Afghanistan Thanked India for Strong Support
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https://timesofindia.indiatimes.com/world/south-asia/afghan-govt-remains-grateful-to-indias-commitment-solidarity-with-afghanistan-acting-fm/articleshow/78092142.cms
https://thediplomat.com/2020/09/no-exit-from-indias-afghanistan-dilemma/
https://www.hindustantimes.com/india-news/us-special-envoy-khalilzad-to-reach-pakistan-today-new-delhi-next-stop/story-Kn3AyU9wOFiDVBzRna25kJ.html
जैसा की आपको जानकारी होगी, अमेरिका और तालिबान के बीच पीस डील होने के छह महीने बाद आखिर कार पिछले सप्ताह इंट्रा अफ़ग़ान टॉक्स भी चालू हो गयी.
और इस कार्यक्रम में भारत की तरफ से भाग लिया था, विदेश मंत्री जी ने. जिसमे उन्होंने साफ़ कर दिया था, की अफ़ग़ान जमीं का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों को प्रायोजित करने के लिए नहीं होना चाहिए.
और आज अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री जी ने ट्वीट करके अफ़ग़ानिस्तान में शांति की स्थापना के लिए भारत के प्रयासो की प्रशंसा की, और अफ़ग़ानिस्तान के प्रति कमिटमेंट और भाईचारा दिखाने के लिए भारत को धन्यवाद दिया.
इसीलिए छोटा सा सवाल यह है, की आज अफ़ग़ान सर्कार भारत को थैंक यू क्यों बोल रही है, उसका कारण यह है, की भारत ने हर मौके पर लोकतान्त्रिक अफ़ग़ान सर्कार का साथ दिया है.
यहाँ तक की जब बड़े बड़े विद्वान अख़बारों में मुफ्त का ज्ञान बांटा करते थे, की अब भारत ने ढलते सूरज अफ़ग़ान सर्कार को छोड़कर उगते सूरज तालिबान का हाथ थाम लेना चाहिए.
और तो और मीठे मीठे स्टेटमेंट जारी करके तालिबान की तरफ से भी भारत के ऊपर डोरे डालने की जमकर कोसिस की गयी.
हमें अच्छे से याद है, उस कठिनाई से भरे माहौल में भी आप सभी का साफ़ तौर पर मत था, की अफ़ग़ान पीस टॉक का कोई भी अंजाम हो, भारत ने एन मौके पर अपना पाला नहीं बदलना चाहिए.
और हम सभी का लॉजिक बेहद सिंपल था, जब पाकिस्तान ने पिछले तीस चालीस सालों में तालिबान का साथ नहीं छोड़ा, तो भला भारत क्यों चंद महीनो की पीस टॉक के कारण डेमोक्रैटिक अफ़ग़ान सर्कार को अकेला छोड़ दे.
आज अफ़ग़ान सर्कार का ट्वीट दर्शाता है, की वह इंडियन स्टैंड की वैल्यू को समझते हैं.
और इसी बीच अफ़ग़ान पीस टॉक में शामिल अमेरिकन स्पेशल रिप्रेजेन्टेटिव आज पाकिस्तान से होकर कल भारत आने वाले हैं.
कोई बहुत पहले की बात नहीं है, जब अमेरिकन रिप्रेजेन्टेटिव भारत को छोड़कर पूरी दुनिया का दौरा किया करते थे. जब वह भारत को इग्नोर करते थे, तब हमारी मीडिया में यह बात बड़ी हाईलाइट की जाती थी, लेकिन अब वह भारत को हर मौके पर शामिल कर रहे हैं, तो इसे भारत की बड़ी हुई भूमिका के रूप में दिखाने से बचने की कोसिस जारी है.
जबकि अभी भी अफ़ग़ान सिनेरियो बहुत काम्प्लेक्स है, और हमें निश्चित रूप से नहीं पता, की आगे क्या होने वाला है. लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए, की अफ़ग़ान सर्कार की तरफ से इस पीस प्रोसेस को लीड कर रहे हैं, भारतीय मित्र अब्दुल्ला अब्दुल्ला. इसलिए हमें कोई डरने की जरूरत नहीं है, की अचानक से आसमान हमारे सर पर आन गिरेगा.
आपको अच्छे से याद होगा, कुछ ही महीनो पहले की तो बात है, जब अफ़ग़ानिस्तान में दो दो राष्ट्रपति हुआ करते थे, तब इस डेड लोक को ना तो अमेरिका की मनी पावर और ना ही मसल पावर तोड़ पायी, तब वह इंडियन सॉफ्ट इंटरवेंशन थी, जिसके कारण आज अफ़ग़ानिस्तान में एक राष्ट्रपति का राज कायम है.
पॉइंट सिंपल हैं, हमें अपने दुश्मन की चालों पर नजर रखनी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है, की हम अपनी रणनीत पर ही शक करने लगे.
मीडिया में आज भी यह इम्प्रैशन क्रिएट किया जाता है, की अफ़ग़ानिस्तान के चक्रव्यूह से निकलने का भारत के पास कोई रास्ता नहीं है. यह बात सच भी हो सकती है, लेकिन आप ही बताएं, भला फैसला होने के पहले हम हार क्यों मान लें.
आइये देखते हैं, की अफ़ग़ान पीस टॉक अब और कैसे आगे बढ़ती है?
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