Good News - Maldives Thanked India for Historic Help
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https://www.livemint.com/news/india/india-provides-250-million-worth-financial-assistance-to-the-maldives-11600589918028.html
https://theprint.in/diplomacy/india-extends-250-million-support-to-maldives-to-overcome-economic-impact-of-covid-19/506718/
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जैसा की हम सभी को पता है, कोरोना की सबसे तगड़ी मार पड़ी है, टूरिज्म एंड hotel इंडस्ट्री को.
ऐसा ही दुखद अनुभव रहा है, मालदीव्स का भी. क्योकि मालदीव्स की कुल कमाई का 33 फीसदी से भी अधिक हिस्सा पर्यटन से जुड़े व्यापार से आता है.
लेकिन भारत की ही तरह कोरोना ने यह पूरा व्यापार मालदीव्स में भी चौपट कर दिया है. सायद यही कारण है, कुछ दिनों पहले इंडिया फर्स्ट की पालिसी पर काम करते हुए मालदीव्स के राष्ट्रपति ने मोदी साहेब को फ़ोन करके आर्थिक सहायता की मांग करि.
तो अब भारत ने भी पड़ोसी फर्स्ट की नीति का पालन करते हुए, आज मालदीव्स को 250 मिलियन डॉलर की फाइनेंसियल Assitance मुहैया करवाई है.
अच्छी बात यह है, की मालदीव्स अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक हालत को ठीक करने के लिए इस धन का प्रयोग कर सकता है.
अब आप यह जायज सवाल कर सकते हैं, की जब हमारा खुद का गरीबी में आटा गीला हो रखा है, तो भला मोदी सर्कार पड़ोसियों पर पैसा क्यों उड़ा रही है.
तो इसका जवाब यह है, की यह कोई ग्रांट नहीं है, बल्कि यह आर्थिक मदद एक विशेष प्रकार के लोन के तहत मालदीव्स की राजधानी में स्थित स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की ब्राँच के द्वारा दी जा रही है.
मालदीव्स को साल में दो बार व्याज चुकाना होगा, और 10 सालों के बाद मालदीव्स को मूलधन की अदायगी चालू करनी होगी.
इस प्रकार भारत ने बेहद अच्छी शर्तो पर मालदीव्स के लिए फंडिंग की व्यवस्था की है, और हमें उम्मीद है, की मालदीव्स की सर्कार ट्रेज़री बांड सेल से मिले इस कर्जे को समयानुसार चूका पायेगी.
हालाँकि यह बात सही है, की हाल फिलहाल तो SBI को यह पैसा मालदीव्स को देना होगा. लेकिन हम सभी को अहसास है, की यदि भारत मालदीव्स की मदद करने से हिचकिचाता तो मालदीव्स को चीन के आगे हाथ फ़ैलाने के लिए मजबूर होना पड़ता.
इतिहास गवाह है, की पहली बार भारत इतनी आसान शर्तो में किसी देश को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है. हम उम्मीद करते हैं, की भारत के द्वारा दी गई इस मदद को मालदीव्स भारत की मजबूरी समझने की गलती नहीं करेगा.
मालदीव्स का टूरिज्म पोटेंशियल हम सभी को पता है, इसलिए कोरोना के काले बादल छटने के बाद यह उम्मीद की जा सकती है, की मालदीव्स की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने में ज्यादा समय नहीं लगाएगी.
वैसे यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है, जब भारत ने मालदीव्स की मदद की है, पिछले कुछ समय में न सिर्फ खाद्यान्न , और दवाये भारत ने मालदीव्स को मुहैया करवाई है, साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद करने के लिए भारत ने कोरोना वार्रिएर्स डॉक्टर्स एंड नर्सेज की teams भी मालदीव्स में भेजी हैं.
बात साफ़ है, मित्र देशो की मदद करना हमारा इतिहास रहा है, लेकिन साथ में हम अपेक्षा करते हैं, की यह पडोसी देश भविस्य में फिर भारत के लिए खतरे का सबब नहीं बनेंगे.
वैसे इस कोरोना काल ने दुनिया की आँखे जरूर खोल दी हैं. बहुत पुरानी बात नहीं है, जब चीन के राजा पूरी दुनिया में ब्लेंक चेक बाटते फिरते थे. लेकिन अब समुद्र हो पर्वत हो या आसमान हो, हर जगह हर मोर्चे पर वह अपना असली रूप दिखा रहे हैं.
तो दूसरी और भारत है, जो अंदर कोरोना से लड़ रहा है, LAC पर चीन का सामना कर रहा है, और साथ में मालदीव्स जैसे पडोसी देश की दिल खोलकर मदद भी कर रहा है.
चीन को लाभ पहुंचाने वाले ग्लोबलाइजेशन की माला जपने वाले विद्वानों को आजकल सांप सूंघ गया है. लेकिन आज बड़े बड़े ग्लोबल लीडर्स की बुध्दि के ऊपर सवालिया निशान लग गया है, क्योकि चीन ने लाइन से खड़ा करके सबको बेवक़ूफ़ बनाया है.
एनीवे जो हुआ सो हुआ, हम आम लोग उम्मीद ही कर सकते हैं, की इतना सब लुटाने के बाद अब इन लीडर्स और एक्सपर्ट्स की आंखे खुल जाएँगी.
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