Major Diplomatic Win for India

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https://en.mehrnews.com/news/162722/Rouhani-orders-implementation-of-new-Iran-India-tax-laws
https://www.ndtv.com/business/india-iran-sign-agreement-for-avoidance-of-double-taxation-dtaa-on-rouhanis-visit-1814117

https://www.incometaxindia.gov.in/Lists/Press%20Releases/Attachments/690/Press-Release-Signing-DTAA-India-Iran-17-February-2018-19-2-2018.pdf


पिछले महीने ही हमने चर्चा की थी,  मिडिल ईस्ट में कोरोना वायरस की सबसे तगड़ी मार झेल रहे ईरान की मदद के लिए मौके पर सबसे आगे आया था भारत.




परिणाम स्वरुप कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर दवाई रेमडिसवीर के उत्पादन के लिए ईरान की फार्मा कंपनी ने इंडियन कंपनी के साथ हाथ मिलाया.




ईरान के अधिकारियों का तो यहाँ तक कहना था, की भारत और ईरान की कंपनियों के सहयोग से बनी रेमडिसवीर अमेरिकन रेमडिसवीर  से क्वालिटी में कोई कम नहीं होगी, और वह साथ में सस्ती भी पड़ेगी.




बात साफ़ थी, डेथ to अमेरिका का नारा लगाने वाले ईरान को अमेरिकन दवाई के रूप में  जीवनदान भारत ने दिया था.




तब हम सभी को यह अफ़सोस था, की जबकि ईरान भारत को भला बुरा कहने का कोई मौका चुकता नहीं है, तो भारत क्यों ईरान की मदद कर रहा था.




फिर भी हमने नेकी कर उसे दरिया में डाल दिया था. लेकिन इस बार बहुत दिनों के बाद ईरान की तरफ से आ रही है एक अच्छी खबर.




वर्ष 2018 में भारत की यात्रा के दौरान ईरान के साथ हमारा एग्रीमेंट हुआ था, जिसने दोनों देशो के बीच इकनोमिक और ट्रेड रिलेशन को मजबूत करना था, साथ ही साथ इस समझौते के दम पर डबल टैक्सेशन और टैक्स की चोरी को भी रोका जाना था.




जबकि इस एग्रीमेंट के बल पर दोनों देशो के बीच इन्वेस्टमेंट टेक्नोलॉजी सहयोग और लोगों के बीच मेलजोल बढ़ना था, फिर भी २ साल से भी अधिक हो चुके थे, लेकिन इस समझौते को अमली जमा नहीं पहनाया गया.




हम सभी ने देखा है, इसी दौरान ईरान ने भारत से रिश्ते बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. और तो और ईरान ने भारत को चीन का डर भी जम कर दिखाया. इन सब उकसाबो के बाबजूद  ईरान से अपने सम्बन्धो को भारत ने कोई चोट नहीं पहुंचाई.




अब सायद भारत की इसी कूटनीति की जीत हमें देखने को मिली, जब पिछले महीने ईरान की पार्लियामेंट ने भारत के साथ समझौते  को लागु करने के लिए अपने कानून में बदलाव किया.




और आज ईरान के राष्ट्रपति ने इस नए कानून को लागू भी कर दिया, जिससे वर्ष 2018 के एग्रीमेंट पर अमल हो गया है.




अभी भी ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े अमेरिकी आर्थिक प्रतिबन्ध लगे हुए हैं, इसलिए हमें कोई ज्यादा उम्मीद नहीं है, की इस कानूनी बदलवाव से भारत और ईरान के सम्बन्ध कोई अचानक से रफ़्तार पकड़ लेंगे.




फिर भी यह देखने में हल्का सा अच्छा तो लगता है ही, भारत की नेकी ने ईरान पर असर दिखाया, और देर से ही सही लेकिन ईरान ने दुरुस्त कदम उठाकर भारत के साथ अपने समझौते का मान रखा.



आइये देखते हैं, ईरान और भारत के बीच सम्बन्ध अब कैसे आगे बढ़ते हैं.

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