Well Done Modi Ji - India to Become Global Chemical Production Hub
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https://economictimes.indiatimes.com/industry/healthcare/biotech/pharmaceuticals/govt-has-prepared-2-schemes-to-promote-bulk-drugs-manufacturing-in-india-gowda/articleshow/78129759.cms
https://timesofindia.indiatimes.com/india/25k-cr-plan-to-cut-dependence-on-china-for-key-chemicals/articleshow/78178556.cms
https://swarajyamag.com/news-brief/modi-govt-unveils-3-production-incentive-schemes-worth-rs-12000-cr-to-boost-local-manufacturing-of-api-medical-devices-and-bulk-drugs
https://www.financialexpress.com/industry/govt-notifies-incentive-schemes-for-api-medical-devices-manufacturing-check-details/2033277/#:~:text=According%20to%20a%20notification%20issued,6%2C940%20crore%20to%20greenfield%20projects.
जबकि भारत फार्मेसी ऑफ़ the वर्ल्ड होने में गर्व महसूस करता है, हम सभी को यह जमीनी सच्चाई अच्छे से पता है, की भारत में बनने वाली दवाओं के लिए 70 फीसदी रॉ मटेरियल चीन से इम्पोर्ट किया जाता है.
और यदि आप सभी प्रकार के केमिकल इम्पोर्ट पर नजर डाले, तो हर साल भारत 1.5 लाख करोड़ के केमिकल आयात करता है, जिसमे से 85 से 90 परसेंट केमिकल सिर्फ चीन से आयत किये जाते हैं.
और आप सभी ने हमेसा से इस विचार का समर्थन किया है, की भारत स्वस्थ जीवन के लिए अपने दुसमन नंबर एक चीन पर ओवर डिपेंडेंट नहीं हो सकता है. क्योकि निर्भरता सिर्फ शोषण को जन्म देती है.
आपको पता है, कुछ ही दिनों पहले भारत सर्कार 12 हज़ार करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम लेकर आयी थी, जिसके अंतर्गत भारत में ड्रग और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोसिस की गयी थी.
इसमें से 7 हज़ार करोड़ को सिर्फ फार्मा एपीआई manufacturing को बढ़ावा देने के लिए allocate किया गया था, लेकिन रियलिटी यह है, की इन फार्मा API और insecticides के उत्पादन में लगने वाले स्पेशलिटी केमिकल तो हमें फिर भी चीन से आयत करने पड़ेंगे.
बात साफ़ है, 7 हज़ार करोड़ खर्च करने के बाद भी हम चीन पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह से ख़त्म नहीं कर पाएंगे. इसलिए मोदी सर्कार को यह बात समझ आ गयी, की ऐसे 75 केमिकल हैं, जिनके भारत में ही प्रोडक्शन पर बल देना होगा, तभी हम रियलिटी में दवाओं कीटनाशको और इंडस्ट्रियल केमिकल के मामले में पूरी तरह से आत्मा निर्भर बन पाएंगे.
इसलिये अब भारत सर्कार ने इन केमिकल्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 25 हज़ार करोड़ की भारी भरकम प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम को लांच करने का निर्णय लिया है, ताकि इंडियन स्पेशलिटी केमिकल कंपनियां चीन से कम कीमत पर इन केमिकल का उत्पादन कर पाएं.
यह सभी स्कीम्स शुरुआती सालों में सरकारी सपोर्ट देने का काम करती है, बाद में जब इंडियन केमिकल इंडस्ट्री अपने पाँव पर खड़ी हो जाएगी, तो हमें उम्मीद है, की उन्हें सरकारी सब्सिडी की जरूरत नहीं पड़ेगी.
केमिकल और फार्मा इंडस्ट्री में यह स्कीम्स अपना असर दिखाने में तो समय लगाएगी, लेकिन आप शेयर मार्किट में देख लीजिये पिछले कुछ महीनो से इस पुरे के पुरे सेक्टर में आग लगी हुई है. इन कंपनियों के शेयर दिन दूनी रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ रहे हैं.
क्योकि लॉजिक बेहद सिंपल हैं, यदि चीन की प्रोडक्शन कैपेसिटी का महज 10 फ़ीसदी उत्तपादन भी भारत में होने लगता है, तो इंडियन फार्मा और केमिकल इंडस्ट्री की साइज डबल हो जाएगी.
सायद यही कारण है, फार्मा एपीआई and chemical प्रोडक्शन अभी भी चालू होना वाकी हैं, लेकिन इन कंपनियों के शेयर राकेट पहले ही बन चुके हैं. मोदी सर्कार की इस स्कीम ने स्टॉक मार्किट में तो काम किया है, हमें अब देखना होगा, की रियलिटी के धरातल पर यह स्कीम कितना सफल होती है.
फार्मा हो, मेडिकल हो अथवा मोबाइल डिवाइस के छेत्र में अब जबकि भारत अपने पांव पर खड़ा होने की कोसिस कर रहा है, तो यह बात चीन को फूटी आँख नहीं सुहा रही है. इसलिए चीन अपनी बौखलाहट को LAC पर जाहिर कर रहा है.
सच्चाई आपको भी पता है. चीन इस पूरी मेक इन इंडिया फॉर the वर्ल्ड की कैंपेन को पटरी से उतारना चाहता है. चीन को जो करना हो वह कर ले, लेकिन भारत सर्कार के द्वारा घरेलु उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाये जा रहे नए कदम आपके पुराने स्टैंड को सही साबित करते हैं.
जब लाखों करोड़ों की सैलरी उठाने वाले एक्सपर्ट्स लोग चीन को लाभ पहुंचाने वाले ग्लोबलाइजेशन की माला दिन रात जपते थे, तब आप सभी चीन पर ओवर डिपेंडेंस के खतरों को हाई लाइट किया करते थे, और आज समय ने बड़े बड़े विद्वानों की तुलना में आप सभी को सही साबित किया है, तभी तो आज आपके विचार मोदी सर्कार के कदमो में दिखाई देने लगे हैं.
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