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जैसा की आप सभी को पता है, 11 अगस्त को अमेरिका ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए, B2 बॉम्बर्स को इंडियन ओसेन में तैनात कर दिया था.
ऐसा नहीं था, की अमेरिका ने इन B2 बॉम्बर्स को पार्किंग के लिए डिएगो गार्सिया में उतारा था, अब जैसा की खबरें सामने आ रही है, अमेरिका एक सुनयोजित योजना पर काम कर रहा है, जिसका उद्देस्य इंडो पसिफ़िक छेत्र में नंबर एक के दुश्मन चीन को कड़ा सन्देश देना है.
जबकि इस सप्ताह दो B2 बॉम्बर्स ने हिन्द महासागर से उड़ान भरी , तो साथ में दो B1 बॉम्बर्स ने अमेरिका से उड़ान चालू की, ठीक उसी समय ताल से ताल मिलाते हुए, दो और B1 बॉम्बर्स ने उड़ान भरी गुआम एयर बेस से.
अब आप स्वयं देख लीजिये, कितनी बड़ी स्केल का यह ऑपरेशन था, एक साथ पुरे के पुरे इंडो पसिफ़िक रीजन में अमेरिका के चार B1 बॉम्बर्स और 2 B2 बॉम्बर्स उड़ रहे थे.
और बात यही ख़तम नहीं हुई, जापान से चार F15 ईगल्स लड़ाकू विमानों ने भी इस एयर ड्रिल में भाग लिया, साथ ही साथ जापान के F35 fighter एयरक्राफ्ट ने भी इस युद्धाभ्यास में सिरकत करि.
जबकि चीन ताइवान के चारो और छोटी मोटी नेवल ड्रिल करके अपनी गर्मी शांत कर रहा था, तभी अमेरिका ने अपने मित्र देशो के साथ मिलकर रिकॉर्ड लेवल पर शक्ति प्रदर्शन किया.
जबकि आकाश में छह बॉम्बर दहाड़ रहे थे, तो ताइवान स्ट्रेट से अमेरिकन जंगी जहाज गुजर रहे थे.
इस तरह के आक्रामक डिप्लॉयमेंट को देखकर आपको अंदेशा हो सकता है, की कहीं हम एक विनाशकारी युद्ध की तरफ तो नहीं बढ़ रहे हैं.
तो आपको यह भी सायद पता हो, भले ही अमेरिका अपने लड़ाकू विमानों और जंगी जहाजों को चीन के मैदान में उतारे या ना उतारे, चीन तो बहुत पहले से अमेरिका से युद्ध लड़ने की साजिस पर कॉम कर ही रहा है.
इसलिए युद्ध का चुनाव करना या ना करना, यह विकल्प डेमोक्रेटिक देशो के पाश है ही नहीं. वैसे भी अपनी महत्वाकांक्षा से अंधे हुए चीन के तानाशाह ने पूरी दुनिया को अपना दुश्मन बना ही लिया है.
वैसे अमेरिका ही क्यों, हर वह देश जिसने चीन के खिलाफ आवाज उठायी, उस देश के खिलाफ चाइनीस ड्रैगन ने आग उगलना चालू कर दिया.
आप सभी ने देखा है, की बेगानी शादी में अब्दुल्ला की तरह दीवाना होकर जब पूरी दुनिया बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल हो रही थी, तब वह भारत ही अकेला था, जिसने चीन के खिलाफ झंडा बुलंद किया था.
और अभी तीन चार साल ही हुए हैं, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का नाम लेने तक से चीन के नेताओं की जुबान काँपती है.
पॉइंट simple हैं, पुरे के पुरे इंडो पसिफ़िक रीजन में भारत ही चीन का मुकावला कर सकता है, यह बात भले ही हम स्वीकार ना करें, चीन को यह सच्चाई क़ुबूल है. इसलिए दोकलाम हो या गलवान हो, चीन का मुख्या उद्देश्य भारत को पिछलल्गू बनाना है
इसी background में जब अमेरिकन एयरफोर्स और नेवी historical लेवल का पावर प्रोजेक्शन कर रही है, तो उनके अधिकारियो का साफ़ साफ़ कहना है, की इन लार्ज स्केल ऑपरेशन्स का उद्देस्य यह दर्शाना है, की अमेरिका अपने allies और पार्टनर्स के साथ हर मुश्किल में मजबूती से खड़ा रहेगा.
इसलिए हमें उम्मीद है, की भले ही अमेरिकन बॉम्बर्स इंडो पसिफ़िक रीजन में उड़ें हो, लेकिन अमेरिका के मेजर डिफेंस पार्टनर इंडिया के खिलाफ अक्साई चिन में खड़ी चीनी सेना को उनकी आवाज जरूर सुनाई दे गयी होगी.
जैसा की आप सभी का मत है, जबतक लोकतान्त्रिक देश एक साथ मिलकर खड़े हैं, तब तक कम्युनिस्ट चीन किसी भी एक डेमोक्रेटिक देश का बाल भी बांका नहीं कर पायेगा.
क्योकि लोकतान्त्रिक देशो के संगठन में शक्ति होती है, यह बात कम्युनिस्ट चीन को भी अच्छे से पता है.
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