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https://en.wikipedia.org/wiki/ASEAN%E2%80%93India_Free_Trade_Area

https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/foreign-trade/india-asean-free-trade-agreement-review-can-double-bilateral-trade-hardeep-puri/articleshow/77353430.cms?from=mdr#:~:text=potential%20for%20collaboration.-,The%20Asean%20Agreed%20to%20India's%20request%20for%20review%20of%20the,to%20%2421.8%20billion%20in%20FY19.&text=As%20per%20the%20release%2C%20Cambodia%20and%20Philippines%20suggested%20FTAs%20with%20India.

https://www.business-standard.com/article/economy-policy/india-seeks-stronger-rules-of-origin-as-it-urges-asean-for-fta-review-120083000397_1.html

https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/india-reviews-continuation-of-trade-pact-with-asean/articleshow/77295469.cms


हम सभी हमेसा से फ्री and फेयर ट्रेड एग्रीमेंट की हिमायत करते आ रहे हैं.




भारत और 10 आसियान देशो के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अस्तित्व में आया वर्ष 2010 में, 10 साल पुरे होने को हैं, लेकिन एक साल भी ऐसा नहीं गुजरा, जिसमे इन १० देशो के साथ व्यापर करने से भारत को कुल मिलाकर लाभ हुआ हो .




आज जो हमारे देश में किसानो के मसीहा बने फिरते हैं, क्या वह यह जवाब देंगे, की उन्होंने कई सालों के मोल भाव के बाद ऐसे एग्रीमेंट में शामिल होने का फैसला क्यों लिया, जिसके बाबजूद आसियान देश भारत के चावल पर 50% टैक्स लगाते रहे, जबकि आपस में एक दूसरे के राइस पर मात्र 35 प्रतिशत ड्यूटी लगायी गयी.




आप ही बताएं, क्या इस तरह के एक तरफा फौल्टी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय किसानो की गरीबी का कारण नहीं है??




चावल छोड़िये, नादाँ होने का नाटक करने वाले ये देश अपना माल भारत में डंप करते, तो हमें फिर भी बात समझ आ जाती, लेकिन इन देशो ने अपने रस्ते से चीन के माल की बाढ़ भारतीय बाज़ारो में भेज दी.




और यह कोई ऐसी बात नहीं है, जो की सीक्रेट है, आप सभी को पता है, की इन फ्री अनफेयर ट्रेड एग्रीमेंट से भारत को लाभ की तुलना में घाटा ज्यादा खाना पड़ा है.




इसी घोर अन्याय को देखते हुए, पिछले साल सितम्बर में भारत ने मांग करि, की 10 सालों के बाद ही सही लेकिन इस फ़र्ज़ी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का रिव्यु होना चाहिए. और तब ये देश भी तैयार हो गए थे रिव्यु के लिए.




पिछले सितम्बर से आज 1 साल पूरा होने को है. लेकिन इन 10 आसियान देशो के कान पर जूं तक नहीं रेंगा . आप ही बताएं, ये जिस डाल पर बैठे हैं, भला उसे ही क्यों काटेंगे?




जबकि पिछले साल ही भारत ने चीन के नेतृत्वा वाले RCEP को अलविदा कह दिया था, फिर भी यह आसियान देश बहाने बनाते रहे, की पहले इनका RCEP एग्रीमेंट फाइनल हो जाये, तो फिर बाद में यह भारत के साथ FTA भी रिव्यु कर लेंगे. अब आप ही बताएं, इस बात का क्या लॉजिक है, इन देशो के RCEP से भारत को क्या लेना देना.




जब सीधी उंगली से घी नहीं निकला, तो इस महीने भारत ने उंगली टेडी करने का निर्णय ले लिया. और इन देशो को साफ़ साफ़ बतला दिया गया, यदि इस साल के अंत तक FTA का रिव्यु चालू नहीं हुआ तो, एक तरफा निर्णय लेकर इस एग्रीमेंट से भारत निकल जायेगा.




इधर भारत ने डिप्लोमेटिक अंदाज़ में धमकी दी, उधर आसियान के 10 के 10 देशो के होश ठिकाने पर आ गए. और पिछले शनिवार को हुई वर्चुअल बैठक में इन देशो ने लाइन पर आते हुए, अपने अपने अधिकारियो को रिव्यु का स्कोप निर्धारित करने के लिए आदेश जारी कर दिए.




सरल सब्दो में इस रिव्यु का मुख्या उद्देश्य अनफेयर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फेयर बनाना है, ताकि इस एग्रीमेंट में शामिल सभी देशो को बराबर उसका लाभ मिल सके, और चीन जैसा कोई  बहार का देश इस एग्रीमेंट का नाजायज़ फायदा ना उठा पाए.






लेकिन पिछले 10 सालों में इन १० देशो को भारत के हिस्से की मलाई उड़ाने की बुरी लत लग चुकी है, इसलिए आदेश जारी करने के बाद भी यह रिव्यु की राह में रुकावट पैदा करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. इस बात का हमें पूरा अंदेसा है.




हमें विश्वास है, की मोदी सर्कार रिव्यु प्रोसेस को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कोसिस करती रहेगी. और यदि यह देश अभी भी नहीं सुधरे तो भारत ने इस एग्रीमेंट से बहार निकलने की धमकी पर अमल करके दिखाना चाहिए. आप ही बताएं, फ्री और अनफेयर एग्रीमेंट में शामिल रहकर हम कब तक इन तथाकथित दोस्त देशो को को भारत लूटने का लाइसेंस दे सकते हैं??




पॉइंट सिंपल है, जब अन्याय भारत के साथ हो रहा है, तो आवाज़ भी भारत को ही उठानी पड़ेगी, नहीं तो इन देशो की चांदी तो होती ही रहेगी.

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