Thank you to Japan & Israel for Helping India
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https://www.moneycontrol.com/news/world/the-japan-firms-behind-mauritius-oil-leak-ship-5687711.html
जैसा की आप सभी को याद होगा, पिछले महीने की 30 तारीख को भारत के सहयोग से मॉरिशस के लिए बनी नई सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग का उद्घाटन मोदी साहेब ने किया था.
इस सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग का प्रोजेक्ट समय से पहले और अनुमान से कम खर्चे में पूरा किया गया था, जिससे सिद्ध हो गया था, की किस प्रकार भारत अब अपने वादों पर खरा उतरने लगा है .
लेकिन था तो यह एक प्रोजेक्ट ही, जिसकी योजना कई बर्षो पहले बनायीं गयी थी, इसलिए यहाँ पर ध्यान रखना जरूरी है, की ना केवल प्लांड प्रोजेक्ट वल्कि unplanned एक्सीडेंट और नेचुरल डिजास्टर के समय भी भारत हिन्द महासागर में सबसे पहले सहायता मुहैया करवाता है.
वैसे भी जब हम पुरे हिन्द महासागर को अपना मानते हैं, तो हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
आपको सायद जानकारी हो, 25 जुलाई को जापान का क्रूड आयल का टैंकर शिप मॉरिशस के तट पर दुर्घटना ग्रस्त हो गया, और धीरे धीरे उससे कच्चा तेल रिसने लगा.
इस दुर्घटना के कारण मॉरिशस को इतना बड़ा खतरा पेश आया, की वहां की सर्कार ने इसे एनवायर्नमेंटल इमरजेंसी घोसित कर दिया , और पूरी दुनिया से सहायता मांगी. जिसके जवाब में फ्रांस और जापान ने मदद का हाथ भी आगे बढ़ाया.
जबकि मछलियों का मरना चालू हो गया था, पूरी कोसिस की जा रही थी, की जल्दी से जल्दी समुद्र के पानी पर तेल का फैलना सीमित किया जाये.
इसी दौरान मीडिया में यह सवाल किये जाने लगे, की जहाज किस कंपनी का था, इस दुर्घटना का दोष किसके सर पर धरा जाये, किससे कहा और कैसे गलती हो गयी.
लेकिन तब भी 4000 टन के दुर्घटना ग्रस्त आयल टैंकर से कच्चा तेल लगातार रिस कर पर्यावरण को अपूरणीय छति पंहुचा रहा था. और मॉरिशस सबसे ख़राब स्तिथि से निपटने की तयारी करने में जुट गया था.
तब इस आपदा में मॉरिशस की मदद की भारत ने, जी हाँ इंडियन आयल ने अपने हज़ार टन के खाली आयल टैंकर को मिशन पर लगा दिया, जो जापानी आयल टैंकर से तेल निकाल कर उसे सुरक्षित स्थानों पर स्टोर करने के काम में लग गया.
और 10 जुलाई को इंडियन आयल मॉरिशस ने फोटो साझा करके evacuation ऑपरेशन की प्रगति के बारे में सबको अवगत कराया.
अब आप स्वयं देख लीजिये, समस्या का समाधान कैसे निकाला जाता है.
जब सब लोग फैले हुए तेल को सोखने की कोसिस कर रहे थे, तब भारत ने समस्या की जड़ पर वार किया, ताकि और तेल फैलने से रोका जा सके.
हाँ यह बात सही है, की फैला हुआ तेल भी एक बहुत बड़ा खतरा है, और उससे निपटने के रस्ते भी तलाशे जाना चाहिए.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है, की जिस प्रकार भारत ने डैमेज को कण्ट्रोल करने में समय पर मदद की, उसे हम कम करके आंके.
ऐसा नहीं है, की मॉरिशस की मदद करने का हमें कोई घमंड है, पूरा का पूरा हिन्द महासागर हमारा है, इसलिए यहाँ पर किसी भी देश पर आये हुए संकट को हम भारतीय अपने ऊपर आया संकट मानते हैं.
साथ ही साथ हम यह भी देख रहे हैं, की जब भारत ने इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा को रस्ते में ही रोक दिया, हमारे देश में इसकी कोई चर्चा ही नहीं हो रही है.
हाँ यदि कही गलती से भारत से देरी हो जाती, अथवा कहीं मॉरिशस पर कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आन पड़ती, अथवा भारत से पहले चीन कहीं मॉरिशस की मदद कर देता, तो अभी तक हमारी मीडिया ने आसमान सर पर उठा लेना था.
कोई बात नहीं, जमाना ही ऐसा है, जहाँ पॉजिटिव न्यूज़ की तुलना में नेगेटिव न्यूज़ के कारोबार में ज्यादा मलाई उड़ाने का मौका मिलता है.
यह तो हो गयी बात भारत की, की किस तरह हम अपने मित्र देशो को हेल्प दे रहे हैं, लेकिन इसी दौरान भारत के दोस्त भी अपना कमाल दिखा रहे हैं.
एक और इसराइल ने अपने अत्याधुनिक आर्टिफीसियल इंटेलिजेन्स बेस्ड टेक्नोलॉजी और इक्विपमेंट एम्स के साथ साझा किये है, ताकि तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण को रोकने में भारत को थोड़ी सी सहूलियत मिल सके.
तो दूसरी और जापान ने १ मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता भारत में काम करने वाली जापानी कंपनियों को दी है, जिसका प्रयोग करके यह कंपनियां इंडियन आईटी कंपनियों के साथ मिलकर हेल्थ ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर के छेत्र में इनोवेटिव सोलुशन का विकास कर सके.
सरल सब्दो में भारत का विकास करने वाले प्रोजेक्ट को जापान सब्सिडी मुहैया करवा रहा है.
इसे कहते हैं, दोस्ती, भारत की हर संभव मदद करने के लिए इसराइल और जापान को धन्यवाद, हमें विस्वास है, यह दोस्ती दिन दूनी रात चौगुनी गति से मजबूत होती रहेगी.
अब आपमें से कुछ लोगों को भारत के बारे में इस तरह की अच्छी खबरें छोटी और बुरी लगें, तो हमारा सवाल आपसे यह होगा, की आखिर ऐसा क्यों है, की आपको भारत के बारे में हर बुरी खबर बड़ी और अच्छी लगती है??
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