South Korean Friendship - Indian hits Jack Pot

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https://economictimes.indiatimes.com/tech/hardware/samsung-likely-to-move-part-of-smartphone-production-to-india-plans-to-make-devices-worth-40-bn/articleshow/77582820.cms

https://www.anandtech.com/show/14930/samsung-stops-production-of-phones-in-china 


हमारे यहाँ लम्बे समय से यह विस्वास किया जाता रहा है, की चीन का माल भले ही कम क्वालिटी का हो, लेकिन वह सस्ता जरूर होता है.




कई बार चीन से होने वाले बेतहासा आयात को रोकने के खिलाफ यह तर्क दिया जाता है, यदि हमने ऐसा किया, तो भारत में महगाई आसमान छूने लगेगी.




लेकिन आज कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने वही बात कह दी, जो बात आप सभी लम्बे समय से कहते आ रहे हैं. फ़र्क़ सिर्फ इतना है, की उदय कोटक साहब ने मौका देखकर मुँह खोला है, जबकि आप सभी चीन का विरोध तब भी कर रहे थे, जब भारत और धोकेबाज चीन के बीच दोस्ती का नाटक चल रहा था.




सरल शब्दों में कोटक साहब का कहना है, हर सेगमेंट में चीन ने जान बूझकर शुरुआत में अपना माल सस्ता बेचा, परिणाम यह हुआ, की इंडियन मनुफक्चरर्स चीन से आये माल की बाढ़ में डूब गए, और जब कम्पटीशन ख़तम हो गया, तो चीन ने अपने माल की कीमतें बढ़ाना चालू कर दिया.




चीन की इस चाल से पहले दो भारत में उद्योग नस्ट हो गए, बेरोजगारी बड़ी और बाद में भारतीयों को चीन के सामान के लिए अपनी जेब भी ज्यादा ढीली करनी पड़ी.




इस प्रकार जहाँ भारत को हर तरफ से नुकसान हुआ, तो चीन के दोनों हाथों में लड्डू आ गए.


कास इन खास लोगों को यह आम बात कुछ सालों पहले समझ आ गयी होती, तो आज बात ही कुछ और होती, सब कुछ लुटा के हम होस में आएं, चलिए अब आगे की और देखते हैं.


इसी बीच चीन की चालाकियों से तंग आकर जब मोदी सर्कार ने मेक इन इंडिया और आत्मा निर्भर भारत की कैंपेन को बल दिया. 




तो हमारे यहाँ यह अफ़सोस कई बार सुनाई दिया, की अमेरिका और चीन ट्रेड वॉर के कारण सप्लाई चैन चीन से उखड तो रही है, लेकिन वह भारत में ट्रांसप्लांट होने के बजाय वियतनाम में शिफ्ट हो रही है.




हलाकि अमेरिका चीन ट्रैड टेंशन के शुरुआती चरण में यह ऑब्जरवेशन बिलकुल सही था. लेकिन तब भी हम सभी को उम्मीद थी, की देर सवेर वियतनाम की कैपेसिटी जवाब दे देगी, और सप्लाई चैन का फाइनल ट्रांसफर भारत की तरफ ही होगा.




अब लगता है, वह दिन करीब आने लगे हैं.




जैसा की आपको जानकारी होगी, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम में हिस्सा लेने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अच्छा रुझान दिखाया हैं. 22 कंपनियां १ अगस्त को भारत में मोबाइल का उत्पादन बढ़ाने में सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए लाइन में लग गयी थी.




पिछले साल ही सैमसंग ने चीन में मोबाइल की मैन्युफैक्चरिंग बंद कर दी थी, और साउथ कोरिया में भी लेबर कॉस्ट तेजी से बढ़ती जा रही थी.




इसी बैकग्राउंड में सैमसंग ने भारत में अपने सबसे बड़े मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन इस साल की शुरुआत में कर लिया था,  और अब सैमसंग भारत सर्कार की प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम में भाग लेकर 40 बिलियन डॉलर के फ़ोन अगले पांच सालों में भारत में ही बनाना चाहती है.




सोने में सुगंध वाली बात यह है, की इस स्कीम के अंतर्गत 25 बिलियन डॉलर के मोबाइल फ़ोन का एक्सपोर्ट करने की योजना सैमसंग ने बना ली है.




पॉइंट सिंपल हैं, की सैमसंग ना केवल इंडियन बल्कि ग्लोबल डिमांड को इंडियन सप्लाई से पूरा करने की जुगत लगा रही है.




इसलिए हमें उम्मीद है, की चीन और वियतनाम को पछाड़ कर भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरर बनेगा.




लोकतान्त्रिक मित्र देश साउथ कोरिया की कंपनी अपनी योजना में भारत को इतने बड़े स्तर पर शामिल कर सकती है, जरा आप कल्पना कीजिये, क्या दुश्मन कम्युनिस्ट चीन की कोई कंपनी अपने बड़े बड़े सपनो में भारत को स्थान कभी दे पाती??




अब जबकि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है, हमें शेख चिल्ली की तरह बातें करने से बचते हुए, इस स्कीम की प्रोग्रेस को देखना होगा, क्योकि हमारे सपने जमीं पर उतरते हैं या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा..

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