रेटिक देशो के बीच आपसी समन्वय नहीं बना तो वह दिन दूर नहीं है, जब इंडियन ओसेन में चीन के खिलाफ भारत और अमेरिका के सर पर फ्रीडम ऑफ़ नेविगेशन ऑपरेशन करने की जरूरत आन पड़ेगी.
वैसे आप सभी बहुत लम्बे समय से इस विचार को प्रकट कर रहे हैं, की लोकतान्त्रिक देशो ने कम्युनिस्ट चीन के खिलाफ ना सिर्फ स्ट्रेटेजिक बल्कि ऑपरेशनल लेवल पर भी मजबूत संगठन खड़ा करना होगा.
आपके इसी विचार को देखा जा सकता है, अमेरिका के द्वारा लिए गए निर्णय में.
जी हाँ दोस्तों, फाइनेंसियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने निर्णय लिया है, की उसका एक अधिकारी नियमित रूप से गुरुग्राम में स्थित इंडियन नेवी के इनफार्मेशन फ्यूज़न सेण्टर में तैनात होगा.
जैसा की हम सभी जानते हैं, की विशाल हिन्द महासागर के चप्पे चप्पे पर इंडियन नेवी की नजर है, और अमेरिकन नेवी की प्रजेंस इंडो पसिफ़िक रीजन में बढ़ती जा रही है. इसलिए यह लिएसन अफसर निश्चित करेगा, की इंडिया और US नेवी के बीच डे to डे एक्टिविटी के स्तर पर कोऑपरेशन और कोआर्डिनेशन बना रहे.
आपको सायद याद हो, मई महीने की शुरुआत में ओमान से आये फ़िलीपीन्स के जहाज जब भारतीय तट से फ़िलीपीन्स की और रवाना हुए, तो उनमे से एक जहाज में आग लग गयी .
तब इस दुर्घटना ग्रस्त जहाज ने दिल्ली में तैनात फ़िलीपीन्स के नौसैनिक अधिकारी को स्ट्रेस कॉल भेज दिया, जिसके बाद दोस्ती की कसौटी पर खरा उतरते हुए इंडियन नेवी ने आव देखा ना ताव और फ़िलीपीन्स की संकट में मदद की.
इस एक घटना से आपको लिएसन अफसर का महत्व समझ में आ गया होगा, यह अधिकारी ना केवल राहत और बचाव कार्यक्रम बल्कि किसी भी अन्य जॉइंट डिफेंसिव अथवा ओफ्फेंसिव ऑपरेशन में भी दो देशो की सेनाओ में सीमलेस क्विक कोऑपरेशन को बढ़ाता है.
अब आप में से कुछ लोग यह नेगेटिव कमेंट कर सकते हैं, की अमेरिका एक स्वार्थी देश है, इसलिए भारत ने अमेरिका पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
इस सवाल का जवाब यह है, की अमेरिका ने अपने नेवल अफसर को इंडियन नेवी के सेण्टर में तैनात कर दिया है, तो साथ में इंडियन नेवी को भी अपने दो अधिकारिओं को US इंडो पसिफ़िक कमांड और US स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड में तैनात करने का अधिकार मिल गया है.
कोरोना काल के बाद अमेरिका अपना लिएसन अफसर तैनात कर देगी, और इंडियन नेवी जल्द अपने अधिकारिओं को पोस्ट करने का मन बना चुकी है.
अब यदि अमेरिका अपने एक अधिकारी के बदले भारत को दो अधिकारी डेप्लॉय करने का अवसर दे रहा है, तो अमेरिका को स्वार्थी कहना कहाँ तक जायज होगा.
वैसे यदि कोई देश स्वार्थी है, तो इसमें बुराई ही क्या है, हर देश को स्वार्थी होना चाहिए. हमें केवल अमेरिका जैसे स्वार्थी और चीन जैसे दुश्मन देश में भेद करना आना चाहिए.
जहाँ तक हम समझ सकते हैं, यह लिएसन officer डिप्लॉयमेंट Indian और अमेरिकन नेवी के बीच Inter ऑपेराबिलिटी को बड़ा देगा.
हाल ही के दिनों में आपने देखा है, की अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर इंडियन ओसेन में तैनात किये हैं, पॉइंट सिंपल हैं, इंडिया और अमेरिका के बीच सहयोग की सम्भावना अनंत है, इसलिए बेहद जरूरी है, की एक ऐसे सिस्टम का विकास किया जाये, जिसकी मदद से इस सहयोग को रियल क्विक टाइम में अमली जमा पहनाया जा सके.
आप में से कुछ लोगों को यह छोटा सा निर्णय जान पड़ सकता है, लेकिन इस डेवलपमेंट का बड़ा महत्व तो भविस्य में पता चलेगा, जब भारत और अमेरिका चीन के नापाक इरादों पर समय पर पानी फेर देंगे. इसलिए इंडिया और अमेरिका के द्वारा उठाये गए इस प्रोएक्टिव कदम का हम सभी स्वागत करते हैं.
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