Well Done India - Chabahar Port hits New Record

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https://www.theweek.in/news/world/2020/05/08/how-iran-chabahar-port-boosts-india-role-during-the-pandemic.html

https://financialtribune.com/articles/domestic-economy/104532/over-66k-tons-of-brazilian-sugar-being-unloaded-at-chabahar

https://en.mehrnews.com/news/162769/India-s-sugar-consignment-to-Afghanistan-arrives-in-Chabahar

https://www.tehrantimes.com/news/451746/Vessel-carrying-Indian-sugar-for-Afghanistan-arrives-in-Chabahar

https://www.hindustantimes.com/india-news/pakistan-s-follow-up-action-on-terror-tag-for-taliban-leader-is-an-invite-for-talks/story-K1kLaZAoEfbs4kYqpe0YnJ.html

पिछले कुछ महीनो में हमने कई तरह की रिपोर्ट पड़ी, जिनमे बताया गया, की भारतीय चाबहार प्रोजेक्ट फंस चूका है, और चाबहार रेलवे लाइन प्रोजेक्ट से ईरान ने भारत को बहार निकाल दिया.




लेकिन बाद में आधिकारिक रूप से भारत और ईरान ने क्लियर कर दिया था, की इंडिया अभी भी चाबहार रेलवे लाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा है, और ईरान में भारत के राजदूत ने पिछले महीने आधिकारिक रूप से कहा था, भारत चाबहार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, उसने इस पोर्ट के लिए नए इक्विपमेंट खरीदने के आर्डर भी दे दिए हैं, साथ ही साथ भारत ने अमेरिका से भी दो टूक सब्दो में कह दिया है, की भारत को चाबहार पोर्ट पर  क्या करना है, और क्या नहीं, इस बात का निर्णय अमेरिका नहीं कर सकता है.




और ऐसा नहीं है, की भारत ईरान में हवावाजी कर रहा है. पिछले सप्ताह ही भारत से गेंहू का सांतवा शिपमेंट चाबहार पोर्ट पंहुचा. इस प्रकार भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को 75 हज़ार टन गेहू दान में देने का निर्णय लिया था, और अब तक भारत 43 हज़ार टन गेंहू भेज चूका है.




ऐसा नहीं है, की भारत अफ़ग़ानिस्तान को केवल गेंहू ही supply कर रहा है, आज इतिहास बनाते हुए, इंडियन प्राइवेट कंपनी का शुगर कार्गो शिप भी चाबहार पोर्ट पर पहुंच चूका है.




अभी 1890 टन शुगर के कंटेनर्स अनलोड हो रहे हैं ,और जल्द ही उन्हें जमीनी रास्ते से अफ़ग़ानिस्तान भेज दिया जायेगा.




अभी तक अफ़ग़ानिस्तान की अधिकतर शक्कर की जरूरत को पाकिस्तान पूरा किया करता था, लेकिन अब अफ़ग़ानिस्तान को शुगर का एक और नया सोर्स मिल गया है.






आप सभी जानते हैं, की निर्भरता शोषण को जन्म देती है. इसलिए यदि गेंहू और शक्कर के मामले में अफ़ग़ानिस्तान की पाकिस्तान पर डिपेंडेंस को कम किया जा सके, तो यह एक बड़ी सफलता मानी जानी चाहिए.




यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है, की भारत तो चाबहार पोर्ट के रस्ते अफ़ग़ानिस्तान को शक्कर भेज रहा है ही, पिछले महीने ब्राज़ील से 66 हज़ार टन शक्कर ईरान ने मंगाई थी, जो चाबहार पोर्ट पर ही अनलोड हुई थी.




ईरान भले ही भारत के खिलाफ कड़वे बोल बोलता रहे, लेकिन भारत के पोर्ट के दम पर ही आज इरेनियन्स का मुँह मीठा हो रहा है.




अभी कल ही हमने चर्चा की थी, भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में भारत के साथ वर्ष 2018 में हुए समझौते को अमली जामा पहुंचाने के लिए ईरान ने अपने कानून तक में बदलाव कर लिया.


चाबहार पोर्ट हो अथवा कोरोना वायरस के खिलाफ दवाई हो, भारत ने तो नेकी करके दरिया में दाल दिया था, इसलिए यह देखने में अच्छा लगा, की भारत की नेकी ईरान पर थोड़ा ही सही लेकिन असर तो दिखा रही है.


ईरान भारत के सम्बन्धो में थोड़ी सी खटास क्या आती है, मीडिया में बात का बबाल बन जाता है, लेकिन कई दिन हो चुके  हैं, ईरान ने भारत के साथ समझौते को लागु  कर दिया. लेकिन हमारे यहाँ इस सफलता की कोई चर्चा ही नहीं होती है.




जबकि भारत ईरान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों का भला कर रहा है, आप सभी ने देखा है, इसी सप्ताह पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से तालिबान को बातचीत के लिए आमंत्रित किया.




पॉइंट सिंपल हैं, जब पाकिस्तान विनाश की साजिस करना नहीं छोड़ रहा है, तो हम क्यों निर्माड की योजना पर काम करना बंद कर दें? 



जबकि हम इस नेक काम में लगे हुए हैं, हमें कोई गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए, ईरान  अथवा अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले खतरों के प्रति हम सभी सजग रहेंगे, इसी एक विस्वास के साथ हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.

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