Victory for India - Nepal is Thankful for Indian Help
पिछले कुछ वर्षो में चालबाज चीन ने नेपाल के ऊपर ऐसे डोरे डाले, की नेपाल भारत से धीरे धीरे दूर होता चला गया.
यहाँ तक की भारत की जमीं पर अपने दावे को दम देने के लिए नेपाल की वर्तमान सर्कार ने मनमाने अंदाज़ में नए मानचित्र भी जारी कर दिए.
हमारे यहाँ वुद्धिजवी वर्ग ने हमेसा यह ज्ञान दिया है, की नेपाल के साथ सम्बन्धो को मजबूत करने के लिए भारत ने ये करना चाहिए,
वो करना चाहिए.
कभी कभी तो ऐसा लगता था, मानो नेपाल के साथ दोस्ती निभाने का ठेका अकेला भारत ने ले रखा हो.
साथ में जमीनी सच्चाई भी यही बतलाती है, क्योकि भारत के साथ रिश्तो को तार तार करने की कोई कसर नेपाल की वर्तमान सर्कार ने नहीं छोड़ी. यह तो भारत ही था, जिसके कारण अभी भी नेपाल और भारत के बीच ऐतिहासिक संबधो में कोई दरार पैदा नहीं हुई.
वैसे भी वैश्विक राजनीती के खेल में चीन की तरफ से आगे बढ़ाया गया नेपाल मात्र एक प्यादा ही था, इसलिए आप सभी ने कई बार यह विचार प्रकट किया, की नेपाल को नजरअंदाज करते हुए, भारत ने अपनी हर परेशानी की जड़ यानि कम्युनिस्ट चीन पर वार करना चाहिए.
यह तो हो गयी बैकग्राउंड की बात. लेकिन आप सभी को आज भी अच्छे से याद होगा, मई महीने में नेपाल के प्रधान मंत्री ने कहा था, की इटालियन और चाइनीस कोरोना वायरस की तुलना में इंडियन कोरोना वायरस ज्यादा खतरनाक है.
किस देश का कोरोना वायरस कितना घातक है, यह तो नेपाल के प्रधान मंत्री को पता था, लेकिन तब उन्होंने यह नहीं सोचा, की असल चाइनीस वायरस से उन्हें बचाएगा कौन??
आज देखिये, नेपाल का ऊंट आ गया भारतीय पहाड़ के नीचे.
नेपाल की सर्कार ने कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर रेमडिसवीरड्रग की सप्लाई को भारत की तीन कंपनियों से सुनिश्चित कर लिया है.
और तो और नेपाल के अधिकारी का तो यहाँ तक कहना था, की भारतीय कंपनियों से इस दवा की सप्लाई आसान थी, साथ में इंडियन रेमडिसवीर की कीमत भी कम थी.
अब आप स्वयं देख लीजिये, मौका पड़ने पर काम आया न चाइना और ना ही पाकिस्तान, एक ही झटके में नेपाल की रस्सी भी जल गयी, और बल भी निकल गया.
लेकिन हमें कोई झूटी उम्मीद नहीं है, की इंडियन ड्रग सप्लाई के कारण नेपाल की भारत विरोधी सर्कार का ह्रदय अचानक से परिवर्तित हो जायेगा.
फिर भी बड़ा सवाल यही है, आखिर कब तक हम इन देशो को भारत के खिलाफ काम करने का पुरूस्कार देते रहेंगे??
भारत को भला बुरा कहना, नेपाल में फ़ैशन बन चूका है, भारत के खिलाफ जहर उगलने के कारण ही नेपाल की वर्तमान सर्कार की सांसे चल रहे है.
इसलिए भले ही मानवता और हिस्टोरिकल रिलेशनशिप को ध्यान में रखते हुए, आज भारत इस कोरोना ड्रग की नेपाल को सप्लाई करता रहे, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं होगा, की नेपाल भारत की उदारता को भारत की कायरता समझने की गलती कर वैठे.
वैसे नेपाल कोई अकेला नहीं है, हमने पहले भी चर्चा की है, की वह भारत ही था, जिसने ईरान के लिए रेमडिसवीर की सप्लाई सुनिश्चित की थी.
यहाँ तक की दिन रात भारत की मौत की साजिस रचने वाला टर्की भी भारत से हवाई जहाज भर भर के दवाये खरीद रहा है.
यही हाल है, पाकिस्तान का, जिसकी सांसे आज भी भारत से भेजी गयी दवाओं के दम पर चल रही है.
इसलिए कहीं ना कहीं हमें संतुलन बनाना होगा, यह बात सही है, की मानवता और व्यापार को मद्दे नजर रखते हुए, भारत ने दोस्त और दुश्मन का भेद किये बिना दवाये सप्लाई करना चाहिए.
लेकिन फिर भी हमने इन देशो को अहसास तो दिलाना ही चाहिए, की भारत इनका कितना भला कर रहा है. इसलिए यदि भारत इन देशो को ड्रग्स का एक्सपोर्ट नहीं रोक सकता, तो कम से कम हमने यह प्रचार तो करना चाहिए, की दिन रात भारत को गालियां देने वाले देश जीवनदान के लिए भारत पर ही निर्भर हैं.
आपके अनुसार इन देशो को ड्रग एक्सपोर्ट के सम्बंद में भारत ने क्या करना चाहिए?
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