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https://greekcitytimes.com/2020/10/22/greece-india-boost-military-ties/

https://www.republicworld.com/world-news/us-news/us-strongly-supports-greece-turkey-dialogue-to-resolve-maritime-disput.html

https://in.reuters.com/article/cyprus-greece-egypt-int/greece-sees-imperial-fantasies-in-turkey-maritime-claims-wants-tougher-eu-action-idUSKBN2762U1

https://www.voanews.com/europe/greece-puts-navy-alert-turkey-tensions-flare-again

https://www.news18.com/news/india/greece-finalises-plan-to-build-wall-on-border-with-turkey-2982788.html

https://zeenews.india.com/world/us-greece-call-for-peaceful-resolution-of-maritime-disputes-in-east-mediterranean-2313182.html

https://timesofindia.indiatimes.com/world/europe/germany-solidarity-with-greece-cyprus-in-turkey-dispute/articleshow/78637153.cms

https://www.aa.com.tr/en/europe/greece-ready-for-dialogue-with-turkey-greek-premier/1997444 


आज के इस  वीडियो के स्पांसर हैं उमाकांत जी (Umakant  Kendhe), हमें सपोर्ट देने के लिए आपको धन्यवाद.




जैसा की हम सभी को पता है, टर्की और ग्रीस के बीच ईस्टर्न मेडिटरेनियन सी में ऊर्जा के भंडारों और सीमा को लेकर लगातार तना तनी चल रही है.




जहाँ कम्युनिस्ट चीन ने पुरे के पुरे साउथ चाइना सी को हथिया लिया, ठीक उसी प्रकार छोटा चीन यानि की टर्की मेडिटरेनियन सी में दूसरे देशो का हक़ मारने की फ़िराक़ में हैं.




वैसे यदि मेडिटरेनियन सी को हम छोड़ भी दे , तो सीरिया से लेकर लीबिया तक, सोमालिया से लेकर सायप्रस तक सिर्फ एक देश टर्की की आक्रामक एक्टिविटीज देखि जा सकती है.




इस अक्टूबर महीने की शुरुआत में समुद्री सीमा विवाद को लेकर टर्की और ग्रीस के बीच बातचीत का अवसर खुला ही था,  यहाँ तक यूरोपियन यूनियन से लेकर अमेरिका तक ने इन दोनों देशो के बीच बातचीत की कोसिस का औपचारिक समर्थन किया था.




और इससे पहले की ये दोनों देश आपस में वार्तालाप चालू कर पाते, टर्की ने अपना सर्वे शिप फिर मेडिटरेनियन सी में ऊर्जा के भण्डारो की तलाश में भेज दिया.




इस प्रकार बातचीत का जो अवसर एक महीने पहले पैदा हुआ था, आज उसके सर पर टर्की की तलवार लटक रही है.




वैसे यह कोई नई बात नहीं है, टर्की हो या पाकिस्तान हो, यह दोनों बातचीत के लिए हमेसा उतावले बैठे रहते हैं, लेकिन बातचीत  के लिए यह अपने व्यवहार में रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं करते हैं, ग्रीस को यह सच्चाई सायद अब समझ आ रही हो, हम सभी तो यह सब पिछले 70 सालो से भोगते आ रहे हैं.




वैसे टर्की के इस भड़काऊ बर्ताव का दोष बहुत हद तक यूरोपियन यूनियन को जाता है, क्योकि EU न केवल टर्की को हथियार बेचता है, बल्कि टर्की के माल को EU के विशाल बाजार में ड्यूटी फ्री एंट्री भी प्राप्त है.




EU के द्वारा किये जा रहे टर्की के तुस्टीकरण की कीमत आज ग्रीस और सायप्रस अदा कर रहे हैं, लेकिन यह EU की मूर्खता होगी, यदि वह यह समझते हैं, की टर्की की महत्वाकांक्षा केवल मेडिटरेनियन सी में ही सिमट कर रह जाएगी.




एनीवे अब जबकि टर्की ने ग्रीस के पानी में सर्वे की कोसिस चालू कर दी है, ग्रीस ने भी अपनी नौ सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया है.




इस बैकग्राउंड में हमें अच्छे से याद है, जब भी कभी हमने इस विवाद की चर्चा अपने वीडियो में की है, आप में से अधिकतर दर्शको का साफ़ तौर पर मत रहा है, की इस पुरे विवाद में भारत ने लोकतान्त्रिक ग्रीस और सायप्रस का साथ देना चाहिए. 




आपको यह जानकर खुसी होगी, की कल 21 अक्टूबर को ग्रीस में भारत के राजदूत ने ग्रीस के रक्षा मंत्री से एक महत्वपूर्ण मीटिंग की है, जिसके बाद स्वयं ग्रीस के रक्षा मंत्री ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है, की दोनों देशो के बीच बीच मिलिट्री रिलेशनशिप को बढ़ाने को लेकर सहमति बन गयी है.




इस मुलाक़ात के दौरान चर्चा की गयी, की किस प्रकार डिफेंस सेक्टर और डिफेंस इंडस्ट्री की फील्ड में दोनों देश मिलकर एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं.




हालाँकि अभी यह सिर्फ शुरुआत जान पड़ती है, लेकिन नेक काम की शुरुआत में और देरी नहीं हो रही है, यह भी कोई छोटी मोटी बात नहीं है.




पॉइंट सिंपल है, जब पाकिस्तान खुले तौर पर टर्की का समर्थन करता है, तो आखिर क्यों भारत ग्रीस और सायप्रस के साथ खड़ा होने में हिचकिचाता है.




हम यहाँ पर यह नहीं कह रहे हैं, की टर्की और पाकिस्तान नेक्सस के जबाब में भारत ने ग्रीस और सायप्रस के साथ रिएक्टिव अलायन्स खड़ा करना चाहिए.




हम सिर्फ यह कह रहे हैं, की लोकतान्त्रिक मित्र देश होने के नाते भारत के ग्रीस और सायप्रस के रिश्ते मजबूत होते रहने चाहिए, क्या पता कब किसे किसकी जरूरत पड़ जाये. वैसे भी संकट काल के लिए तयारी शांति काल में ही की जाती है.




इसलिए आप सभी हमेसा से भारत और ग्रीस के बीच जिस डिफेंस कोऑपरेशन की मांग किया करते थे, अब वह मांग जमीं पर उतरने के लिए तैयार हो रही है. देर से ही सही लेकिन दुरुस्त कदम उठाने के लिए आप सभी की तरफ से मोदी सर्कार को धन्यवाद.

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