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https://ifpnews.com/iran-to-buy-covid-19-vaccine-from-india-health-minister

https://ifpnews.com/irans-president-voices-concern-over-relative-rise-in-covid-19-infections

https://ifpnews.com/iran-reports-over-3000-new-cases-of-covid-19-infection

https://www.businesstoday.in/current/corporate/serum-institute-founder-cyrus-poonawalla-adar-wealth-85pc-to-138-bn/story/414151.html

https://genomebiology.biomedcentral.com/articles/10.1186/s13059-017-1244-9

https://medium.com/@blindNelephant/a-short-history-of-zoroastrian-migration-to-india-4ec19ca29951 


आप में से अधिकतर लोगों को अच्छे से जानकारी होगी, आज से 1400 साल पहले की बात है, जब पर्शिया पर मुस्लिम जीत के बाद आक्रांताओं के द्वारा सताए हुए पारसी लोगों ने भारत भूमि की शरण ली थी.




और तब से लेकर आज तक पारसी लोग दूध में शक्कर की तरह घुलकर रह रहे हैं, जिसका वादा भारत आये शुरुआती पारसियों ने तब के हिन्दू राजा से किया था. 




हम हिन्दुओ को सेकुलरिज्म का पाठ पढ़ाने वाले लोगों ने खुद सायद ही कभी हमारा इतिहास पड़ने की कोसिस की हो. 




इस बात का  पूरा 100%  क्रेडिट पारसी कम्युनिटी को जाता हैं, की उन्होंने अपनी बुध्दि और परिश्रम के दम पर आज हर छेत्र में अपने झंडे गाड़े हैं. खासकर बिज़नेस की फील्ड में  इस समुदाय की अपार सफलता के बाबजूद आपने नोटिस किया हो, इतना लम्बा समय  गुजर गया, लेकिन सायद ही कभी आज के ईरान ने भारत में बसे इन पारसियों की सुध ली हो.




अब आप सोच रहे होंगे, की हम इन बीती बिसारी बातों की चर्चा क्यों कर रहे हैं.




बात यह है दोस्तों, की वह कहते हैं ना की समय बड़ा बलवान होता है. और आज यही बात साबित हो रही है.




क्योकि ईरान के हेल्थ मिनिस्टर को अचानक से याद आ गया है, की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के मालिक ईरानियन मूल के ज़ोरास्ट्रीयन हैं.




आपको पता होगा, यह भारतीय कंपनी वैक्सीन का उत्पादन करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. आज कल यह ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में डेवलप हुए कोरोना वैक्सीन कैंडिडेट की टेस्टिंग और लार्ज स्केल प्रोडक्शन के लिए  AstraZeneca के साथ मिलकर तेजी से काम कर रही है.




इसी दौरान, कोरोना वायरस ने ईरान की हालत ख़राब कर दी है, 6 जून के बाद से कल ईरान में सबसे अधिक कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की गयी है.




इस तेजी से फैलते कोरोना वायरस के खिलाफ स्वयं ईरान के राष्ट्रपति ने चिंता प्रकट की है.




इसलिए ईरान ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया से २ करोड़ वैक्सीन खरीदने के लिए फॉरवर्ड सेल कॉन्ट्रैक्ट किया है.




इंडियन कंपनी ने ईरान को विस्वास दिलाया है, की उसे हाई क्वालिटी वैक्सीन कम कीमत पर मुहैया कराइ जाएगी.




अब आप स्वयं देख लीजिये, की मौका पढ़ने पर कौन किसके काम आ रहा है. 




लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है, की रेम डिसवीर की सप्लाई हो या कोरोना वैक्सीन की प्रस्तावित सेल हो, हर बार बार बार भारत ईरान की मदद कर रहा है, लेकिन ईरान की मीडिया तो छोड़िये हमारी मीडिया तक इन पॉजिटिव डेवलपमेंट को कवर करने से बचती फिर रही है.




आप जरा कल्पना कीजिये, की यदि चीन ने ईरान को वैक्सीन सप्लाई करने का निर्णय लिया होता, तो आज हमारी मीडिया और एक्सपर्ट लोगों ने आसमान सर पर उठा लेना था.




आज यदि ईरान के हेल्थ मिनिस्टर भारत को भला बुरा कह देते, तो हमारे यहाँ ब्रेकिंग न्यूज़ का अविष्कार जल्दी से हो जाता. 




लेकिन आज भारत नेक काम कर रहा है, इसलिये पूरी मीडिया भारतीय नेक कामो को दरिया में डाल रही है. गजब जमाना है साब, ईरान में इंडिया की चर्चा हो रही है, और इंडिया को हवा तक नहीं लग रही है.




वैसे यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन बड़ी बात यह है, की कोरोना वायरस के कारण ही सही चलिए ईरान के नेताओ को याद तो आयी, भारत के सफल पारसियों की.




यहाँ हमें कोई गलत फहमी नहीं है, भले ही भारत संकट में फंसे ईरान का हर मौके पर साथ दे रहा है, ईरान भारत पर अमेरिकी भड़ास निकालने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाला है.

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