Well Done Indian Air Force
यदि आप हमें प्रोत्साहित और सपोर्ट करना चाहें, तो आप Google Pay, Phone Pe नंबर - +917649046884 पर हमें डोनेट (any amount) कर सकते हैं. Thank You!!
http://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/India-Lebanon_Relations.pdf
आप सभी को स्वतंत्रता दिवश की हार्दिक शुभकामनायें.
जब हम आजादी का दिन मना रहे हैं, तो यह चर्चा करना भी प्रासंगिक है, की किस प्रकार इंडियन एयरफोर्स अपने काम पर आज भी डटी हुई हैं.
जैसा की आप सभी को जानकारी होगी, 4 अगस्त को लेबनान की राजधानी में हुए भीसड़ विस्फोट में जान और माल की भयंकर हानि हुई, और बड़ी संख्या में लोगों के घर नस्ट हो गए.
जबकि लेबनान इस संकट का सामना कर रहा है, तब मदद के लिए आगे आया भारत, जिसने एयरफोर्स के विमान से आज 58 मीट्रिक टन दवाइयां और खाद्य पदार्थ लेबनान को सप्लाई किये.
साथ ही साथ भारत से सर्जिकल ग्लोब्स और सर्जिकल गाउन्स भी लेबनान को सप्लाई किये जा रहे हैं, जो कुछ ही दिनों में लेबनान पहुंच जायेंगे.
बात साफ़ है, भारत न केवल लेबनान के लोगों की भूख बल्कि कोरोना वायरस से उनके बचाव की भी पुख्ता व्यवस्था में लगा हुआ है.
यहाँ पर लेबनान की मदद करके भारत ने एक बार फिर साफ़ कर दिया, की भारत एक विस्वस्नीय पार्टनर है. और हमें उम्मीद है, भविस्य में इंडिया और लेबनान के बीच के सम्बन्ध और मजबूत होंगे.
लेकिन जो लोग इतिहास से नहीं सीखते हैं, वह वर्तमान का शिकार बनते हैं.
बात है वर्ष 2012 की जब इसराइल और हेज़बोल्लाह के बीच युद्ध छिड़ गया, तब 34 दिनों तक इसराइल ने लेबनान के ऊपर ताबड़ तोड़ बम बरसाए, जिसके कारण लेबनान की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी छती पहुंची.
तब भारतीय संसद में लेबनान के ऊपर इसरायली बमबारी की निंदा की गयी, और युद्ध विराम का आह्वाहन किया गया. प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी ने 10 करोड़ की आर्थिक सहायता दी, और इंडियन एयरफोर्स के विमान से राहत और वचाव सामग्री लेबनान को सप्लाई की गयी.
लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के स्टेटमेंट में साफ साफ़ लिखा हुआ है, की जबकि भारत ने भरपूर कोसिस की और भारत लेबनान भी भलाई चाहता है, फिर भी भारत और लेबनान के बीच रिश्ते आगे नहीं बढ़ पाए.
अब आप ही बताएं, जिस दवाई ने वर्ष 2012 में असर नहीं दिखाया, क्या वह वर्ष 2020 में अचानक से काम करने लगेगी??
पॉइंट सिंपल हैं, हमें डाउट है, की भारतीय मदद के कारण लेबनान का भारत के प्रति ह्रदय परिवर्तित अचानक से हो जायेगा.
एनीवे कोसिस करने में कोई हर्ज़ नहीं है, वैसे भी मानवता की मदद करने में भारत सबसे आगे रहने वाले देशो में से हैं.
इसलिए भारत ने लेबनान की मदद तो कर दी, लेकिन अब हमने नेकी कर दरिया में डाल देना चाहिए.
इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री के अधिकारियो द्वारा ट्विटर पर यह लिखना आसान है, की इंडिया और लेबनान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध हैं. लेकिन इतिहास तो कोई दूसरी कहानी बयां करता है,
चलिए कोई बात नहीं, दोनों देशो के बीच रिश्ते तो सुधरते रहेंगे बाद में भी, लेकिन हमें अभी कम से कम यह इंतजार है, की क्या लेबनान की सर्कार इस बार हम इंडियंस को मदद के लिए धन्यवाद देगी??
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें