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पिछले तीन चार महीनो से चल रहे पूर्वी लद्दाक सीमा विवाद के दौरान हमने कई बार देखा है, की भारतीय सैन्य बलों के पराक्रम और मोदी सर्कार की रणनीति के प्रति संदेह प्रकट किया गया.
जब भारतीय सेना को सपोर्ट की जरूरत थी, तब लगातार उनके खिलाफ सवाल खड़े किये गए. LAC पर चोरी छुपे चाइनीस सेना की आक्रामक तैनाती के कारण तनाव पैदा हुआ है, और आज भी भारतीय सेनाओ के तीनो अंग मिलकर मजबूती के साथ दुश्मन चीन का सामना कर रहे हैं, जबकि हार और जीत का फैसला अभी होना बाकि था, फिर भी इंडियन पक्ष को अखबारों में परास्त करने की पूरी कोसिस की गयी.
लेकिन आप सभी लगातार बिना सवाल पूछे भारतीय सेनाओ को सपोर्ट करते रहे. और आपका स्टैंड सही साबित हुआ आज, जब सबको पता चल गया, की भारत चीन के अगेंस्ट किस लेवल का गेम खेल रहा है.
जून महीने में गलवान फेस ऑफ के दौरान चालबाज़ चीन ने सायद ही इस बात की कल्पना की होगी, की लद्दाख में की गयी गुस्ताखी की कीमत उसे साउथ चाइना सी में चुकानी होगी.
जी हाँ, ANI की रिपोर्ट के मुताबिक गलवान फेस ऑफ के तुरंत बाद इंडियन नेवी ने अपने फ्रंट लाइन warship को तैनात कर दिया, साउथ चाइना सी में, जहाँ चीन को भारतीय युद्ध पोत की उपस्थिति बड़ी नागवार गुजरी.
और तो और इंडियन नेवी के वॉरशिप ने लगातार संपर्क बनाया हुआ है, अमेरिकन नेवी के साथ,
साथ ही साथ मल्लका स्ट्रेट और अंडमान निकोबार आइलैंड के पास के इलाको में इंडियन नेवी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया. पॉइंट सिंपल हैं, इंडियन डिप्लॉयमेंट सोची समझी रणनीति के साथ किया गया है .
अब भारत चीन के कबाब में हड्डी बन गया, तो चीन से ना खाते बन रहा है, और ना उगलते. इसलिए भारतीय पक्ष के साथ बातचीत के दौरान आश्चर्य चकित चीन ने अपनी आपत्ति भी दर्ज कराइ है.
चीन को जो दर्ज कराना हो दर्ज करा ले. अब वह लदाख में आगे बढ़ नहीं सकता है, और साउथ चाइना सी में पीछे नहीं हट सकता है. इस तरह से क्लासिकल डेडलॉक create हो गया है.
डोकलाम में भारत ने करके दिखाया था, same to same वही सिनेरियो गलवान face off के बाद भी क्रिएट हो गया है, और यह कोई अचानक से हमारे पासे नहीं पड़ गए हैं, भारतीय सेना के तीनो अंगों ने मिलकर एक सोची समझी रणनीति के साथ चीन के खिलाफ ताबड़ तोड़ कदम उठाये हैं.
पॉइंट सिंपल हैं, लद्दाक और साउथ चाइना सी दोनों जगह चीन की जीत नहीं हो सकती है. एक जगह तो उसे हारना पड़ेगा. भारत की जमीं दबाने का सपना देखने वाले चीन को अब दिखाई देने लगा है, की साउथ चाइना सी में उसके आर्टिफीसियल आइलैंड पर अब भारतीय तलवार लटक गई है.
यदि पुराने एग्रीमेंट के अनुसार LAC का सम्मान करते हुए चीन पीछे नहीं हटेगा, तो इंडियन नेवी भी साउथ चाइना सी से वापस नहीं लौटेगी.
चालू चीन इंडियन ओसेन में परमानेंट डिप्लॉयमेंट के सपने देखता ही रह गया, लेकिन बेवक़ूफ़ चीन ने खुद भारत को साउथ चाइना सी में परमानेंट डेप्लॉयमेंट के लिए निमंत्रण दे दिया.
अब तिलमिलाया हुआ चीन LAC के उस और अपनी सेना को तैनात कर रहा है, तो भारतीय सेना भी अनुपात के हिसाब से डेप्लॉयमेंट को बढ़ा रही है. बात साफ है, भारतीय सेना इस बार हर मुसीबत से निपटने के लिए तैयार है.
वैसे हम सभी को पता है, की यह एक काम्प्लेक्स घटनाक्रम है, जिसमे हर दिन स्थिति परिवर्तित हो रही है, इसलिए हमें अपनी सेनाओ पर कोई घमंड नहीं है, लेकिन उन पर गर्व और विस्वास जरूर है. हम उम्मीद करते हैं, की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के दांत खट्टे करने का कोई मौका हम नहीं छोड़ेंगे.
आज यह साफ़ हो जाना चाहिए, भले ही स्ट्रेटेजिक compulsion के कारण कई बार इंडियन आर्म्ड फोर्सेज अपने मुँह पर उंगली रखे रहती है, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं समझा जाना चाहिए, की उन्होंने कुटिल चीन का दुस साहस पचा लिया है.
वैसे आज इंडियन नेवी के डिप्लॉयमेंट के बारे में हम सभी को पता तो चल गया है, लेकिन आप सभी लम्बे समय से मांग कर रहे हैं, की चीन के खिलाफ लड़ाई को हमें साउथ चाइना सी में ले जाना होगा.
हर बार डिफेंसिव बने रहने के बजाय हमें आक्रामक होना चाहिए. इसलिए आप सभी को आज बहुत बहुत बधाई, क्योकि आज आपकी स्ट्रेटेजी इंडियन Navy की तैनाती में साफ़ साफ़ दिखाई दे रही है.
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