India is all set to end Chinese dominance!!
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यह बात ओपन सीक्रेट है, की इंडियन टॉयज मार्किट के ऊपर चीन का कब्ज़ा है. पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने 4 हज़ार करोड़ के खिलोने इम्पोर्ट किये, जिनमे 70 से 75 फीसदी हिस्सा चीन से आया था.
और ऐसा नहीं है, की यह केवल पिछले साल की कहानी है, साल दर साल चीन से भारत में खिलोनो का आयात बढ़ता ही रहा है, और यह जानने के लिए हमें किसी अर्थशास्त्री की जरूरत नहीं है, हम सभी ने इस सत्य का साकार रूप बाज़ारों में देखा है.
लेकिन अब ऐसा लगता है, की दिन बदलने वाले हैं, क्योकि कल ही मोदी जी ने वरिष्ठ मंत्रियो और अधिकारियो की मीटिंग का आयोजन किया, जिसका मुख्या उद्देश्य उन तरीकों की तलाश करना था, जिनकी मदद से ना केवल भारत में खिलोनो के उत्पादन को बढ़ाया जा सके, बल्कि दुनिया भर में इंडियन टॉयज का एक्सपोर्ट भी इनक्रीस किया जा सके.
अब आप में से कुछ लोग कह सकते हैं, की आज अचानक से मोदी सर्कार की नींद कहाँ से टूट गयी, और यह केवल चार दिनों की चांदनी है, फिर अँधेरी रात ही रहने वाली है.
लेकिन ऐसा नहीं है, यदि आप इस साल की शुरुआत में जाएँ, तो भारत सर्कार ने खिलोनो पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 परसेंट कर दिया था.
और अब १ सितम्बर से हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड्स भी चीन से इम्पोर्ट होने वाले टॉयज पर लगने वाले हैं.
पॉइंट सिंपल हैं, पहले इम्पोर्ट ड्यूटी को बढ़ाकर चीन के खिलोनो के सस्ता होने की खूबी को ख़तम कर दिया गया, और अब क्वालिटी की नीव पर चीन के लौ क्वालिटी टॉयज के इम्पोर्ट की राह में दिवार खड़ी की जा रही है.
इसलिए अब मोदी सर्कार जो टॉयज मैन्युफैक्चरिंग को बल देने की कोसिस कर रही है, वह पहले इम्पोर्ट ड्यूटी को बढ़ाना, अब क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को कड़ा करने के बाद उठाया गया सोचा समझा कदम है.
पॉइंट सिंपल हैं, जब इंडियन टॉयज इंडस्ट्री को डिमांड कन्फर्म हो जाएगी, तो वह लॉन्ग टर्म को ध्यान में रखते हुई प्रोडक्शन में इन्वेस्ट भी करने लगेंगे. और साथ में हमें उम्मीद है, की जल्द ही खिलोनो के छेत्र में भी मोदी सर्कार कोई आकर्सक स्कीम लेकर सामने आएगी.
सोने पर सुहागा वाली बात यह है, की ना केवल जोर इस बात पर है, की इंडियन टॉयज प्रोडक्शन को बढ़ाया जाना चाहिए, बल्कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर आधारित ऐसे खिलोनो को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति, इतिहास से जुड़े हों, साथ में भारतीय मूल्यों की भी शिक्षा देते हों.
वैसे मोदी सर्कार टॉयज मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक जो कदम उठा रही है, उन सब की मांग आप सभी लम्बे समय से कर रहे हैं.
जबकि बड़े बड़े अर्थशास्त्री कहते थे, की जब इंडियन मार्किट में चाइनीस टॉयज की बाढ़ आ जाये, तो इंडियन टॉयज इंडस्ट्री ने इस कम्पटीशन में जीतना चाहिए.
जबकि इन विद्वानों को अच्छे से पता था, की चाइनीस टॉयज इंडस्ट्री के सर पर चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी का हाथ है, फिर भी इंडियन टॉयज मनुफक्चरर्स को चाइनीस टॉयज की बाढ़ में डूबने के लिए बेसहारा छोड़ दिया गया.
परिणाम यह हुआ, की देखते ही देखते भारत में खिलोनो के उत्पादक चाइनीस खिलोनो के ट्रेडर बन गए.
जब इन बुद्दिजीविओ के अनुसार भारत सर्कार चलती थी, तब भी आप सभी का कहना था, की भारत ने पहले अपनी टॉय इंडस्ट्री को सहारा देना चाहिए, और जब वह अपने पांव पर खड़ी हो जाये, तो वह अपने आप पूरी दुनिया से मुकाबला कर लेगी.
अब आप स्वयं देख लीजिये, 20 साल के बाद आप सभी के विचार भारत सर्कार के कदमो में नजर आ रहे हैं, मोदी जी इस मुहीम में कितने सफल होंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन यह घटनाक्रम सिद्ध करता है, की डिग्रीधारी इकोनॉमिस्ट की तुलना में कॉमन सेंस के बल पर काम करने वाले आप सभी ज्यादा अकल्मन्द है.
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